हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन पितरों को तर्पण करने से और पवित्र नदी में स्नान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार हिंदू कैलेंडर के अनुसार जुलाई यानी कि आषाढ़ का महीना भी बहुत पवित्र माना जाता है और पुराणों के अनुसार इस महीने की अमावस्या तिथि का अलग ही महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है। 

आषाढ़ माह की अमावस्या तिथि को हलहारिणी अमावस्या और अषाढ़ी अमावस्या भी कहते हैं। हलहारिणी अमावस्या के दिन हल और खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है। इस तिथि पर किसान हल का पूजन करके ईश्वर से फसल हरी-भरी बनी रहने की कामना करते हैं। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें इस साल कब मनाई जाएगी आषाढ़ महीने में अमावस्या तिथि और इसका क्या महत्त्व है। 

आषाढ़ अमावस्या तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त 

asaadh amavasya date and muhurt

  • इस साल जुलाई के महीने में अमावस्या तिथि 9 जुलाई, शुक्रवार के दिन पड़ेगी। 
  • आषाढ़ के महीने में पड़ने की वजह से इसे अषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है। 
  • अमावस्या तिथि: 9 जुलाई को सुबह 05 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ 
  • 10 जुलाई को सुबह 06 बजकर 46 मिनट पर समाप्त
  • अमावस्या तिथि व्रत का पारण 10 जुलाई 2021, शनिवार के दिन किया जाएगा

पवित्र नदी में करें स्नान 

snan in river amavasya

अमावस्या तिथि में गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। यदि आप किसी वजह से नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो प्रातः स्नान के समय नहाने के पानी के साथ थोड़ा गंगाजल छिड़कें इससे भी नदियों में स्नान के जैसा ही पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन दान पुण्य करना भी अत्यंत लाभकारी होता है और अमावस्या का दिन पितरों का श्राद्ध करने के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इसलिए पितरों के तर्पण हेतु आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान एवं दान-पुण्य किया जाता है। 

आषाढ़ अमावस्या का महत्व 

amavasya tithi significance

हिंदुओं में आषाढ़ का महीना बहुत पवित्र माना जाता है और इस महीने की अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है और जीवन सुखों से भर जाता है। इस अमावस्या तिथि को कृषि कार्यों से भी जोड़ा जाता है और इस दिन हल की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस अमावस्या तिथि में श्रद्धा भाव से पूजन और व्रत करने से घर में कभी भी अन्न धन की कमी नहीं होती है। 

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होती है पितरों की पूजा 

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किसी भी अमावस्या तिथि में पितृ पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पितरों को तर्पण करने और श्रद्धा पूर्वक उनका श्राद्ध करने से पूर्वजों की कृपा दृष्टि भी प्राप्त होती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। इस दिन पितरों के नाम से पंडितों को भोजन कराना और गरीबों को दान देना भी अत्यंत शुभ होता है। 

इस प्रकार आषाढ़ अमावस्या का शास्त्रों में बहुत अधिक महत्त्व है और इस दिन श्रद्धा भाव से पूजन करना अत्यंत लाभकारी है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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