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अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने पहली विकलांग भारतीय महिला की कहानी जानिए

भारत की अरूणिमा सिंहा ने अंटार्कटिका  की चोटी पर चढ़ाई करके एक नया इतिहास रचा था। जानें इनकी जीत में ऐसा क्या खास था। 
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Published -14 Jul 2022, 18:01 ISTUpdated -30 Jul 2022, 17:24 IST
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Know about Arunima Sinha in hindi

एक बहुत पुरानी कहावत है कि अगर इंसान कुछ करने की ठान ले, तो बड़े से बड़े काम आसानी से कर सकता है फिर चाहे पहाड़ क्यों न हो। हालांकि, किसी भी इंसान के लिए पहाड़ पर चढ़ना आसान नहीं है, लेकिन जब कोई दुनिया के फेमस ऊंचे पहाड़ पर चढ़ता है, तो दुनिया उसे सलाम करती है। हालांकि, अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई करना हर पर्वतारोही के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। 

लेकिन इस सपने को सच किसी पुरुष ने नहीं बल्कि एक विकलांग भारतीय महिला ने किया है। जी हां, अरूणिमा सिन्हा ने इस सफर को एक पैर से पूरा किया और वरेस्ट शिखर पर चढ़ने वाली पहली भारतीय दिव्यांग महिला बनीं। अरूणिमा सिन्हा ने दुनिया को बताया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो इंसान कुछ भी कर सकता है। आइए जानें अरूणिमा सिन्हा की सफलता की कहानी। 

माउंट एवरेस्ट के बारे में

Mount Everest

आपको बता दें कि माउंट एवरेस्ट 60 मिलियन वर्ष से भी अधिक पुराना है। इस माउंटेन का निर्माण तब हुआ था जब भारत की कॉन्टिनेंटल प्लेट एशिया में क्रैश हो गई थी। बता दें कि तब भारत की प्लेट एशिया के नीचे पुश्ड हो गई थी। इसके बाद भूमि के एक बड़े हिस्से को ऊपर की ओर उठा दिया गया था, जिससे दुनिया का सबसे ऊंचा माउंटेन रेंज पैदा हुआ। (वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बारे में जानें)   

इसे ज़रूर पढ़ें- देश की पहली महिला इलेक्शन कमिश्नर वी एस रमादेवी के बारे में जानें 

कौन हैं अरूणिमा सिन्हा? 

अरूणिमा सिन्हा के बारे में ये यकीनन सब जानते होंगे कि उन्होंने अंटार्कटिका  पर चढ़ने वाली पहली भारतीय विकलांग महिला का खिताब जीता है। लेकिन आपको बता दें कि इनका जन्म सन 1988 में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। (माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल)

वह उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की रहने वाली हैं। अरूणिमा सिन्हा ने 21 मई 2013 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की फतह हासिल की और इतिहास रचा। 

अरूणिमा सिन्हा की कहानी

बता दें कि साल 2011 के बाद से अरूणिमा सिन्हा ने अपना एक पैर खो दिया था। जब वो ट्रेन से लखनऊ से देहरादून जा रही थीं और इस दौरान उनके बैग और सोने की चेन खींचने के प्रयास में कुछ अपराधियों ने बरेली के पास पदमावती एक्सप्रेस से अरुणिमा को बाहर फेंक दिया था। इस घटना के बाद उनकी जान को बच गई लेकिन उन्होंने अपना एक पैर खो दिया था।

अरूणिमा सिन्हा की उपलब्धियां 

  • भारती संस्था द्वारा सोनपुर रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।   
  • अम्बेडकरनगर रत्न पुरस्कार से अम्बेडकरनगर महोत्सव समिति की तरफ से नवाजा जा चुका है। 

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Image Credit- (@Freepik and Twitter) 

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