हम अक्सर फिल्मों में और किसी बड़ी सक्सेस स्टोरी में अपने रोल मॉडल्स को ढूंढते हैं, लेकिन ऐसा अक्सर होता है कि हमारे आस-पास ही ऐसे कई लोग मौजूद होते हैं जो रोल मॉडल्स की तरह होते हैं। महिलाओं के बचपन से ही कई कसौटियों पर खरा उतरना होता है जहां पर उन्हें हर मुमकिन चीज़ सिखाई जाती है जो समाज के तय पैमानों से जुड़ी होती है, लेकिन अगर उन्हीं पैमानों को तोड़ना पड़े तो? कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपनी खुद की राह बनाती हैं और अपने हिसाब से जीती हैं और यही कारण है कि वो खुद रोल मॉडल बन जाती हैं। 

ऐसी ही एक शख्सियत हैं आरती गुप्ता जो महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्था  FICCI FLO कानपुर की चेयरपर्सन हैं। महिलाओं को फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होना सिखाने के साथ-साथ आरती महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करती हैं। आज हम आरती के बारे में कुछ बातें जानते हैं जो औरों से अलग हटकर कुछ नया करने के बारे में सोचती हैं और कई लोगों को प्रेरित करती हैं। 

हैदराबाद से लेकर FICCI FLO तक का ऐसा था सफर-

आरती गुप्ता हैदराबाद में पैदा हुई थीं। उन्होंने IIT कानपुर से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस स्टडीज में डिप्लोमा हासिल किया। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस स्टडीज में डिप्लोमा लिया और नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। आरती हमेशा ही अपने परिवार को अपनी प्रेरणा मानती हैं और उनका कहना है कि उनके परिवार ने हमेशा उनके सपनों को उड़ान भरने का साहस दिया और हौसला बनाए रखा। आरती DBR Ventures की CIO हैं जो एक एंजेल इंवेस्टिंग कंपनी है जो स्टार्टअप्स में इन्वेस्ट करती है। 

आरती का कहना है कि उन्हें शुरू से ही FICCI FLO अपनी ओर आकर्षित करता था जो महिलाओं को न सिर्फ अपने पैरों पर खड़े होने का एक प्लेटफॉर्म देता है बल्कि साथ ही साथ इस संस्था से जुड़े सभी लोगों को आगे बढ़ने का मौका देता है। इस संस्था से बहुत ही प्रगतिशील महिलाएं जुड़ी हुई हैं जो महिला सशक्तिकरण को लेकर बहुत आगे बढ़ रही हैं। 

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परिवार का सपोर्ट हमेशा रहा है साथ-

आरती गुप्ता अपनी सक्सेस को अपने परिवार के सपोर्ट से जोड़कर देखती हैं। उनका परिवार काफी प्रोग्रेसिव था और उनके और उनके भाई के लिए किसी भी तरह से अलग नियम नहीं थे। वो हमेशा अपने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। आरती इस मामले में खुद को काफी भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें अपने ससुराल में भी वैसा ही सपोर्ट मिला। ऐसा सोचा जाता है कि छोटे शहर में अगर आपकी शादी हो तो आपको ज्यादा बेहतर अवरस नहीं मिलते, लेकिन ऐसा आरती के साथ नहीं है और उनका मानना है कि अगर आप टैलेंटेड हैं तो आप कुछ भी कर सकते  हैं। लोग ये सोचते हैं कि बच्चों के होने के बाद करियर खत्म हो जाता है, लेकिन आरती ने अपनी Phd तब की जब उनकी बेटी सिर्फ 2 साल की थी।  

आरती सिर्फ अपनी ही नहीं बल्कि अपने परिवार की कमाई को भी मैनेज करती हैं और इनवेस्ट करती हैं जो अधिकतर घरों में परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा की जाती है।  

आरती के लिए सक्सेस के हैं ये मायने- 

आरती मानती हैं कि एक इंसान को अपना विजन साफ रखना चाहिए क्योंकि इसी से आपके सपने पूरे होंगे। आपके सपने क्या हैं और आप उन्हें पूरा करने के लिए कितनी मेहनत, लगन, पढ़ाई और कितने त्याग कर सकते हैं ये आप पर निर्भर करता है। आरती के लिए सक्सेस कुछ भी निश्चित नहीं है ये एक यात्रा है जो लगातार चलती रहनी चाहिए। अगर उन्होंने कोई तय लक्ष्य स्थापित कर लिया है तो वो उसे पाने के लिए कुछ भी करेंगी और यात्रा निरंतर चलती रहेगी। अगर वो हारेंगी तो फिर से खुद को संभाल कर आगे बढ़ेंगी। इसलिए सक्सेस हार और जीत दोनों की यात्रा का नाम है किसी तय लक्ष्य का नहीं।  

भारतीय महिलाओं को फाइनेंशियल इंडिपिंडेंस की शुरुआत करनी होगी- 

आरती का मानना है कि भारतीय महिलाएं अब जेंडर गैप को कम कर रही हैं और पढ़-लिखकर आगे बढ़ रही हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि वो शिक्षा के क्षेत्र में आगे हैं। आरती का मानना है कि समाज ने महिला और पुरुष के लिए तय पैमाने निर्धारित कर दिए हैं, लेकिन जहां वर्क पार्टिसिपेशन की बात आती है वहां हम सबसे पीछे खड़े हो जाते हैं। पढ़ाई के मामले में लड़कियां आगे हैं तो काम करने के मामले में क्यों नहीं? आरती खुद एक ज्वाइंट फैमिली से हैं और वो मां, बहू, पत्नी की सारी जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को अपना रास्ता चुनना होगा और अपने काम और परिवार को बैलेंस करना होगा।  उनका मानना है कि 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' के साथ-साथ हमारे पीएम को 'बेटी कमाओ' को भी प्रमोट करना चाहिए क्योंकि महिला सशक्तिकरण फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस से भी आता है।  

महिलाओं की मदद करने वाली संस्था FICCI FLO- 

FICCI FLO महिलाओं के लिए काम करने वाली पैन इंडिया संस्था है जिसका हेडक्वार्टर दिल्ली में है। भारत के 17 अलग-अलग स्थानों पर इसके अलग-अलग चैप्टर्स बनाए गए हैं। इससे 8000 महिलाएं जुड़ी हैं जो अलग-अलग फील्ड में काम करती हैं। 36 साल के एक्सपीरियंस के साथ ये संस्था हमेशा वर्कशॉप्स, सेमिनार्स, कॉन्फ्रेंस, ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग जैसे प्रोग्राम्स शुरू करती हैं जो महिलाओं की मदद करें और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होना सिखाएं।  

FLO कानपुर नया इनीशिएटिव है जो RISE (RAISE, Ignite, Sustain and Empower) विजन के साथ चलता है। पिछले साल कोरोना वायरस पैंडेमिक के बाद भी 70 वेबिनार्स और वर्कशॉप्स किए गए और अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने की कोशिश की गई। कानपुर के पास के दो गांव भी गोद लिए गए जहां महिलाओं को आगे बढ़ने के गुण सिखाए जा रहे हैं।  

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हरजिंदगी की रीडर्स के लिए दिया ये संदेश- 

हमें आगे बढ़ना होगा और थोड़े रिस्क भी जरूरी हैं। अगर खतरे के डर से आगे ही नहीं बढ़ेंगे तो ये गलत होगा। अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित करें और आगे बढ़ें। किसी को ये कहने न दें कि आप क्या करें बल्कि अपने लिए अपना रास्ता खुद चुनें, खुद पर भरोसा रखें क्योंकि ये विकल्प आपका है।  

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