महाभारत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किरदारों में जितना वैरिएशन देखने को मिलती हैं, उतना कहीं और देखने को नहीं मिलता। धर्म, राजनीति और कूटनीति, महाभारत में इनका अनोखा संगम देखने को मिलता है। इसके किरदारों में अलग-अलग तरह के शेड्स देखने को मिलते हैं। सबसे दिलचस्प किरदार निश्चित रूप से कृष्ण का है, वहीं महिला किरदारों में द्रौपदी, कुंती और गांधारी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। आमिर खान की मेगा बजट फिल्म 'महाभारत' इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। आमिर खान इसमें कृष्ण का किरदार निभा रहे हैं, इस बात को शाहरुख खान भी कन्फर्म कर चुके हैं। लेकिन इस फिल्म महिला किरदारों में कौन से चेहरे नजर आएंगे, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। महाभारत के किरदारों के बारे में हमने बात की पंडित भानु प्रताप नारायण मिश्र से और उन्होंने इसके महिला किरदारों के बारे में विस्तार से बात की।

द्रौपदी पर टिकी रहेंगी सबकी निगाहें

महाभारत में कौरवों और पांडवों के बीच होने वाला युद्ध की वजह बना द्रौपदी का भरी सभा में अपमान। लेकिन इस अपमान के पीछे द्रौपदी की वह हंसी थी, जो दुर्योधन को नागवार गुजरी थी। दरअसल विश्वकर्मा जी ने जो महल बनाया था, वह देखने में काफी सुंदर था। वहां चलने पर अक्सर जमीन वाली जगह पर पानी और पानी वाली जगह पर जमीन होने का आभास होता था। इसी कारण इस महल में चलते हुए दुर्योधन को मतिभ्रम हुआ, जिस पर पांडव हंस पड़े। इसी दौरान द्रौपदी ने टिप्पणी कर दी 'अंधे का बेटा अंधा होता है।' दुर्योधन ने इससे अपमानित महसूस किया और वापस आकर उसने मामा शकुनी से पूछा कि क्या करना चाहिए। मामा शकुनि ने दुर्योधन को जुआं खेलने और इसके बहाने द्रौपदी से अपमान का बदला लेने की सलाह दी। 

पांडव जुएं में द्रौपदी को हार गए और दुशासन उसे भरी सभा में बालों से खींचते हुए लाया। द्रौपदी का चीरहरण और उसके बाद द्रौपदी की ली गई प्रतिज्ञा कि जब तक वह दुशासन के लहू से अपने केश नहीं धोएगी, तब तक वह बाल नहीं धोएगी, यहीं से पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध की भूमिका तैयार हो गई थी। 

वैसे द्रौपदी अपने समय की सबसे बुद्धिमान और गरिमामय स्त्रियों में गिनी जाती है। माना जाता है कि वह अग्नि से पैदा हुई थीं और उन्हें पाने के लिए उनके पिता ने यज्ञ किया था। द्रौपदी दृष्टदुम्न के होने के बाद पैदा हुई थीं और बचपन से ही वह बड़ी तेजस्वी थीं। 12 साल वनवास के बाद जब पांडव 1 साल के लिए अज्ञातवास में रह रहे थे तभी अर्जुन उन्हें जीत कर लाए थे। जब पांडव द्रौपदी को लेकर वापस लौटे तो उन्होंने अपनी मां कुंती से कहा, मां हम भिक्षा लेकर आए हैं। कुंती ने देखा नहीं और कहा कि भिक्षा आपस में बांट लो। मां जब बाहर आई तो उन्होंने और पांचों भाइयों ने यह महसूस किया कि उनसे भारी गलती हो गई। तभी आकाशवाणी हो गई कि ईश्वर ऐसा ही चाहता था। दरअसल द्रौपदी अपने लिए जैसा पति चाहती थीं, वैसे गुण किसी एक इंसान में होना संभव नहीं था। इसीलिए वह पांडवों की रानी बनीं। पांचों पांडवों में नकुल सबसे सुंदर थे तो अर्जुन सबसे वीर, युधिष्ठिर धर्मराज थे तो वहीं भीम सबसे बलशाली।

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द्रौपदी के लिए एक टाइम टेबल भी बनाया गया था कि वह कितना समय किस पति के साथ गुजारेंगी। व्यास जी ने उनसे कहा था, 'आप सबसे बड़ी रानी है, आपको पांचों भाइयों को समय देना होगा।' द्रौपदी घर का सारा कामकाज कुशल तरीके से संभाल लेती थीं और अपने पांचों पतियों की देखभाल भी बखूबी करती थीं। इसी पर श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा ने एक बार उनसे पूछा था, 'आपने क्या जादू कर रखा है, जो पांचों पांडव आपकी बात करते हैं। क्या इसके पीछे कोई वशीकरण है। मुझे भी यह कला सिखा दीजिए।' इस पर द्रौपदी उनसे नाराज हुईं, उन्होंने कहा कि ये कोई वशीकरण नहीं है। मैं अपना कर्तव्य निभाती हूं। मैं अपने पांचों पतियों की दूसरी रानियों का भी पूरा सम्मान करती हूं और अपने पतियों के लिए सारे दायित्वों का पालन करने का प्रयास करती हूं।' एक समय में सुभद्रा, जो भगवान कृष्ण की बहन थी, को अर्जुन पाना चाहते थे, उस समय में कृष्ण ने ही उन्हें सलाह दी थी कि उनका हरण करके ले जाओ। तब यह भी विवाह की एक प्रचलित परंपरा हुआ करती थी। जब अर्जुन सुभद्रा को लेकर आए थे, तब द्रौपदी ने उन्हें घर का कामकाज सिखाया था, इसी तरह उन्होंने दूसरी रानियों को भी अपने काम में पारंगत होने के गुण सिखाए थे। अपने इन्हीं गुणों के कारण द्रौपदी सभी रानियों की पूज्य थीं। माना जाता है कि पांडवों की मृत्यु के पश्चात जब वे स्वर्गारोहण के लिए गए तो अपने साथ इतना सारी रानियों में सिर्फ द्रौपदी को ही साथ ले गए थे। बद्रीनाथ के एक पहाड़ पर आज भी इस स्थान का अस्तित्व माना जाता है। कहा जाता है कि वहां कोई अच्छी आत्मा जाती है तो पानी गिरता है और बुरी आत्मा जाती है तो पानी नहीं गिरता। द्रौपदी के किरदार को पर्दे पर उतार पाना अपने आप में सबसे ज्यादा चैलेंजिंग है। यही वजह है कि आमिर खान की महाभारत में द्रौपदी के किरदार को लेकर काफी कयास लगाए जा रहे हैं। लंबे वक्त तक यह माना जा रहा था कि इस किरदार में दीपिका पादुकोण नजर आएंगी, लेकिन दीपिका ने इससे साफ इनकार कर दिया। वैसे हमारा मानना है कि इस किरदार के साथ विद्या बालन जैसी टैलेंटेड एक्ट्रेस ही इंसाफ कर सकती हैं। विद्या बालन नेगेटिव से लेकर पॉजिटिव तक हर तरह के शेड्स में नजर आएंगी हैं और वह इस भूमिका के लिए पूरी तरह से परफेक्ट हैं।

क्या रेखा दिखेंगी कुंती के अवतार में  

mahabharat aamir khan cast of draupadi kunti gandhari inside

अगर कुंती के किरदार की बात करें तो उनका किरदार भी काफी अनोखा है। कुंती ने क्रोधी स्वभाव के लिए बदनाम दुर्वासा ऋषि को अपनी सेवा से प्रसन्न कर लिया था। जब कुंती छोटी थीं तब एक बार दुर्वासा ऋषि उनके घर आए थे। उस समय में कुंती के पिता ने अपनी बेटी को उनकी सेवा करने को कहा था। लगभग एक साल तक ऋषि वहां रहे, इस दौरान वह कुंती के सेवाभाव से खुश हो गए। उन्होंने कुंती से कहा, 'मैं तुमसे बहुत खुश हूं, मैं तुम्हें बताता हूं कि देवताओं को कैसे बुलाना चाहिए। कुंती उस समय अपनी टीनेज में थीं। उनके मन में इच्छा हुई कि देवताओं को बुलाकर देखा जाए। उन्होंने ऋषि दुर्वासा का बताया सूर्य मंत्रोच्चार किया और सूर्य प्रकट हो गए। इस पर कुंती घबरा गईं। सूर्य ने उन्हें एक पुत्र दे दिया। इस पर कुंती ने कहा कि मैं अविवाहित हूं, बच्चा होने से मेरी बदनामी होगी। तब सूर्य देवता ने कहा, 'आपकी बदनामी नहीं होगी, आपका पुत्र बहुत तेजस्वी होगा। राजनिवास में रहने वाली दासी और कुंती के अलावा यह बात किसी को पता नहीं थी। कर्ण कुंडल और कवच के साथ पैदा हुए थे। कुंती ने समाज के भय से पुत्र को एक बक्से में डालकर नदी में बहा दिया और पशुओं से उसकी रक्षा करने के लिए उसमें लाख लगा दी। यही बक्सा धीरे-धीरे बहते हुए भागलपुर चला गया था। शिशु कर्ण को काैरवों के राजा धृतराष्ट्र की सेवा में रहने वाले अधिरथ ने नदी ने निकाला और अपनी पत्नी राधा को लाकर दिया। अधिरथ सूत चलाने वाले थे। इसीलिए आगे चलकर कर्ण सूत पुत्र कहलाए। कुंती ने हस्तिनापुर के राजा पांडु के असमय मौत होने पर अपने पुत्रों की अकेले देखभाल की और उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने की सीख दी। एक बार कुंती ने भगवान कृष्ण से कहा था।, 'आप मुझे इतना कष्ट दीजिए कि मैं सदैव आपका ही ध्यान करती रहूं।'

माना जा रहा है कि पांडवों की मां के इस अहम किरदार को रेखा निभाने जा रही हैं। रेखा ने अपने समय में कई आर्ट फिल्मों में बेहतरीन भूमिकाएं निभाई हैं, उम्मीद की जा रही है कि वह इस फिल्म में कुंती के किरदार को बखूबी सिल्वर स्क्रीन पर पेश कर पाएंगी।  

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कौन दिखेगा न्यायप्रिय गांधारी के अवतार में 

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गांधारी धृतराष्ट्र की पत्नी थीं और वह धर्मपरायण स्त्री थीं। उनके पति दृष्टिहीन थे, इसीलिए उन्होंने अपने पति का साथ देने के लिए आंखों पर पट्टी बांध ली थी। गांधारी अपने बेटे दुर्याधन को उसके गलत व्यवहार पर अक्सर समझाती थीं कि उसे समझबूझ कर चलना चाहिए, पांडवों को सत्ता सौंप देनी चाहिए। पांडव भी तुम्हारे भाई हैं, बाहर तुम 105 हो।' जब वे वनवास में गए थे, तब गांधारी बेटे को समझाती थीं, 'एक दिन वे लौट आएंगे, उत्तराधिकारी पांडव ही हैं।' लेकिन दुर्योधन ने अपनी मां की बात नहीं मानी। जब पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध हुआ तो गांधारी ने इस दौरान अपने बेटे दुर्योधन को जीवित रखने के लिए अपनी शक्ति का प्रयोग किया था। इसे शक्ति को पाने पर कोई भी दुर्योधन को हरा नहीं सकता था। इसके लिए दुर्योधन को निर्वस्त्र होकर मां के सामने आना था, लेकिन दुर्योधन अपने निजी अंग पर पत्र लगाकर मां के सामने आए थे। इस कारण उन अंगों पर मां के नेत्रों की शक्ति काम नहीं कर पाई। इसी का फायदा भीम ने उठाया और अर्जुन को दुर्योधन की जांघ पर वार करने का संकेत दिया। दुर्योधन यह वार सह नहीं पाया और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इस तरह महाभारत के युद्ध में गांधारी के सारे पुत्र मारे गए थे। लेकिन सिर्फ एक पुत्र युयुत्सु बच गया था। दरअसल जब युद्ध होने लगा था, तो युधिष्ठिर ने घोषणा की थी, जो जिस पक्ष में जाना चाहे, जा सकता है, तब युयुत्सु कौरवों का साथ छोड़कर पांडवों के साथ आ गया था, इसीलिए वह जीवित बच गया।

गांधारी ने धृतराष्ट्र को भी कई बार समझाया था, लेकिन धृतराष्ट्र पुत्र मोह में गलत का साथ देने लगे थे और बेटे की जुआं खेलने की आदत को काबू नहीं कर सके। गांधारी ने अपने पुत्रों के मारे जाने पर श्रीकृष्ण को श्राप दे दिया था, उन्होंने कहा था, 'हे केशव, मैं तुम्हारी शक्ति से परिचित हूं। तुम चाहते तो यह युद्ध होता ही नहीं, पांडव और कौरव एक दूसरे के हाथों मारे गए और तुम तमाशा देखते रहे। जिस तरह मेरे वंश का सर्वनाश हुआ, मेरा श्राप है कि उसी तरह तुम्हारे वंश का भी सर्वनाश हो जाएगा और तुम कुछ नहीं कर पाओगे।

गांधारी जैसी किरदार को पर्दे पर वही महिला सही तरीके से निभा सकती है, जो पूरी तरह से इस किरदार में ढल जाए और इसके लिए हमें हेमा मालिनी सूटेबल लगती हैं। देखना होगा कि फाइनल कास्ट में गांधारी के किरदार में कौन नजर आता है।