नवजात शिशु या छोटे बच्चे सोते वक्त बहुत दिक्कत करते हैं। एक तो शिशु जब रोते हैं जो पेरेंट्स को पता नहीं चल पाता कि उन्हें क्या चाहिए। जानकारी के लिए बता दें कि जब बच्चों को नींद आती है लेकिन वह सो नहीं पाते हैं तो तब भी बच्चे किलकारी मारते हैं। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को समझ नहीं आता कि आखिर वह ऐसा क्या करें जिससे बच्चा सो जाए! हालांकि इस तरह की दिक्कत उन लोगों के साथ ज्यादा होती है जो पहली बार पेरेंट्स बनते हैं। अगर घर में कोई बड़ा बुजुर्ग न हो तो बच्चों को सुलाना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं है। बच्चों के न सोने से न सिर्फ उनकी सेहत पर ही असर नहीं पड़ता, बल्कि पेरेंट्स भी कहीं न कहीं इससे जूझते हैं। बच्चे के न सोने से सबसे ज्यादा दिक्कत मां को होती है। लेकिन अगर आपको बच्चों को सुलाने का सही तरीका और टिप्स पता हों तो आप खुद ही सोचिए ये काम कितना आसान हो जाएगा। तो देर किस बात की है? आज इस आर्टिकल में हम आपको बच्चों को सुलाने की बेस्ट टिप्स बता रहे हैं।

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नहाते वक्त खिलौने न दें

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आपको बता दें कि जब तक शिशु 1 साल का नहीं हो जाता उसे गुनगुने पानी से ही नहलाना चाहिए। शिशु को हमेशा मालिश करने के बाद नहलाना चाहिए। इससे उनकी बॉडी रिलैक्स हो जाती है और वह नहाने के बाद तुरंत सो जाते हैं। इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चों को नहाते वक्त कभी खिलौने न दें। क्योंकि खिलौनों की आवाज बच्चों के सब कॉन्शियस माइंड में बैठ जाती है, जिस वजह से उन्हें सोते वक्त दिक्कत होती है।

दूध पिलाने के बाद ही सुलाएं

रिसर्च और डॉक्टर्स दोनों बताते हैं कि शिशु भूख की वजह से या तो सो नहीं पाते हैं या आधी नींद से ही उठ जाते हैं। ऐसे में यह मां की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने शिशु का पेट हमेशा भरा रखे। खासकर कि शिशु को सुलाने से पहले दूध जरूर पिलाएं। इससे उन्हीं अच्छी और गहरी नींद आती है।

पालने में परफ्यून न लगाएं

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अगर आप शिशु को पालने में सुलाती हैं तो याद रखें कि उनके पालने में किसी भी तरह की खुशबू वाली चीज का इस्तेमाल न करें। यहां तक की शिशु के कपड़े और बिस्तर बिना खुशबू वाले साबुन से ही धोने चाहिए। चाहे कोई प्रॉडक्ट कितना भी ब्रॉंडिड क्यों न हो, लेकिन बच्चों को उनसे एलर्जी हो सकती है। छह महीने से बड़े बच्चों के पालने के पास एक-दो बूंद लेवेंडर ऑयल भी डाल सकते हैं। इससे बच्चों का चिड़चिड़ापन दूर होता है।

पेट दर्द

क्योंकि शिशु सिर्फ दूध पीते हैं इससे कई बार उन्हें एसिडिटी की समस्या हो जाती है। अगर बच्चे को ज्यादा डकार आ रही है या वह गैस छोड़ रहा है तो आप इस चीज का अंदाजा खुद भी लगा सकती हैं। ऐसी स्थिति में खुद डॉक्टर बनने से अच्छा है आप किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

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सोने का समय तय करें

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कई बार समय में परिवर्तन होने के कारण भी बच्चे सही तरह से सो नहीं पाते हैं। इसलिए बच्चे के सोने का समय सुनिश्चित करें। फिर उस समय अपना सब काम छोड़ कर बच्चे को ही सुलाएं। शिशु के जल्दी सोने का मतलब जल्दी उठना बिल्कुल नहीं है। कई बार अच्छी नींद के कारण बच्चे सुबह देर से उठते हैं।