कहते हैं नया काम शुरू करने के लिए कोई उम्र नहीं होती है और ये इंसान पर निर्भर करता है कि वो आगे किस ओर चलता है। ओलंपिक गेम्स में अपनी जगह बनाने वाले खिलाड़ियों की भी अपनी अलग पहचान है और आगे बढ़ने के लिए उनका जज्बा देखते ही बनता है। 40 साल की तेजस्विनी सावंत भी भारत की तरफ से ओलंपिक्स में जाने वाली ऐसी ही एक खिलाड़ी हैं जो उम्र के दायरों से नहीं बंधी हैं और 40 साल की उम्र में ओलंपिक गेम्स में डेब्यू कर रही हैं।

तेजस्विनी सावंत 50 मीटर महिला शूटिंग गेम में हिस्सा लेने वाली हैं। कोल्हापुर की रहने वाली तेजस्विनी सितंबर में ही 41 साल की हो जाएंगी और वो अपने 41वें जन्मदिन से पहले वो ओलंपिक मेडल जीतने की पूरी तैयारी में हैं। 

हरजिंदगी आपको हर रोज़ ओलंपिक गेम्स में हिस्सा लेने वाली प्रतिभावान महिला खिलाड़ियों से रूबरू करवा रही है। आज इसी कड़ी में बात करते हैं भारतीय शूटर तेजस्विनी सावंत की। 

olympic games tejaswini sawant

अर्जुन अवॉर्ड जीतकर तेजस्विनी ने दिखाया अपना हुनर-

12 सितंबर 1980 को पैदा हुई तेजस्विनी ने अपने करियर में बहुत सारे पायदान चढ़े हैं। तीन बहनों में सबसे बड़ी तेजस्विनी कोल्हापुर में ही जयसिंह कुसाले से ट्रेनिंग लेती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने खेल को बढ़ाया और स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के तौर पर सिलेक्ट हो गईं। तेजस्विनी ने 29 अगस्त 2011 में ही अर्जुन अवॉर्ड जीत लिया था। उन्होंने सबसे पहले भारत को 2004 में 9 वें दक्षिण एशियाई स्पोर्ट्स फेडरेशन गेम्स में जीत दिलाई थी। ये गेम्स इस्लामाबाद पाकिस्तान में खेले गए थे और यहां तेजस्विनी को गोल्ड मेडल दिया गया था। 

sawant and shooting

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कॉमनवेल्थ गेम्स में भी दिलाया गोल्ड-

तेजस्विनी सावंत ने 2006 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत को 10 मीटर एयर राइफल सिंगल्स और 10 मीटर महिला पेयर राइफल इवेंट में गोल्ड मेडल दिलाया था। ये गेम्स ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में खेले गए थे। 

ISSF वर्ल्ड कप और चैम्पियनशिप में दिखाया दमखम-

तेजस्विनी ने 2009 ISSF World Cup में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके बाद 8 अगस्त 2010 में म्यूनिक में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में तेजस्विनी ने गोल्ड मेडल जीता था। वो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में शूटिंग में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला चैम्पियन बन गई थीं।  

2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता था मेडल- 

साल 2010 तेजस्विनी के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ था जहां उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन अलग-अलग इवेंट्स में एक ब्रॉन्ज और दो सिल्वर मेडल जीते थे।  

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2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हासिल की जीत- 

तेजस्विनी ने 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में दो अलग-अलग इवेंट्स में हिस्सा लिया था और दोनों में ही उन्होंने मेडल जीते। उन्होंने 12 अप्रैल को हुए  Women's 50m Rifle Prone के फाइनल्स में सिल्वर मेडल जीता था वहीं एक दिन बाद 13 अप्रैल को हुए Women's 50m Rifle 3 Position फाइनल इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था।  

2017 से लेकर अभी तक तेजस्विनी ने अपने खेल को लगातार बढ़ाया है। टोक्यो ओलंपिक्स की आधिकारिक वेबसाइट में ये जानकारी दी गई है और वो अपने खेल से अब ओलंपिक मेडल जीतने की तैयारी में हैं। 

gaming profile tejaswini sawant 

2016 में तेजस्विनी ने बिल्डर समीर दारेकर से शादी कर ली थी। तेजस्विनी हमेशा से ही अपने खेल को निखारने की कोशिश करती रही थीं और उनकी मां सुनीता सावंत भी स्टेट लेवल क्रिकेट और वॉलीबॉल चैम्पियन रही हैं। 13 साल की उम्र से शूटिंग की शुरुआत करने वाली तेजस्विनी धीरे-धीरे इस लेवल तक पहुंची हैं। 31 जुलाई को तेजस्विनी का 50m Rifle 3 Positions क्वालिफाइंग इवेंट है।  

तेजस्विनी जीत की ओर अपने कदम बढ़ा चुकी हैं और पूरे देश की निगाहें उनपर हैं। तेजस्विनी को हमारी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।