"मम्मी मुझे यह सब्जी नहीं खानी आप मेरे लिए कोई दूसरी सब्जी बना दो, 

मम्मी आज मेरे सहेलियां आ रही है प्लीज कुछ अच्छा बना दो।" 

ऐसी कई फरमाइश हम करते आ रहे है। मैं खाना बनाने को चुटकी बजाते जितना आसान समझते थी। यह कभी नहीं सोचा कि इसे बनाने में मम्मी को कितनी मेहनत लगती है। मैं तो बस उनका यह फर्ज समझती रही।

जब लॉकडाउन में सारा दिन घर में रहना पड़ा तब पता चला खाना बनाना कितना मुश्किल है। उसमें पूरा धैर्य और समर्पण चाहिए।

कोई घरेलू सहायिका नहीं आ रही थी मैंने भी मम्मी की मदद करने की सोची। कभी आटा लगाते आटा नरम हो जाता, तो कभी रोटी नक्शा बन जाती। कभी सब्जी में नमक कम तो तेल ज्यादा। 

Muskan Rajkotia Hervoice Inside

पापड़ सेकना जितना मै आसान समझती थी उतना ही मुश्किल लगा। चावल जरूरत से ज्यादा गीले बन जाते। रसोई तो हर बार फैल जाती।

इस लॉकडाउन ने मुझे समझा दिया कि थाली का खाना कितना कीमती है। इसे बनाने में बहुत मेहनत लगती है।

इसी लॉकडाउन की बदौलत मैं बहुत कुछ बनाना सीख गई हूं जैसे चावल में दोगुना पानी डालना, सब्जी को बीच-बीच में चलाते रहना, गोल रोटी बनाना और पापड़ को चिमटे की सहायता से सेक लेती हूं।

अब मैं अपनी मम्मी का पहले से ज्यादा सम्मान करने लगी हूं, जो हमारे लिए घंटों रसोई में बताती है और थकावट के बावजूद बड़े प्यार से हमें खिलाती हैं।

मुस्कान राजकोटिया, रायपुर( छत्तीसगढ़)

मुस्कान राजकोटिया CS(कंपनी सेक्रेटरी) की पढ़ाई करने के साथ अपने ज्ञान को चारों और फैलाने के उद्देश्य से यूट्यूब चैनल पर पढ़ाती भी हैं। साथ-साथ अपनी पाक कला के हुनर को तराशने और नए-नए पकवान बनाने से भी पीछे नहीं हटती हैं। मुस्कान भविष्य में सफलता की ऊंचाइयां छूने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।