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समुद्र की रक्षा के लिए ‘Future Of Nature Award’ जीतने वाली पहली भारतीय महिला डॉक्टर दिव्या कर्नाड के बारे में जानें

बढ़ता प्रदूषण समुद्री जीवों के लिए खरता बन रहा है। ऐसे में अशोक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर दिव्या कर्नाड सालों से समुद्री पर्यावरण की रक्षा कर रही हैं। 
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Published -28 Jul 2022, 16:34 ISTUpdated -28 Jul 2022, 17:41 IST
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divya karnad first indian woman to receive future of nature award

समुद्र दिखने में जितने खूबसूरत और गहरे होते हैं, उससे कई ज्यादा ये खनिज पदार्थों का घर माने जाते हैं। यही वजह है कि जो देश समुद्र के किनारे बसे हुए है, उन देशों के पास पेट्रोलियम, नेचरल गैस और खनिज की भरमार रहती है। ये सभी चीजें मनुष्य की सबसे अहम जरूरतों में से एक हैं। लेकिन बढ़ते प्रदूषण और ज्यादा से ज्यादा खनिज उत्पादन के चलते समुद्री जीवों और जनजातियों के हाल बेहाल हो रहा है। जिसे लेकर दुनिया भर में चिंता जताई जा रही है। इस स्थिति को सुधारने में कई लोग मरीन संरक्षण का कार्य कर रहे, जिससे समुद्री जीवों को मरने से बचाया जा सके। डॉक्टर दिव्या कर्नाड भी इन लोगों में से एक हैं। आज के इस लेख में हम आपको डॉक्टर दिव्या कर्नाड के बारे में बताएंगे,

कौन हैं दिव्या कर्नाड? 

who is dr divya karnad

दिव्या कर्नाड भारत की अशोक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। जो सालों से समुद्री जनजातियों के संरक्षण के लिए काम करती आई हैं। अपने इस योगदान के चलते दिव्या को ‘Future For Nature Award’ से सम्मानित किया जा चुका है। दिव्या यह अवार्ड पाने वाली दूसरी भारतीय और पहली महिला हैं। इससे पहले यह अवार्ड डॉक्टर चारुदत्त मिश्रा को दिया गया था।

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समुद्री संरक्षण में निभाई है अहम भूमिका

भारत की दिव्या कर्नाड कोरोमंडल तट के किनारे पली-बढ़ी हैं। यही वजह है कि वो सालों से लुप्त होती छोटी मछलियों और शार्क को बचाने का कार्य कर रही हैं। इसके अलावा दिव्या मछली पालन को भी बढ़ावा देती आई हैं, जिससे मछलियों को प्रदूषण से बचाया जा सके। पढ़ाई के दौरान दिव्या की समुद्री जीवों से जुड़ी चीजों में रुचि बढ़ी। इसके बाद दिव्या ने समुद्री जीवों को संरक्षित करने के लिए प्रयास करने शुरू किया। 

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NGO की शुरुआत

dr divya karnad story

दिव्या ने टर्टल एक्शन ग्रुप की स्थापना करने में योगदान दिया और इन सीजन फिश की स्थापना की। इन दोनों ही संस्थाओं के जरिए शार्क और मछलियों को बचाने का कार्य किया गया। आज दिव्या अशोक यूनिवर्सिटीमें बच्चों को भूगोल पढ़ाती हैं, साथ ही लोगों को फिशरीज और समुद्री जीवों के बारे में जागरूक करने का काम करती हैं।

तो ये थी दिव्या की कहानी, जिसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। आपको हमारा यह आर्टिकल अगर पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें, साथ ही ऐसी जानकारियों के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

Image Credit- twitter

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