Oscar Awards 2020 के रेड कार्पेट की शुरुआत ही काफी धमाकेदार रही। धमाका इसलिए क्योंकि इस साल भी हर साल की तरह इस सबसे बड़े अवॉर्ड फंक्शन में महिला डायरेक्टर्स का नॉमिनेशन काफी कम रहा। जहां हम साल के सबसे बड़े एंटरटेनमेंट अवॉर्ड्स की बात करते हैं तो सबसे पहले नाम सामने ऑस्कर का ही आता है, लेकिन अगर ऑस्कर अवॉर्ड्स ही गलत ट्रेंड सेट करें तो? ऑस्कर अवॉर्ड्स के बारे में अक्सर ये बातें सामने आती हैं कि उनमें पितृसत्ता का कुछ ज्यादा ही रंग देखने को मिलता है, जहां महिलाओं को लेकर थोड़ा भेदभाव हमेशा से रहा है वहां इस साल 2020 में भी Academy Awards ने वही किया जो हर साल होता आया है। पर इस साल इस अवॉर्ड फंक्शन में विरोध प्रदर्शन कुछ अलग रहा है।  

एक्ट्रेस नताली पोर्टमेन का बड़ा कदम

जहां बात विरोध प्रदर्शन की आती है तो नताली पोर्टमेन पीछे नहीं रहती हैं। नताली पोर्टमेन ने ऑस्कर रेड कार्पेट पर ब्लैक एंड गोल्ड रंग का आउटफिट पहना हुआ था जिसमें खास बात थी उसका केप (Cape), उनके केप में एम्ब्रॉइडरी की गई थी जिसमें गोल्ड लेटर्स से लिखे थे महिला डायरेक्टर्स के नाम जिन्हें उनकी फिल्मों के लिए नॉमिनेशन तक नहीं मिला। इसमें नाम थे Lorene Scafaria (हस्लर्स), Lulu Wang (द फेयरवेल), Greta Gerwig  (लिटिल वुमेन), Mati Diop (क्वीन एंट स्लिम), Alma Har'el (हनी ब्वॉय), Céline Sciamma (पोर्ट्रेट ऑफ अ लेडी ऑन फायर) 

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इनमें से किसी का भी नाम बेस्ट डायरेक्टर के लिए नहीं नॉमिनेट हुआ।  

2018 में Netanyahu पॉलिसी के विरोध में नताली ने 1.3 मिलियन डॉलर की प्राइज मनी के साथ मिलने वाला अवॉर्ड जिसे Genesis Prize या Jewish Nobel Prize भी कहा जाता है उसे ठुकरा दिया था। इसपर काफी विवाद भी हुआ था, लेकिन एक्ट्रेस के अनुसार इसे राजनीति के कारण उन्होंने ठुकराया था। अब तो आप समझ ही गई होंगी कि नताली सही को सही और गलत को गलत कहने में कितनी माहिर हैं।  

इतिहास में सिर्फ पांच महिला डायरेक्टर्स का नाम 

ऑस्कर अवॉर्ड्स के इतिहास में अभी तक सिर्फ पांच महिला डायरेक्टर्स का नाम सामने आया है। जिन्हें बेस्ट डायरेक्टर कैटेगरी के लिए नॉमिनेट किया गया है। ये हैं Kathryn Bigelow (द हर्ट लॉकर),  Lina Wertmüller (7 ब्यूटीज), Jane Campion (द पियानो), Sofia Coppola (लॉस्ट इन ट्रांसलेशन) और Gerwig (लेडी बर्ड) के लिए नॉमिनेट हुई हैं। इसमें से 2010 के ऑस्कर अवॉर्ड्स में Kathryn Bigelow ही एकलौती ऐसी हैं जिन्हें ये अवॉर्ड मिला है। यानी सोचिए कि अभी तक के अकादमी अवॉर्ड्स में सिर्फ 1 महिला डायरेक्टर को बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला है।  

इसे पितृसत्ता की चरम सीमा न कहा जाए तो क्या कहा जाए? 

नताली ने हमेशा ही लैंगिक असमानता को लेकर आवाज़ उठाई है। इसके पहले के अवॉर्ड शो में भी वो ऐसा कर चुकी हैं। 2018 गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड्स में उन्हें बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड्स को प्रेजेंट करने के लिए कहा गया था और उन्होंने बोला था, 'और ये रहे सारे पुरुष नॉमिनी' 

उनका ये फैशन स्टेटमेंट सोशल मीडिया पर बहस का कारण बन गया है। उनका केप इस मौके पर कुछ अलग ही बहस छेड़ रहा है। 

 

कॉमेडियन ने किया महिला सशक्तिकरण से जुड़ा एक कमेंट

सिर्फ यही नहीं ऑस्कर शो को प्रेजेंट करने वाले कॉमेडियन क्रिस रॉक ने भी इस बात से जुड़ा बहुत अहम कमेंट किया है। क्रिस रॉक और स्टीव मार्टिन ऑस्कर शो को होस्ट कर रहे थे और तभी डायरेक्टर्स के बारे में बात करने पर स्टीव मार्टिन ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस साल कुछ लिस्ट में मिसिंग है।' 

इसपर क्रिस रॉक का जवाब था, 'वैजाइना', ये सुनकर पूरा हॉल तालियों से गूंजने लगा। कई लोग इस मामले पर बहस कर सकते हैं कि ये कमेंट कैसा था, लेकिन यकीन मानिए ये बहुत ही शक्तिशाली कमेंट था जिसमें महिला डायरेक्टर्स का ना होना एक मुद्दे की तरह उठाया गया था।  

जहां एक ओर बारिश से परेशानी के कारण ऑस्कर अवॉर्ड्स का रेड कार्पेट भीग गया था वहीं दूसरी ओर नताली पोर्टमैन और क्रिस रॉक का ये विरोध शक्तिशाली था और महिला सशक्तिकरण की ओर इशारा कर रहा था।  

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रंगभेद भी दिखा ऑस्कर के गलियारे में 

स्टीव मार्टिन जो ऑस्कर के प्रेजेंटर थे उन्होंने एक और मुद्दा उठाया। ये मुद्दा था रंगभेद का। उन्होंने बताया कि सिंथिया इरवो (Cynthia Erivo) ही एकलौती ऐसी ब्लैक महिला हैं जिन्हें ऑस्कर अवॉर्ड्स में नॉमिनेट किया गया है। उन्होंने कहा, 'सिंथिया बहुत अच्छा काम कर रही हैं जो अपने पीछे सभी ब्लैक लोगों को छुपा रही हैं क्योंकि ऑस्कर में उन्हें सभी ब्लैक नॉमिनी को छुपाने के लिए रखा है।' 

बहुत कुछ नया, लेकिन फिर भी महिला डायरेक्टर्स का नॉमिनेशन पीछे-  

ऑस्कर 2020 के रेड कार्पेट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई नॉन इंग्लिश फिल्म बेस्ट फिल्म का खिताब जीती हो। 

'पैरासाइट' जो दक्षिण कोरियाई फिल्म है उसको ये अवॉर्ड मिला है। वॉकिन फीनिक्स को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला है जिन्होंने फिल्म 'जोकर' में अपना बेमिसाल अभिनय किया था। फिल्म 'जू़डी' के लिए रिनि जेलवेगर को अवॉर्ड मिला है। सैम मेंडिस 20 साल बाद ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुए हैं। 

जहां इतना सब कुछ पहली बार हुआ है वहां इस नए साल में ऑस्कर अवॉर्ड्स से ये उम्मीद तो रखी जा सकती थी कि महिला डायरेक्टर्स को सही तरीके से नॉमिनेट किया जाए।