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सरिता माली: मुंबई में फूल बेचने से लेकर कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी में दाखिले तक की कहानी

व्यक्ति जब दिल से कुछ ठान लेता है तो उसे बड़ी से बड़ी समस्याएं भी रोक नहीं सकती हैं। ऐसी ही कुछ कहानी है मुंबई की एक साधारण सी लड़की की।
Published -17 May 2022, 11:50 ISTUpdated -17 May 2022, 12:11 IST
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  • Samvida Tiwari
  • Editorial
  • Published -17 May 2022, 11:50 ISTUpdated -17 May 2022, 12:11 IST
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sarita mali story flower seller

दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा और आगे बढ़ने की चाह, किसी को भी बुलंदियों तक पहुंचा सकती है। जब व्यक्ति कुछ ठान लेता है तो मुकाम हासिल करके ही रहता है और उनके हौसलों को पंख तब मिलते हैं जब सफलताएं कदम चूमने लगती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है मुंबई की एक लड़की सरिता माली की।

जी हां, मुंबई की सड़कों पर फूल बेचने वाली सरिता ने जब ठान लिया तो सफलता उनके कदमों पर आ गयी। आपको बता दें कि 28 साल की सरिता माली कुछ समय पहले तक अपने पिता के साथ मुंबई की सड़कों पर फूलों की माला बेचती थीं और अब वो अपनी लगन और कड़ी मेहनत से पीएचडी के लिए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रवेश ले रही हैं। आइए जानें कौन है आम से ख़ास बनने वाली ये लड़की।

कौन हैं सरिता माली

sarita mali story

सरिता माली की शुरूआती जिंदगी की बात करें तो ये मुंबई की एक झोपड़ पट्टी वाली जगह पर पैदा हुईं। जब इनकी शिक्षा शुरू हुई तो ये नगर निगम के स्कूल में पढ़ीं और फिर बड़ी होकर अपने पिता के साथ सड़कों पर फूल बेचने लगीं। लेकिन उनके दिल में कुछ कर गुजरने की चाह थी और आंखों में आगे बढ़ने का सपना था, जिसका नतीजा उनकी इतनी बड़ी उपलब्धि के साथ सामने आया कि वो जल्दी ही हिंदी साहित्य में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने जा रही हैं। सरिता अभी वर्तमान में जेएनयू में भारतीय भाषा केंद्र में हिंदी साहित्य में पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने जेएनयू से एमए और एमफिल की डिग्री ली है और जल्दी ही वो अपनी पीएचडी पूरी करेंगी।

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सरिता माली ने बयां की अपनी कहानी

एक मीडिया इंटरव्यू में सरिता ने कहा कि उन्हें लगता है कि हर किसी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं और हर किसी की अपनी कहानियां होती हैं। व्यक्ति जिस तरह के समाज में जन्म लेता है उसके अनुसार उन्हें आगे का जीवन मिलता है। इसे दुर्भाग्य कहा जाए या सौभाग्य कि वो एक ऐसे समाज में पैदा हुईं जहां समस्याएं उनके जीवन का सबसे जरूरी हिस्सा थीं। त्योहारों के दौरान, वह अपने पिता के साथ फूल बेचती थीं, खासकर गणेश चतुर्थी, दिवाली और दशहरा जैसे बड़े त्योहारों पर। यह काम उन्होंने स्कूल के समय से ही अपने पिता के साथ शुरू कर दिया था। जब भी जेएनयू से छुट्टी में वो घर जाती थीं तो फूलों की माला बनाती थीं। पिछले दो वर्षों से, लॉकडाउन में, उनके पिता का काम रुका हुआ था लेकिन इससे पहले सभी मिलकर फूल बेचने का काम करते थे। सरिता का कहना है कि जब से उसने अपनी आंखें खोलीं, केवल फूल देखे हैं। उनके जीवन में जहां एक तरफ संघर्ष था वहीं दूसरी तरफ उनकी उम्मीदें थीं। जीवन में परेशानियां भी थीं और मेहनत करने का जज्बा भी था। सरिता के परिवार के इसी जुनून और समर्थन ने उन्हें बुलंदियों तक पहुंचाया है।

कैसा है सरिता माली का परिवार

सरिता माली के परिवार में उनके माता, पिता, बड़ी बहन और दो छोटे भाइयों सहित कुल 6 सदस्य हैं। जिसमें घर के लिए पैसे कमाने वाले सिर्फ उनके पिता ही हैं। सरिता छठवीं कक्षा में पढ़ती थी, जब पिता के साथ वो भी मुंबई के ट्रैफिक सिग्नल्स पर फूल बेचने के लिए गाड़ियों के पीछे दौड़ती थीं। उनके पिता और वो मिलकर दिनभर में बहुत कम धन कमा पाते थे लेकिन पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया।  

जेएनयू में एडमिशन बना मील का पत्थर  

sarita mali in JNU

सरिता माली के जीवन में बदलाव तब से आना शुरू हुआ जब उन्हें जेएनयू में एमए में दाखिला (भारत की 5 बेस्ट यूनिवर्सिटीज) मिला। उन्होंने बीए प्रथम वर्ष में जेएनयू की तैयारी शुरू की और 2014 में वह जेएनयू में ओबीसी की आखिरी सीट के लिए मास्टर डिग्री के लिए चुनी गईं। उन्होंने सरकार से इस तरह के और अधिक सार्वजनिक वित्त पोषित विश्वविद्यालय बनाने की अपील की जिससे उनके समाज के अधिक छात्र आकर अध्ययन कर सकें। सरिता माली जेएनयू की सबसे कम उम्र की स्कॉलर हैं। जब वो एमफिल में आईं थी तब उनकी उम्र 22 साल की थी।

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सरिता ने फेसबुक पोस्ट पर कही ये बात

सरिता ने अपने फेसबुक पर अपनी कड़ी मेहनत की एक कहानी शेयर की है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि- 'अब जेएनयू से अमेरिका का सफ़र...मेरा अमेरिका के दो विश्वविद्यालयों में चयन हुआ है यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंग्टन मैंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया को वरीयता दी है। मुझे इस यूनिवर्सिटी ने मेरी मेरिट और अकादमिक रिकॉर्ड के आधार पर अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित फ़ेलोशिप में से एक 'चांसलर फ़ेलोशिप' दी है। आप भी देख सकते हैं सरिता का फेसबुक पोस्ट

वास्तव में सरिता माली पूरे समाज के लिए एक उदाहरण हैं और हम सभी को बिना रुके अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व ज्योतिष से जुड़े इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: facebook.com @Sarita Mali

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