गरिमा अब्रोल का नाम अगर आपने नहीं सुना तो शायद 2019 की सबसे मार्मिक कहानियों में से एक आपने नहीं जाना। गरिमा अब्रोल शहीद एयरफोर्स पायलट समीर अब्रोल की पत्नी हैं। 1 फरवरी 2019 को समीर अब्रोल की मौत बेंगलुरु में हुए मिराज 2000 एयरक्राफ्ट क्रैश में हो गई थी। गरिमा अब्रोल ने सवाल उठाए थे कि पायलट की रक्षा के लिए क्या किया जाता है। समीर के साथ उसी क्रैश में एक और स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ नेगी की भी मौत हुई थी।  

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गरिमा अब्रोल के पति देश की रक्षा के लिए गए जिए और अब वो भी यही करने का सोच रही हैं। गरिमा अब्रोल ने सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) की परीक्षा पास की है और जल्द ही वो सेना से जुड़ने के लिए योग्य हो जाएंगी। गरिमा अब्रोल ने ये परीक्षा वाराणसी दी है और इसे पास करने के बाद अब उनके पास तेलंगाना के डुंडीगल में भारतीय एयरफोर्स ज्वाइन करने की सुविधा है। 

Martyrs wife joining IAF

एक फेसबुक पोस्ट से चर्चा में आई थीं गरिमा-

पति की मौत के बाद गरिमा ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए एयरफोर्स पर सवाल उठाया था कि जवानों को पुराने यंत्र दिए जाते हैं जिससे उनकी जान हमेशा खतरे में रहती है। इन दोनों पायलट की मौत सिर्फ एक रेग्युलर ट्रायल के दौरान हुई थी, ये विमान अपग्रेड होकर आया था और उसी के दौरान ये हादसा हो गया। 

गरिमा अब्रोल की कहानी ने सभी का दिल छू लिया। पता नहीं किस मिट्टी की बनी होती हैं सेना के जवानों की पत्नियां जो महीनों अपने पतियों के बगैर रहती हैं और यही हर दिन पति के छिन जाने का डर सताता है, लेकिन हिम्मत से पूरा परिवार संभाले रखती हैं। शायद तभी कई बार पति की मौत के बाद वो सेना से जुड़ जाती हैं। ये जज्बा निभाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। 

गरिमा अब्रोल जनवरी 2020 तक ट्रेनिंग शुरू हो सकती है। गरिमा अब्रोल चाहती हैं कि वो जिंदगी अपने पति की नजरों से देखने की कोशिश करें। वही यूनिफॉर्म पहनें जो उनके पति पहनते थे। 

ऐसी परिस्थिती में कई बार लोग अपने जीने का सहारा खो बैठते हैं, लेकिन गरिमा अब्रोल वैसी नहीं हैं।  

 गरिमा के आंसू सूखे नहीं हैं बल्कि उन्हें नया सहारा मिला है। आजकल सोशल मीडिया पर न जाने कितने सेलेब्स कितनी ही बातें करते हैं। महिला सशक्तिकरण को लेकर बहुत कुछ बोला जाता हो, लेकिन क्या आपको ये नहीं लगता कि ऐसी कहानियां ही वाकई समाज के लिए जरूरी होती हैं। अगर गरिमा अब्रोल जैसी महिलाओं से प्रेरणा ली जाए तो शायद जिंदगी के कई कठिन रास्ते अपने आप आसान हो जाएंगे। 

गरिमा अब्रोल अब हर वो काम करने की इच्छुक हैं जो उनके पति ने किया था। वो कई लोगों को ये सिखा सकती हैं कि महिलाओं को रोते हुए अपनी परिस्थितियों के साथ समझौता कर लेना काफी आसान है, लेकिन उन मुश्किलों से लड़ते हुए अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाना और दूसरों के लिए कुछ कर जाना बहुत मुश्किल है। यही सिखाता है कि आप में कितनी इच्छाशक्ति है। 

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महिलाओं के लिए प्रेरणा बनना आसान नहीं होता। बच्चों को ये सिखाना कि समाज में क्या सही है क्या नहीं है ये भी आसान नहीं होता। सही रास्ते पर चलना और सही रास्ते पर चलने के लिए दूसरों को मार्गदर्शन देना मुश्किल होता है। स्किन की देखभाल करना, मेकअप अच्छे से करना ये सब कुछ आसान है पर देश की देखभाल करना काफी मुश्किल है। हम सलाम करते हैं गरिमा अब्रोल के इस जज्बे को।