जिंदगी बहुत छोटी है और इस जिंदगी में हमें ऐसा बहुत कुछ करना है जो हमें ऊंचाई की ओर ले जाए। कई लोग सोचते हैं कि अगर उनकी जिंदगी में हालात कुछ बेहतर होते तो वो खुद को बहुत ही आगे लेकर जाते, लेकिन ऐसे उदाहरण भी हैं जो लोग हालात से लड़कर आगे पहुंचे हैं और अपने लिए एक नया आसमान बनाते हैं। कहते हैं कि अगर एक महिला कुछ ठान ले तो वो करके ही रहती है। उसे अपनी पहचान बनाने के लिए किसी की जरूरत नहीं होती। 

इस महिला दिवस पर हरजिंदगी महिलाओं के आपसी तालमेल और महिला सशक्तिकरण का जश्न मना रही है। हरजिंदगी वेबसाइट की तरफ से वेब डायलॉग्स ऑर्गेनाइज किए गए हैं जिसमें महिला अचीवर्स से बात की गई जो समाज के खोखली बंदिशो को तोड़कर आगे बढ़ी हैं और एक नया आसमान बनाया है और लोगों को प्रेरित किया है। उन्होंने वो किया है जो उनके दिलों ने चाहा है और यही तो है महिलाओं की पहचान। हमारे इस सेशन के पैनल में डॉक्टर चिन्ना दुआ (रेडियोलॉजिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर), मिस रिचा महेश्वरी (अवॉर्ड-विनिंग फैशन फोटोग्राफर जिनका नाम लिमका और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है), सुचेता पाल (महिलाओं की वेलनेस कोच और जुंबा इंडिया की अम्बेसेडर), मिसेज आभा गोडियाल कक्कड़ (इंस्टा आंटी, टीचर और सोशल मीडिया सेंसेशन) और स्नेहिल दीक्षित ( B.C.Aunty, कंटेंट क्रिएटर और इन्फ्लुएंसर) हमसे जुड़ीं। 

चलिए उनके इस खास सेशन के बारे में बात करते हैं और जानते हैं कि उन्होंने क्या-क्या कहा-

सेशन में डॉक्टर चिन्ना दुआ ने कहा, 'महिलाओं में ये शक्ति है कि वो कुछ भी बदल दें 'महिलाएं नई शक्ति को जन्म देती हैं''। उन्हें एक तोहफा मिला है और ये ताकत मिली है कि वो अपने अंदर एक जिंदगी को बनाएं और इसीलिए ऐसा कुछ भी नहीं है जो वो न कर पाएं। अगर उन्हें अपने सपनों को पूरा करना है तो वो कर सकती हैं, वो खुद की पहचान भी बना सकती हैं। बस उन्हें अपनी सोच का दायरा बढ़ाने की जरूरत है और खुद को पहचानने की भी। उन्हें ये जानना होगा कि उन्हें क्या करना है और तभी वो अपनी यात्रा की शुरुआत कर सकती हैं। 

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उम्र, करियर, काम, परिवार आदि की कोई भी बंदिश उन्हें वो करने से नहीं रोक सकती है जो वो चाहती हैं। 

इसी बात पर स्नेहिल मेहरा का कहना था कि लोग हमेशा जज करेंगे भले ही आपने कुछ भी किया हो। तो फिर रिस्क लेने से क्यों रोका जाए। ऐसी किसी चीज़ के लिए काम करें जो आपको चाहिए और फिर लोग जज भी करें तो क्या। इसलिए ये कभी न सोचें कि लोग क्या कहेंगे, आपको बस खुद पर यकीन रखना है कि आप ये कर सकते हैं। 

कैसे महिलाएं अपनी आवाज़ को पहचान सकती हैं?

इस सेशन में आगे महिला सशक्तिकरण पर बात की गई कि असल में महिलाएं कैसे अपना रास्ता बना सकती हैं और वो कर सकती हैं जो उन्हें करना है, अपने लिए आगे बढ़कर खड़ी हो सकती हैं। सुचेता पाल ने कहा, 'महिलाओं को जिस चीज़ को असल में बदलने की जरूरत है वो उनका खुद का दिमाग और सोच है, आप ही खुद की सबसे बड़ी बंदिश बन सकती हैं' इसलिए आपको ये सोचना होगा कि अगर आप खुश हैं तो हर कोई खुश होगा और आपको सपोर्ट भी करेगा और आपके फैसले में साथ देगा।

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समाज के पाखंड से आखिर कैसे लड़ा जाए? 

इतिहास में महिलाओं पर इस बात के लिए जोर दिया जाता था कि उन्हें लोगों की बात सुननी है, लेकिन अब चीज़ें बदल रही हैं और महिलाओं ने हर फील्ड में खुद को साबित करना शुरू कर दिया है। वो फील्ड्स जिनमें पहले पुरुषों का राज हुआ करता था अब महिलाएं आगे हैं और इसलिए महिलाओं को किसी भी तरह की हिपोक्रेसी या पाखंड से नहीं डरना चाहिए और बागी बनकर आगे बढ़ना चाहिए।  

महिलाओं को अपना ध्यान एक ही लक्ष्य की ओर लगाना चाहिए कि वो कुछ भी और सब कुछ कर सकती हैं। वो जो चाहे बन सकती है एक मां, एक इंफ्लुएंसर, फोटोग्राफर सभी एक साथ हो सकती है।  

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महिलाओं को खुद को पहचानना चाहिए  

महिलाओं को खुद को पहचानना चाहिए और अपनाना चाहिए। एक महिलाए पूरी तरह से पूरी तब होती है जब वो खुद के लिए स्टैंड ले पाती है, ये कहना था मिसेज आभा गोडियाल का। उनके हिसाब से ये सिर्फ आगे बढ़ने की बात नहीं है बल्कि ये भी जरूरी है कि आप अपना फाउंडेशन कितना स्ट्रॉन्ग रखते हैं। दूसरा ये कि महिला को अपनी खुशियों के लिए कोशिश करनी चाहिए। उन्हें कुछ भी करने से रुकना नहीं चाहिए और अपनी पहचान छुपाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। महिलाओं को इसे लेकर खराब भी नहीं सोचना चाहिए कि वो ऐसी क्यों हैं इसकी जगह उन्हें ये सोचना चाहिए कि वो कितनी ताकतवर और खूबसूरत हैं और दुनिया जीत सकती हैं।  

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