गूगल कंपनी समय -समय पर अपने पेज में कई तरह के बदलाव करती है। किसी ख़ास तिथि को याद करने के लिए अपने डूडल पर उस दिन का फोटो लगाना हो या फिर कुछ अलग अंदाज़ में त्यौहार का सेलिब्रेशन हो, गूगल पेज पर साफ़ नज़र आने लगता है। कुछ ऐसा ही दिख रहा है आज 16 अगस्त यानी कि मशहूर कवयित्री और पहली महिला सत्याग्रही सेनानी सुभद्रा कुमारी चौहान के 117 वें जन्म दिवस पर, जब गूगल ने उन्हें याद करने के लिए अपना डूडल उनके ही चित्रों से बदल दिया है। 

ये पहला मौका नहीं है जब गूगल किसी को याद करने के लिए ऐसा कर रहा है लेकिन ये डूडल वास्तव में ख़ास दिख रहा है जो स्वतंत्रता की लड़ाई के दौर के साथ क्रांतिकारी संघर्षों की याद भी दिला रहा है। इस डूडल पर सुभद्रा कुमारी चौहान कविता लिखती दिखाई दे रही हैं और साथ में झांसी की रानी की तस्वीर भी चित्र में दिख रही है। आइए जानें क्या ख़ास है इस डूडल में और ये अलग क्यों है। 

क्या ख़ास है इस डूडल में 

new doodle subhadra kumari

गूगल कंपनी ने 16 अगस्त को प्रसिद्ध कविता झांसी की रानी लिखने वाली भारतीय कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान को उनकी 117वीं जयंती पर डूडल बनाकर सम्मानित किया है। इस डूडल में सुभद्रा कुमारी को एक कलम और कागज के साथ साड़ी में बैठे हुए दिखाया गया है। इसमें रानी लक्ष्मीबाई को पृष्ठभूमि में घोड़े की सवारी करते देखा जा सकता है और देश के स्वतंत्रता संग्राम में मार्च करते हुए कुछ अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं। ये वास्तव में आजादी के संघर्ष के साथ झांसी की रानी की दास्तान भी बयां कर रहा है। गूगल का ये डूडल न्यूजीलैंड की गेस्ट आर्टिस्ट प्रभा माल्या ने बनाया है।

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कौन हैं सुभद्रा कुमारी चौहान 

"बुंदेले हर बोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी " इस कविता को भला कौन नहीं जानता है। बचपन से ही जब भी झांसी की रानी के बारे में बात की जाती है इस कविता के रूप में उनका चित्रण सामने आ जाता है। दरअसल , इस मशहूर कविता की रचयिता सुभद्रा कुमारी चौहान थीं। जिन्हें देश कवयित्री के साथ पहली महिला सत्याग्रही के रूप में भी याद करता है। सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त, 1904 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के निहालपुर गांव में हुआ था। उन्होंने शुरू में इलाहाबाद के क्रास्थवेट गर्ल्स स्कूल में पढ़ाई की और 1919 में मिडिल-स्कूल की परीक्षा पास की। उन्होंने 16 वर्ष की आयु में सं 1919 में खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान से शादी की। 

कैसे हुई लेखन की शुरुआत 

subhadra kumari chahuhaan biography

सुभद्रा कुमारी चौहान को बचपन से ही लेखन का शौक था। वह स्कूल के रास्ते में घोड़े की गाड़ी में भी लगातार लिखने के लिए जानी जाती थीं और उनकी पहली कविता सिर्फ नौ साल की उम्र में प्रकाशित हुई थी। उन्होंने हिंदी कविता के क्षेत्र में कई लोकप्रिय रचनाएं लिखीं। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना " झांसी की रानी " है, जो रानी लक्ष्मी बाई के जीवन का भावनात्मक रूप से वर्णन करने वाली कविता है। यह कविता हिंदी साहित्य में सबसे अधिक पढ़ी और गाई जाने वाली कविताओं में से एक है। उनकी अन्य कविताएं, जलियांवाला बाग में वसंत, वीरों का कैसा हो बसंत, राखी की चुनौती, और विदा स्वतंत्रता आंदोलन की सम्पूर्ण दास्तान बयान करती हैं। 

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सुभद्रा कुमारी चौहान असहयोग आंदोलन में हुईं शामिल

सं 1921 में, सुभद्रा कुमारी चौहान और उनके पति महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हुए। वह नागपुर में गिरफ्तार होने वाली पहली महिला सत्याग्रही थीं और 1923 और 1942 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण उन्हें दो बार जेल भी हुई थी। सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता और गद्य मुख्य रूप से उन कठिनाइयों के इर्द-गिर्द केंद्रित थे, जिन पर भारतीय महिलाओं ने विजय प्राप्त की, जैसे कि लिंग और जातिगत भेदभाव। वह राज्य की विधान सभा की सदस्य थीं। सन 1948 में सिवनी एमपी के पास एक कार दुर्घटना में 15 फरवरी सन 1948 को उनकी मृत्यु हो गई।

वास्तव में सुभद्रा कुमारी चौहान दूसरों के लिए प्रेरणा तो हैं ही, साथ ही गूगल का अपने डूडल को बदलकर उन्हें सम्मान देते हुए याद करने का तरीका भी बेहद ख़ास है। 

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