गरीबी रास्ते में बाधा नहीं, अगर मुकाम हासिल करना है तो हिम्मत और मेहनत की जरूरत होती है। कई ऐसी लड़कियां हैं जो गरीबी की वजह से अपनी एजुकेशन पूरी नहीं कर पाती है। बेंगलुरु की रहने वाली बनशंकरी की कहानी उन लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक संकट की वजह से पढ़ाई को बीच में ही छोड़ देते हैं। बनशंकरी BBMP परिसर के पास मंदिर में फूल बेचने का काम करती हैं। और इस दौरान वह अपनी पढ़ाई ऑनलाइन मोबाइल के जरिए करती हैं।

पिछले 5 साल से बनशंकरी शक्ति देवाथे मंदिर के पास फूल बेचती हैं। वह रोजाना सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर के 2 बजे तक बैठती हैं। इस दौरान वह ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई करती हैं। घर में 1 घंटे पढ़ाई करने के बाद वह वापस फूल बेचने के लिए आ जाती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 16 वर्षीय बनशंकरी मित्रालय गर्ल्स हाई स्कूल, संपांगी राम नगर की छात्रा हैं।

डॉक्टर बनना चाहती हैं बनशंकरी

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बनशंकरी डॉक्टर बनना चाहती हैं। बनशंकरी ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि वह आगे की पढ़ाई कैसे कर सकती हैं, लेकिन मौका मिलने पर वह डॉक्टर बनना चाहती हैं। हालांकि वह अपने इस सपने को पूरा करने के लिए इतनी उत्सुक नहीं थीं, लेकिन कोरोना काल में उन्हें एहसास हुआ कि अगर वह डॉक्टर बन जाती तो कितने लोगों को मदद कर सकती थीं। बनशंकरी अपनी फैमिली के साथ संपांगी राम नगर में रहती हैं। पढ़ाई के अलावा उन्हें स्पोर्ट्स में भी काफी रुचि है और उन्हें जब भी मौका मिलता है तो वह बैडमिंटन और कबड्डी जैसे गेम खेलना पसंद करती हैं।

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बनशंकरी को मिलेगी जल्द मदद

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बनशंकरी मोबाइल से पढ़ाई करती हैं, लेकिन जल्द उन्हें लैपटॉप दिया जाएगा। दरअसल जब वो बीबीएमपी मुख्यालय के पास रहकर पढ़ाई कर रहीं थीं, तभी बीबीएमपी चीफ कमिश्नर गौरव गुप्ता की नजर उन पर गई। उन्होंने लैपटॉप की पेशकश की है, ताकि वह अपनी ऑनलाइन क्लास आसानी से ले सकें। गौरव गुप्ता ने बताया कि वह एजुकेशन के महत्व को समझते हैं, ऐसे में जब उन्होंने बनशंकरी को फूल बेचते हुए पढ़ाई करते देखा तो वह काफी आकर्षित हुए। उनके अनुसार बनशंकरी की मेहनत इस बात को दर्शाती है कि वह मुश्किलों में भी अपने भविष्य को सही दिशा में ले जाने का काम कर रही है। ऐसे में उन्होंने लैपटॉप देने का वादा किया क्योंकि वह ऑनलाइन क्लास के लिए छोटा फोन इस्तेमाल करती हैं जिसमें कि क्लीयर नहीं दिखता।

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बहुत मेहनती हैं बनशंकरी

बनशंकरी की मां के अनुसार उनकी बेटी काफी मेहनती है और आगे पढ़ाई करना चाहती है। हम भी उसे पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन हमारी ऐसी स्थिति नहीं है। ऐसे में वह बीबीएमपी चीफ कमिश्नर गौरव गुप्ता की आभारी हैं जो उन्होंने उनकी बेटी की मदद की। गौरव गुप्ता के अनुसार सिर्फ बनशंकरी ही नहीं बल्कि देश में कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें इस तरह की सहायता की आवश्यकता है।

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