हर साल 28 जुलाई को वर्ल्‍ड हेपे‍टाइटिस डे मनाया जाता है ताकि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक कराया जा सकें। इस मौके पर हमें CK Birla Hospital for women की Pediatrician Dr Shreya Dubey बच्‍चों में हेपेटाइटिस के लक्षण और प्रकार के बारे में बता रही हैं ताकि आप बीमारी के बारे में जानकारी लेकर अपने बच्‍चों को इससे सुरक्षित रख सकें।

हेपेटाइटिस की वजह से लिवर कोशिकाओं में सूजन आ जाती है और लिवर खराब हो सकता है। हेपेटाइटिस वायरल इन्फेक्शन का कारण है जिसमें लिवर या तो मुख्य रूप से हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी या ई वायरस से संक्रमित हो जाता है या उसके कई अंगों में संक्रमण हो जाता है। हेपेटाइटिस वायरस दुनिया में हेपेटाइटिस के आम कारण है, लेकिन अन्य संक्रमण, जहरीले या नशीले पदार्थ जैसे शराब, खास दवाएं और स्व-प्रतिरक्षित रोगों से भी हेपेटाइटिस का खतरा पैदा हो सकता है।

लिवर ब्‍लड को साफ बनाए रखने, विटामिन प्राप्त करने और हार्मोन पैदा करने जैसे महत्वपूर्ण काम करता है। हेपेटाइटिस की समस्या इन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और शरीर में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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hepatitis in children inside

बच्चों में हेपेटाइटिस के क्या लक्षण हैं?

प्रत्येक बच्चे में ये लक्षण कुछ हद तक अलग हो सकते हैं। कुछ बच्चों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। अचानक होने वाले हेपेटाइटिस के लक्षणों में शामिल हैंः

  • फ्लू जैसे लक्षण
  • स्किन का पीला पडऩा या आंखें सफेद हो जाना, पीलिया
  • फीवर
  • जी मिचलाना या उलटी होना
  • भूख नहीं लगना
  • पेट में दर्द या असहजता महसूस करना
  • डायरिया
  • जोड़ों में दर्द
  • मसल्‍स में दर्द
  • स्किन पर लाल चकत्ते पडऩा
  • मल का रंग मिट्टी जैसा हो जाना
  • पेशाब का रंग गहरा होना

अगर बच्चे में हेपेटाइटिस होने का पता चलता है तो इसका उपचार डॉक्टर द्वारा उचित ढंग से कराया जाना चाहिए।

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हेपेटाइटिस के प्रकार

आपको बेहतर ढंग से समझाने में मदद के लिए हम आपको नीचे विभिन्न तरह के हेपेटाइटिस के बारे में बता रहे हैं।

हेपेटाइटिस ए वायरस-एचएवी बच्चों में ज्यादा होने वाले हेपेटाइटिस का एक सामान्य प्रकार है। यह अक्सर दूषित पानी या भोजन के जरिये होता है। कुछ खास संभोग क्रियाओं से भी एचएवी फैल सकता है। कई मामलों में इसका संक्रमण मामूली होता है। कई लोग पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं और आगे चलकर एचएवी संक्रमण की आशंका से बचे रहते हैं। 6 साल और उससे अधिक उम्र के कई बच्चों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। इसका मतलब है कि आपका बच्चा रोगग्रस्त हो सकता है, और आपको पता नहीं चल सकता है। इससे युवाओं में यह बीमारी आराम से फैल सकती है। कम साफ-सफाई वाली जगहों पर रहने वाले लोगों में इस वायरस से संक्रमित होने की आशंका अधिक रहती है। सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन एचएवी की रोकथाम के लिए मौजूद हैं।

हेपेटाइटिस बी वायरस-एचबीवी वायरस कई बच्चों में धीरे-धीरे बढ़ता है और फिर यह पूरे शरीर में फैल जाता है, इससे धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचने लगता है। इस अवस्था को क्रोनिक कैरियर स्टेट के नाम से जाना जाता है। इसमें मरीज के लिवर और ब्‍लड में इस बीमारी के संकेत नहीं मिलते हैं। क्रोनिक कैरियर दूसरे लोगों में बीमारी का कारण बन सकता है, भले ही उनमें इसके लक्षण नहीं दिखते हों। कई बच्चे जन्म या उसके तुरंत बाद से ही इस संक्रमण का शिकार होते हैं। यह वायरस सामान्य तौर पर संक्रमित वीर्य, संक्रमित रक्त और अन्य बॉडी फ्लूड्स की वजह से होता है। यह वायरस जन्म के समय संक्रमित मां से उसके नवजात शिशु में फैल सकता है। बच्चों के लिए हेपेटाइटिस बी टीके लगवाना बेहद जरूरी है। इनमें 6 महीने की अवधि के तीन इंजेशन शामिल होते हैं। सुरक्षा इन सभी तीन इंजेशन के बगैर संपूर्ण नहीं है। अगर आपको गर्भावस्था के दौरान इस वायरस के होने का पता चलता है तो आपको यह समझ लेना चाहिए कि पेट में पल रहा बच्चे को एच-बी-आई-जी हो सकता है और जन्म के 12 घंटे के अंदर उसे हेपेटाइटिस बी की पहली खुराक देनी चाहिए। आपके बच्चे को दूसरी खुराक एक से दो महीने में और तीसरी खुराक 6 महीने में दी जानी चाहिए।

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हेपेटाइटिस सी वायरस-एसीवी कई बच्चों में तब फैल जाता है जब वे नवजात शिशु होते हैं। अगर आपके बच्चे का जन्म हेपेटाइटिस सी के साथ नहीं हुआ है, लेकिन बाद के वर्षों में उसे यह बीमारी हो गई हो तो यह चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान एचसीवी-संक्रमित ब्लड, सेप्टिक इंजेशन के सीधे संपर्क की वजह से या अवैध दवाओं के इंजेशन के जरिये भी फैल सकता है। मौजूदा समय में एचसीवी के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। हेपेटाइटिस सी सामान्य तौर पर बगैर उपचार और उचित आहार के बिना ठीक हो जाता है।

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हेपेटाइटिस डी वायरस-एचडीवी संक्रमण सिर्फ उन लोगों में फैलता है जो एचबीवी से संक्रमित होते हैं। हेपेटाइटिस डी वायरस से प्रभावित मां के जरिये प्रसव के दौरान नवजात में यह वायरस फैल सकता है। एचडीवी और एचबीवी के दोहरे संक्रमण से बीमारी खतरनाक हो सकती है। कई मामलों में हेपेटाइटिस डी की रोकथाम की जा सकती है, लेकिन इसके लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आपके बच्चे को हेपेटाइटिस बी टीके लगाए जाएं।

हेपेटाइटिस ई वायरस-एचईवी किसी गर्भवती महिला से उसके नवजात शिशु में होने की आशंका रहती है। बच्चों में यह वायरस दूषित पानी या भोजन से भी फैल सकता है। एचईवी दुनिया के अविकसित हिस्सों में होने वाले हेपेटाइटिस का एक मुख्य कारण है। बाथरूम का इस्तेमाल करने, बच्चे का डायपर बदलने के बाद, या भोजन तैयार करने या खाने से पहले अपने हाथों को साबुन से धोना जरूरी है। अच्छी साफ-सफाई की आदत से हेपेटाइटिस ई को फैलने से रोकने में मदद मिलती है। इसके प्रसार को रोकने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है।