COVID-19 महामारी के दौरान श्वसन संबंधी समस्‍याएं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्‍याएं, विशेष रूप से हार्ट संबंधी समस्‍याएं (CVDs)काफी बढ़ गई हैंं। दुनिया भर के मेडिकल एक्‍सपर्ट द्वारा नई शुरुआत और बिगड़ती दिल की समस्याओं की घटनाओं को उजागर किया जा रहा है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित एक 2019 की रिपोर्ट में भारत के दिल के विकारों का बोझ चिंताजनक 54.5 मिलियन लोगों पर देखा गया, जिनमें से चार में से एक की मौत सीवीडी जैसे इस्केमिक हार्ट डिसऑर्डर या स्ट्रोक के कारण हुई। पिछले कुछ महीनों में दिल की बीमारियों में हालिया उठापटक के साथ, दुनिया भर के लोग, विशेषकर भारत में निकट भविष्य में बड़े पैमाने पर हार्ट संबंधी चिंताओं की संभावना का सामना कर रहे हैं।

जीवा आयुर्वेद के डायरेक्‍टर डॉक्‍टर प्रताप चौहान ने कहा, ''लॉकडाउन से पहले, हमारे डॉक्टरों ने हार्ट रोगों के लिए 748 मामलों में परामर्श किया, कंम्‍लीट लॉकडाउन के दौरान, हमें सीवीडी और पोस्ट-लॉकडाउन के 322 मामले मिले, हमारे डॉक्टरों ने हमारे टेलीमेडिसिन सेंटर और क्लीनिक के माध्यम से लगभग 776 मामलों में परामर्श किया है।

केस बढ़ने के पीछे के कारणों को समझना है जरूरी

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पहले से मौजूद हार्ट संबंधी समस्याओं वाले रोगियों की बिगड़ती स्थिति के लिए गुणवत्ता चिकित्सा देखभाल की उपलब्धता और छूत का डर कुछ सामान्य कारणों में से एक है। इसके अलावा तनाव, चिंता, मोटापा और फिजिकली एक्टिव न होना जैसे कारक 40 की उम्र के लोगों में अचानक और असमान प्री-सीवीडी सेगमेंट वृद्धि का कारण है। अलगाव, रोजगार में हानि, वित्तीय दुविधाएं और परिवार के सदस्यों या शोक से दूर रहने के इमोशनल बोझ ने मामलों को बदतर बना दिया है।

डॉक्‍टर चौहान ने कहा, "महामारी के कारण होने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव (अकेलापन, तनाव, चिंता, अलगाव, बेरोजगारी भय और आर्थिक बोझ) के साथ स्‍मोकिंग, शराब पीने, अनियमित खान-पान, अनहेल्‍दी डाइट और एक्‍सरसाइज न करना जैसे अन्य जीवनशैली से जुड़े कारक दिल से जुड़ी समस्‍याओं को बढ़ा सकते हैं।''

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हार्ट के बढ़ते मामलों के कारण

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लॉकडाउन के शुरुआती दिनों के दौरान लोगों को रोजाना का आना-जाना और काम के तनाव से छुटकारा मिल गया था, उनके पास अपने परिवारों के साथ समय बिताने का अधिक समय था जो हार्ट हेल्‍थ पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ते गए, तनाव के सामान्य कारणों को वित्तीय बोझ, बेरोजगारी, आगे की अनिश्चितताओं, ऊब और नींद की कमी ने बदल दिया, जिसका हार्ट हेल्‍थ पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ा।  

डॉक्‍टर चौहान ने आगे बताया, ''लॉकडाउन के दौरान देखी गई CVDs की प्रवृत्ति में एक प्रमुख बदलाव यह था कि उनके 30-40 के लोगों को दिल का दौरा पड़ रहा था और अन्य हार्ट संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे, खासकर दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इनमें से अधिकांश मामलों में कोमोरबिडिटी में एक अवलोकन प्रवृत्ति भी थी। डॉक्टरों ने हाई ब्‍लड प्रेशर के लिए 670 मामलों का परामर्श दिया, इसके बाद हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया के 216 मामलों और दिल की अन्य बीमारियों के 174 मामलों का पता लगाया।

आयुर्वेद के साथ हार्ट की रक्षा: निवारक और उपचारात्मक समाधान

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तनाव, गलत खान-पान और इमोशनल उथल-पुथल जैसी चीजें दिल पर भारी पड़ सकती हैं। बढ़ती उम्र के साथ यह कमजोर हो जाता है और गलत जीवन शैली के विकल्प जैसे स्‍मोकिंग, शराब पीना या जंक फूड खाने से दिल की बीमारियों के बढ़ने का हाई जोखिम बढ़ जाता है। एक आयुर्वेदिक जीवन शैली अपनाने और अपनी दिनचर्या में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को शामिल करने से मदद मिल सकती है। 

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तनाव के लेवल को कम करने के लिए योग और प्राणायाम का अभ्यास करें। तेल के साथ एक हल्‍की सिर की मालिश या पूरे शरीर की मालिश तनाव से राहत देती है और आपके दिल पर भार को कम करती है। अत्यधिक चार्ज टीवी प्रसारण को बंद करें अगर यह आपको तनाव दे रहा है। डॉक्‍टर चौहान ने सलाह देते हुए कहा कि ''वास्तव में खुद को खुशहाल, हेल्‍दी बनाने और शांति प्रदान करने में समय व्यतीत करें। दिल को हेल्‍दी रखने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को भी प्रभावी माना जाता है। यहां बहुत सारी हर्बल रेसिपीज हैंं जो जीवा के डॉक्टर आमतौर पर हेल्‍दी दिल के लिए सलाह देते हैं।"

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अर्जुन की चाय (सफ़ेद मरुदा): अर्जुन की चाय के आधे चम्मच को एक कप पानी में धीमी आंच पर 10-15 मिनट तक उबालें जब तक कि यह आधा कप कम न हो जाए और इसे पी लें।

लहसुन: एक कप दूध को एक लहसुन की लौंग, दालचीनी, शहद के साथ उबालें और सुबह पीएं। आप इसके दिल के अनुकूल लाभों का आनंद लेने के लिए लहसुन की एक लौंग खाकर भी अपने दिन की शुरुआत कर सकती हैं।

इन आयुर्वेदिक टिप्‍स को अपनाकर आप दिल को हेल्‍दी रख सकती हैं। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

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