जब हम पीरियड्स के बारे में सोचते हैं तो पहली बात जो हमारे दिमाग में आती है, वह शुरुआती दो दिनों में होने वाला कष्टदायी दर्द है। यह हमारे रोजमर्रा के जीवन को एक ठहराव की ओर ले जाता है। गायनोलॉजिकल एक्‍सपर्ट के अनुसार, बेहद दर्दनाक पीरियड्स को डिसमेनोरियल कहा जाता है लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को यूटेराइन की ऐंठन के कारण पेट के आस-पास दर्द, ऐंठन और असुविधा का अनुभव होता है।

पीरियड्स के दौरान यूटेराइन मसल्‍स संकुचन की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए यूट्रस हार्मोन प्रोस्टाग्लैंडीन रिलीज करता है। संकुचन बड़े दर पर होता है और हमारा शरीर इस दौरान यूट्रस से थक्कों को बाहर निकाल देता है। हालांकि, अगर दर्द असहनीय है तो फाइब्रॉएड और एंडोमेट्रियोसिस जैसे प्रमुख समस्‍याओं को दोष दिया जा सकता है। पीरियड्स के पहले दो दिन इतनी तेज दर्द क्‍यों होता है? यह सवाल ज्‍यादातर महिलाओं के मन में होता है। आइए इस बारे में नोएडा के मदरहुड हॉस्पिटल के सलाहकार आब्सटेट्रिक्स एंड गायनोलॉजिस्ट डॉक्‍टर संदीप चड्ढा से जानें।

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दर्द के क्‍या कारण हैं?

कुछ महिलाओं में दर्दनाक पीरियड्स होने का खतरा अधिक होता है। इन जोखिमों में शामिल हैं:

  • 20 वर्ष से कम उम्र 
  • दर्दनाक पीरियड्स की फैमिली हिस्‍ट्री
  • स्‍मोकिंग 
  • पीरियड्स के साथ हैवी ब्‍लीडिंग 
  • अनियमित पीरियड्स का सामना करना
  • बच्‍चा नहीं होना 
  • 11 साल की उम्र में प्‍यूबर्टी का होना 

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दर्दनाक पीरियड्स एक अंदरूनी समस्‍या का कारण भी हो सकता है, जैसे:

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस): पीएमएस एक सामान्य स्थिति है जो पीरियड्स शुरू होने से 1 से 2 हफ्ते पहले होने वाले शरीर में हार्मोनल परिवर्तन के कारण होती है। ब्‍लीडिंग शुरू होने के बाद लक्षण आमतौर पर चले जाते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस: यह एक दर्दनाक मेडिकल प्रॉब्‍लम है जिसमें यूट्रस के अस्तर से सेल्‍स शरीर के अन्य भागों में बढ़ते हैं, आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब, ओवरीज या टिश्‍यु में पेल्विस की परत होती है।

यूट्रस में फाइब्रॉएड: फाइब्रॉएड गैर-ट्यूमर्स ट्यूमर हैं जो यूट्रस पर प्रेशर डालते हैं या असामान्य पीरियड्स और दर्द का कारण बनते हैं।

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दर्द का इलाज

दर्द से बचने के लिए महिला ओटीसी दर्द निवारक ले सकती हैं। कभी-कभी, दर्दनाक पीरियड्स से राहत पाने के लिए घरेलू ट्रीटमेंट भी चमत्कार कर सकते हैं। अपने पेल्विक एरिया या पीठ पर हीटिंग पैड का उपयोग करना, पेट की मालिश करना, गर्म पानी से नहाना, नियमित एक्‍सरसाइज करना और हल्का और पौष्टिक भोजन करना बहुत मदद करता है। पीरियड्स के शुरुआती दिनों में कैफीन नहीं लेना चाहिए क्योंकि कैफीन और शुगर ब्लोटिंग की संभावना को बढ़ाते हैं। अगर घरेलू ट्रीटमेंट और दर्द निवारक से राहत नहीं मिल रही है तो किसी अच्‍छी गायनोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। जिससे महिला को कम से कम इस बात की जानकारी तो मिल सके कि दर्द इतनी बुरी तरह से क्यों होता है?

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डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको पीरियड्स में होने वाला दर्द रोजमर्रा के कामों में भी बाधा उत्‍पन्न करने लगे, तो गायनोलॉजिस्ट से बात करनी चाहिए। अगर आपको निम्न में से कोई भी अनुभव हो तो अपने लक्षणों के बारे में डॉक्टर से बात करें-  

  • आईयूडी प्लेसमेंट के बाद लगातार दर्द 
  • कम से कम 3 दर्दनाक पीरियड्स 
  • ब्‍लड क्‍लॉट्स आना 
  • दर्द के साथ दस्त और मतली
  • पीरियड्स न होने पर भी पेल्विक पेन होना 

अचानक ऐंठन या पेल्विक दर्द इन्‍फेक्‍शन का संकेत हो सकता है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो इन्‍फेक्‍शन स्‍कार टिश्‍यु का कारण बन सकता है जो पेल्विक अंगों को नुकसान पहुंचाता है और इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। पीरियड्स से जुड़ी और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।

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