पिछली गर्मियों में स्वाति दोस्तों के संग खेलकर लौटी, तो उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। घरवाले समझ नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या? जब डॉक्टर को दिखाया, तब पता चला कि उसे फूड पॉइजनिंग हुई है। स्वाति की मां ने कहा कि घर पर बने खाना खाने से फूड पॉइजनिंग कैसे हो सकती है? डॉक्टर ने बताया कि गर्मियों में यह आम बात है। बासी या काफी देर रखे खाने से, दूषित पानी से ऐसा हो सकता है। अब इस साल ऐसा कुछ न हो, इसके लिए वे सभी तैयारी कर चुके हैं। क्या आपने ऐसा किया? दरअसल, गर्मी का मौसम अपने साथ धूप, तेज तापमान के साथ कई बीमारियां लेकर आता है। यह बीमारियां आपकी जरा सी लापरवाही के कारण आपको परेशान कर सकती हैं। कई लोग गर्मी लगने पर तुरंत ठंडी चीजें खा लेते हैं। बाहर से आकर तुरंत ठंडा पानी पी लेते हैं, जिसके कारण उन्हें कभी पेट की समस्या, तो कभी ठंड-गरम हो जाता है। गर्मियों में हीट और ह्यूमिडिटी बढ़ने की वजह बीमारियां आपके घर तक पहुंचती हैं। वह कौन सी आम बीमारियां हैं, जो गर्मी के मौसम में बढ़ती हैं और उनके बचाव क्या हो सकते हैं, आइए डालें इस पर एक नजर- 

डिहाइड्रेशन की परेशानी

mild dehydration

गर्मियों में होने वाली बीमारियों में से एक है डिहाइड्रेशन, जिसके शिकार कई लोग होते हैं। इसे निर्जलीकरण भी कहते हैं। हमारे शरीर में एक तिहाई हिस्से में पानी मौजूद होता है। गर्मियों में चूंकि ज्यादा पसीना निकलता है, तो इस कारण से शरीर में पानी, शुगर और नमक के संतुलन में गड़बड़ी हो जाती है। आप जितना पानी पीते हैं, उससे कई ज्यादा पानी आपके शरीर से निकलता है। आपकी बॉडी से लगातार मल, मूत्र और पसीने के जरिए पानी निकलता रहता है। डिहाइड्रेशन आम तौर पर जल्दी ठीक हो जाता है, लेकिन हालात बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है। डिहाइड्रेशन के लक्षण आपकी स्थिति पर निर्भर करते हैं। माइल्ड कंडीशन में मुंह सूखना, थकान, प्यास का बढ़ना, पेशाब कम होना, सिर दर्द, रूखी त्वचा, कब्ज, और चक्कर आना जैसे लक्षण दिखते हैं। हालत गंभीर होने पर प्यास बहुत ज्यादा लगती है, पसीना नहीं निकल पाता, हार्ट रेट बढ़ जाती है, ब्लड प्रेशर लो हो जाता है, कंपकंपी लगती और पेशाब का रंग डार्क हो जाता है।

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ऐसे करें बचाव

अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीएं। नींबू पानी, नारियल पानी, शिकंजी या अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। ऐसे फलों का सेवन करें जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो। इसके लिए रोजाना केला, तरबूज, खरबूज, खीरा, पपीता, संतरे आदि फलों को अपने आहार में शामिल करें। 

घमौरी या प्रिक्ली हीट

prickly heat

घमौरी होने पर आपके शरीर के कुछ हिस्सों पर कांटों जैसा महसूस होता है। और शरीर पर छोटे-छोटे लाल दरदरे दाने हो जाते हैं। इसमें बहुत ज्यादा खुजली होने लगती है। यह आम तौर पर तब होती है, जब शरीर के किसी हिस्से में पोर्स क्लॉग्ड हों और उनसे पसीना न निकल पाए। उमस, ह्यूमिडिटी की स्थिति में और ज्यादा टाइट कपड़ों के पहनने की वजह से घमौरी हो सकती है। शरीर पर छोटे-छोटे लाल रंग के चकते या दाने निकल आना। यह एक ही समय में शरीर के कई हिस्सों में दिखाई दे सकते हैं। घमौरी आमतौर पर शरीर पर कपड़े की घर्षण या कपड़े से ढकी त्वचा पर होती है। घमौरी प्रभावित त्वचा क्षेत्रों में पीठ, पेट, गर्दन, ऊपरी छाती, कमर या कांख आदि को शामिल किया जाता है।

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ऐसे करें बचाव

कॉटन/सूती के हल्के कपड़े पहनें, ताकि आपकी त्वचा भी सांस ले सके। नहाने के बाद एकदम से कपड़े न पहनें, पहले अपने शरीर को अच्छी तरह सूखाएं। जितना हो सके गर्मी में बाहर जाने से बचें। खुद को हाइड्रेट रखने के लिए नियमित रूप से पानी पीते रहें।

खराब खाने से होती फूड पॉइजनिंग 

food poision

गर्मी के मौसम हीट और ह्यूमिडिटी के कारण हवा में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस बढ़ता है। ऐसे वातावरण में रोगाणु तेजी से फैलते हैं और भोजन को दूषित कर देते हैं। इसी दूषित भोजन को खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है और पेट से जुड़ी अन्य दिक्कतें भी जन्म लेती हैं। बासी या लंबे समय तक रखे भोजन से भी यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसक लक्षणों में पेट में दर्द, बुखार, बार-बार उल्टी, सिरदर्द, कमजोरी, दस्त भूख कम लगना, पेशाब में जलन या पेशाब न आना, मुंह सूखना आदि शामिल हैं।

 

क्या हैं बचाव

चाहे सब्जी हो या फल हर चीज धोकर ही खानी चाहिए। लेकिन गर्मियों में इन बातों का खास ख्याल रखें। कुछ भी खाने से पहले अपने हाथों को भी साबुन से अच्छी तरह धोएं। अगर नॉन-वेज खा रही हैं, तो उसे पूरी तरह से पकाएं। बासी और पुराना खाना ना खाएं। बाहर की चीजें खाने से भी परहेज करें। 

टाइफाइड बुखार होना

Typhoid fever

दूषित पानी पीना, संक्रमित और बासी भोजन का सेवन करना टाइफाइड होने की मुख्य वजह हो सकती है। टाइफाइड पाचन-तंत्र और ब्लडस्ट्रीम में बैक्टीरिया के इंफेक्शन की वजह से होता है।  टाइफाइड में काफी तेज बुखार रहता है। तेज बुखार इसका मुख्य लक्षण है। भूख कम होना। रैशेज, मसल पेन, सूखी खांसी, सिर में औऱ शरीर में दर्द रहना। ठंड लगना, सुस्ती और आलस आना, कमजोरी, पेट में अत्याधिक दर्द और दस्त लगना जैसे अन्य लक्षण हैं।

क्या हैं बचाव

इससे बचने के लिए बाहर का दूषित खाना या पेय न लें और साफ उबला पानी पीएं।। भोजन को हमेशा गर्म करके ही खाएं। खाना खाने से पहले अपने हाथों को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं। टायफाइड से बचने के लिए वैक्सीन भी लिया जा सकता है। मसालेदार खाने से परहेज करें।

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