क्‍या आप प्रेग्‍नेंट हैं? क्या बार-बार हाथों के सुन्न पड़ जाने और झनझनाने से आपको परेशानी हो रही है? ऐसा कई प्रेग्‍नेंट महिलाओं के साथ होता है। इस स्थिति को कार्पल टनल सिंड्रोम कहते हैं। ऐसा उन महिलाओं के साथ भी होता है, जो प्रेग्‍नेंट नहीं होती हैं। मगर प्रेग्‍नेंसी में यह स्थिति ज्‍यादा देखने को मिलती है। इस स्थिति की गंभीरता हल्के से लेकर तेज़ हो सकती है। कभी-कभी एक तेज सुई जैसी चुभन वाला दर्द होता है जो असहनीय हो जाता है। हालांकि, ज्‍यादातर मामलों में यह दर्द प्रेग्‍नेंसी के बाद कम हो जाता है। 

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क्या है कार्पल टनल सिंड्रोम?

कलाई पर कार्पल हड्डियों से बना एक छोटी सुरंग जैसा रास्ता कार्पल टनल कहलाता है। मीडियन नर्व जो गर्दन से कलाई तक जाती है, कार्पल टनल से होकर गुजरती है। जब सुरंग का रास्ता संकरा हो जाता है तो यह मीडियन नर्व को सिकोड़ देता है। सिकुड़ी हुई मीडियन नर्व के कारण हाथों में तेज़ दर्द, सुन्न हो जाना और झनझनाहट जैसे लक्षण दिखते हैं। इस स्थिति को ही कार्पल टनल सिंड्रोम कहा जाता है। 

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प्रेग्नेंसी के दौरान कार्पल टनल सिंड्रोम के होने का क्या कारण हैं?

प्रेग्नेंसी के दौरान कार्पल टनल सिंड्रोम के सटीक कारण का पता नहीं लगाया जा सकता। हालांकि ये माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव, वाटर रिटेंशन और टिशू का सूजना कुछ ऐसी समस्याएं हो सकती हैं जिनके कारण मीडियन नर्व सिकुड़ जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान वजन का बढ़ना इस कंडीशन को बढ़ा सकता है। प्रेग्नेंसी से पहले मोटापा कार्पल टनल सिंड्रोम को अधिक प्रभावित कर सकता है और ऐसी महिलाओं पर इसका कम प्रभाव दिखता है जो अपना बीएमआई बनाए रखती हैं

अगर आपको जेस्टेशनल डायबिटीज और हाइपरटेंशन है तो आपको तो कार्पल टनल सिंड्रोम होने की अधिक संभावना है। इस स्थिति में बढ़ी हुई ब्‍लड शुगर आगे चलकर सूजन का कारण बनती है और कार्पल टनल सिंड्रोम को बढ़ावा देती है। लक्षणों की मदद से कार्पल टनल सिंड्रोम की पहचान करना आसान है। किसी भी नर्व कम्‍प्रेशन को सुनिश्चित करने के लिए आपका डॉक्‍टर कोई यूनीक डिवाइस का इस्‍तेमाल कर सकता है। 

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कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज:

ज्यादातर मामलों में, गर्भावस्था के दौरान कार्पल टनल सिंड्रोम का उपचार परंपरागत ढंग से किया जाता है। आपको जीवनशैली में बदलाव करने और दर्द को नियंत्रित करने की कोशिश करने की सलाह दी जाएगी। 

• दिन में कई बार आइसपैक की मदद से कोल्ड कम्प्रेशन किया जा सकता है जिससे दर्द में कमी आए और नर्व्स को शांत किया जा सके। इसमें कंट्रास्ट बाथ (1 मिनट तक ठंडे या गर्म पानी में कलाई को थोड़ी देर के लिए डुबोकर रखना) भी मदद कर सकता है

• कलाई को मोड़ने से दर्द शुरू होगा या बढ़ जाएगा। ब्रेसेज जैसे रिस्ट्रेनर का इस्तेमाल कलाई की पोजीशन को सही जगह रखने में मदद कर सकता है और इससे कलाई मुड़ेगी नहीं

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• अपने हाथ के लिए कोई आरामदायक पॉश्चर ढूंढिए, खासतौर पर अपनी कलाई के लिए। अगर ये एकतरफा है तो उस हाथ के बल सोने से बचिए

• सोते वक्त अपनी कलाई को तकिए पर रखने से लक्षणों में कमी आ सकती है 

• दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर पेनकिलर भी प्रिस्क्राइब कर सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान सिर्फ प्रिस्क्राइब्ड दवाओं का इस्तेमाल ही करें

• कार्पल टनल सिंड्रोम से जुड़े दर्द को कम करने के लिए प्रेग्नेंसी के दौरान योगा असरदार साबित हो सकता है

• मायोफेशियल रिलीज थेरेपी एक तरह की फिजिकल थेरेपी है जो हाथ के फंक्शन को बेहतर बनाने में और दर्द को कम करने में मदद कर सकती है

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प्रेग्नेंसी के दौरान कार्पल टनल सिंड्रोम बेहद आम है। ये डिलीवरी के बाद अपने आप ही ठीक हो जाता है। अगर बच्चे के जन्म के बाद भी लगातार दर्द होता है तो किसी ट्रेन्ड मेडिकल प्रोफेशनल से सलाह लेनी चाहिए

एक्‍सपर्ट सलाह के लिए डॉक्‍टर आम्रपाली दीक्षित [एमबीबीएस, एमएस (ओबी-गायनी)] का विशेष धन्‍यवाद। 

Reference:

https://www.healthline.com/health/pregnancy/carpal-tunnel-pregnancy

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/16428212-carpal-tunnel-syndrome-during-pregnancy/