हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जाए। जी हां वर्ल्ड कैंसर डे मानने का यहीं लक्ष्य  है कि हम कैंसर के संबंध में फैली गलत धारणाओं को कम कर सकें ओर इसके संबंध में सही जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सके।

वर्ल्ड कैंसर डे का मुख्य उद्देश्य  बीमारी के प्रति लोगों तक सही शिक्षा पहुंचाना है। आज कैंसर की बीमारी से कोई अछूता नहीं है, पूरे विश्व को इसने जकड़ा हुआ है। इस भयानक बीमारी से जीत पाने के लिए सभी को पूरी ताकत के साथ एक साथ खड़े होकर इसका सामना करना होगा। 

यूं तो हम भी आपको समय-समय पर इस बीमारी से जुड़ी जानकारी देते है। जिसमें कैंसर क्या है, इससे लक्षण, बचाव, रोकथाम और सावधानियां आदि शामिल है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने ब्रेस्ट कैंसर से जंग लड़ी और इस लड़ाई में जीत उनकी हुई। जी हां हम Nischal Goswami के बारे में बात कर रहे हैं, जो Aausco India की managing directorहै। वह इलाहाबाद में पैदा हुई थी और अपनी पढ़ाई वहीं पूरी की थी। उनसे हमने कैंसर से जुड़ें कुछ सवाल पूछें। आइए जानें इस महिलाए ने कैंसर को कैसे हराया। अगर आप भी कैंसर से जूझ रहीं हैं और इस दौरान पॉजिटीव रहना चाहती हैं तो आप Nischal Goswami  से उनके mail id cancercare248@gmail.com से उनसे संपर्क कर सकती हैं।  

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जब आपको कैंसर का पता चला तो आपका रिएक्शन कैसा था?

जब मुझे पता चला कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर हैं तो मेरा पहला रिएक्शन था कि अब आगे क्या..क्योंकि हम सभी को लगता है कि कैंसर मतलब मौत। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोगों को इस बीमारी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं ये कहूंगी कि लोगों को कैंसर को लेकर जागरूकता होनी चाहिए, क्योंकि मुझे लगता है कि कैंसर आपको मारे या ना मारे लेकिन कैंसर का डर आपको जरूर मार सकता है। 

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कैंसर के कौन से लक्षण आपको दिखाई दिए? जिन्हें महिलाओं को अनदेखा नहीं करना चाहिए

इस बीमारी की सबसे बुरी बात ये हैं कि कैंसर होने के लक्षण पता ही नहीं चलते हैं। मैं 11 से 12 घंटे काम करती थी, जिसमें मैं ऑफिस और घर दोनों की जिम्मेदारियां निभाती थीं। और उसी दौरान मेरी बॉडी में कैंसर भी विकसित हो रहा था। लेकिन मुझे पता हीं नहीं चला कि ये कब इतना आगे बढ़ गया। आजकल की महिलाएं अपने करियर को लेकर बहुत गंभीर रहती हैं। लेकिन घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी के कारण उनकी लाइफ में स्ट्रेस बहुत बढ़ गया है, जो कैंसर को बढ़ावा देता है। जबकि इसके लिए सही लाइफस्टाइल होना बहुत जरूरी है। करियर के बारे में संजीदा होना अच्छी बात हैं, लेकिन उसके साथ अपना ख्याल रखना भी जरूरी है। 

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आज भी इंडिया में लड़कियों को बोला जाता है कि पहले आप दूसरों का ध्यान रखो फिर अपना। जबकि मैं इसका उल्टा बोलना चाहूंगी, self care is not being selfish...आप पहले अपना ख्याल रखो फिर दूसरों का। महिलाओं को अपने ब्रेस्ट की खुद से जांच करनी चाहिए और 35 साल से ऊपर की जितनी भी महिलाएं हैं उन्हें मैमोग्राफी जरूर करानी चाहिए। एक बहुत जरूरी बात यह है कि ब्रेस्ट  में सारी गांठें कैंसर की नहीं होती है। लेकिन अगर आपको कुछ अलग दिखें तो डॉक्टर के पास जल्द से जल्द जाना चाहिए। आपके पास लाइफ इंश्योोरेंस हो या नहीं लेकिन मेडिकल इंश्योरेंस जरूर होना चाहिए।

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फैमिली ने कैसे सपोर्ट किया?

फैमिली में, मैं सबसे पहले अपनी बेटी का नाम लेना चाहूंगी जो उस दौरान सिर्फ 14 साल की थी। कैंसर का पता चलने पर मुझे सिर्फ उसका चेहरा ही  याद आ रहा था। लेकिन उस 14 साल की बेटी ने मुझे और पूरे परिवार को बहुत ही मजबूती से बंधे रखा। और उसी से मैंने सीखा कि मैच्योेरेटी और उम्र का कुछ लेना-देना नहीं है, क्योंकि वह उस समय मेरी मां बन गई थी। मेरा बेटा जो उस समय क्लास 12 में था। जिसकी शैतानी और पढ़ाई को लेकर मैं हमेशा परेशान रहती थी, उसकी गंभीरता और पढ़ाई की तरफ रूझान ने मेरा डर खत्म कर दिया। बच्चों में ये बदलाव देखकर मुझे हिम्मत मिलीं, क्योंकि मेरे बच्चे  टूटने की बजाय मजबूत हुए। 

आखिरी में, मैं अपने पति के बारे में बताना चाहूंगी कि उनका प्या्र और सपोर्ट देखकर मौत भी मुझे नहीं ले जा पाई। ये होता है फैमिली का सपोर्ट। इसके अलावा मेरे ससुराल वालों ने भी मुझे बहुत सपोर्ट और केयर दी। उस समय मुझे पता चला कि आपको बीमारी में मेंटली और फिजिकली सपोर्ट के लिए फैमिली कितनी जरूरी होती है। साथ ही मेरे दोस्तों ने भी बहुत प्रेरित किया। यह वह लोग हैं जिन्हें  थैक्यू बोलना बहुत छोटा शब्द होगा। 

आप डाइट में क्या-क्या लेती थी? 

मैं नारियल पानी....अमरूद का जूस और वीट ग्रास लेती थीं। साथ ही बहुत सारे मौसमी फ्रूट्स और सिंपल सूप और दाल और ग्रीन वेजिटेबल मेरी डाइट का हिस्सा था। 

कीमोथेरेपी के दौरान आपको कैसा लगता था? 

कीमोथेरेपी के दौरान मुझे थोड़ी कमजोरी जरूर महसूस हुई, जीभ का स्वाद चला गया और बहुत सारे बाल उड़ गए। लेकिन उस दौरान आप और भी खूबसूरत होते हो, क्योंकि मेरे पति और बच्चों  का कहना था कि मैं इससे सुंदर कभी लगी ही नहीं। ये शायद सच है, जो आपको प्यार करते हैं, वो आपको ऊपरी दिखावा से नहीं, बल्कि दिल से जुड़े होते हैं, और मुझे इतना प्यार शायद कभी नहीं मिला। लेकिन उनके लिए मुझे भी थोड़ी चीजों को छिपाना पड़ा। दर्द और कमजोरी के दौरान भी हमेशा मुस्कुराते रहना पड़ा, ताकि मेरे अपनों को तकलीफ ना हो। आपका खुद की प्रेरणा होना कैंसर की सबसे बड़ी कीमोथेरेपी है। मैं बिना विग लगाए नीचे जाती थी, ताकि लोगों को पता चले कि कैंसर क्या है? और वह अपना चेकअप समय पर करवाएं। 

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ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रहीं महिलाओं को आप क्या कहना चाहेंगी? 

आजकल हर चीज का उपाय मौजूद है। वह दिन गए जब कैंसर का इलाज नहीं होता था। अब तो लोगों में जागरूकता होनी चाहिए। खुद की प्रेरणा बनाना चाहिए। अगर आप मुस्कुराते रहते हैं, तो आधे दर्द तो तभी दूर हो जाते हैं तो आप भी मुस्कुराइए!!!  कीमो के दौरान आपके बाल जाते हैं, तो आप नेचुरल ही रहें। आप खूबसूरत तभी होते हैं, जब आप अंदर से खुश हैं। बिना ब्रेक ट्रीटमेंट करवाइए और अपने आप पर भरोसा रखिए। खुद को समाज से काटकर नहीं, समाज के साथ मिल कर चलिए। 6 महीने बाद आपको पता भी नहीं चलेगा कि आप खुद इस ट्रीटमेंट से बाहर आए है, क्योंकि तब तक आप कैंसर से लड़कर उसे भगा चुके होगें। 

कैंसर से लड़ाई जितने के बाद रिकवरी कैसे की। 

खुद को खुश रहना बहुत जरूरी होता है। खुद की देखभाल, एक्सरसाइज, अच्छी डाइट, टेंशन फ्री वातावरण, ये सभी चीजें बहुत महत्वपूर्ण है। दूसरों के साथ-साथ खुद से प्यार करना आपको रिकवरी में बहुत मदद करता है।