भोजन में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन, वसा जैसे पौष्टिक तत्व, हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर हमें स्वस्थ भी बनाए रखते हैं। इसलिए जरुरी हैं कि महिलाएं अपने  टिफिन  में  ऐसे  पौष्टिक आहार रखें, जो आपको तमाम तरह की बीमारियों से बचाए।

आज की व्यस्त दिनचर्या में महिलाएं अपने भोजन को नजरअंदाज कर  देती हैं। भागमभाग वाली जिंदगी के चलते अकसर दोपहर के भोजन के लिए लाए गए अपने लंच बॉक्स में शामिल चीजों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती। इस बात पर भी ध्यान नहीं देती कि लंच बॉक्स में संतुलित और पौष्टिक भोजन है भी या नहीं। समय की कमी के कारण  वो या तो शॉर्टकट का रास्ता अपनाती हैं या कई बार घर से लंच न लाकर कैंटीन में मिलने वाले स्नैक्स या खाने पर निर्भर रहती हैं या फिर झटपट तैयार होने वाले इंस्टेंट फूड को अपनाने से भी परहेज नहीं करती, जिससे उनका टिफ़िन पौष्टिक ना होकर नुकसानदायक टिफ़िन  हो  जाता है।

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इससे होते है नुक्सान 

इस लापरवाही के चलते  वे कई तरह की छोटी-बड़ी गंभीर बीमारियों के भी शिकार हो जाती हैं। संतुलित भोजन न लेने पर उन्हें थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा आना लगता  है। त्वचा, बालों और नाखून में रुखापन जैसे लक्षण तो दिखते हैं. डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस, मोटापा, कुपोषण, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन, हार्ट प्रॉब्लम से भी ग्रस्त हो जाते हैं।

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जरुरी है सावधान

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1 ऑफिस में दही खट्टा हो जाता है, इसलिए इसमें थोड़ा सा ठंडा दूध मिला लें तो यह खट्टा नहीं होगा और शरीर में कैल्शियम की जरूरत पूरी होगी।

2 सादी रोटी की बजाय मिस्सी रोटी या दाल का परांठा अच्छा विकल्प है। आप दाल से गुंधे आटे की रोटी भी बना सकते हैं। अगर सादी रोटी ले जाना चाहते हैं तो सादा आटा न ले कर मल्टी ग्रेन पौष्टिक आटे का इस्तेमाल करें, जिसमें रागी, दलिया, चना, सोयाबीन, अलसी जैसे अन्न शामिल हों।

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3 बेसन या मूंग दाल का चीला बना सकते हैं। इसमें बारीक कटी या कद्दूकस की गाजर, मटर, प्याज, टमाटर, पालक या साग के 2-3 पत्ते, हरी-लाल-पीली शिमला मिर्च डाल सकते हैं।वेजिटेबल इडली व  पुलाव एक बेहतर लंच साबित हो सकता है। आप  इसे भी लेकर जा सकती हैं।

4 सफेद और काले चने, राजमा, मटर, साबुत मूंग, लोबिया जैसी साबुत दालों की चाट भी बना सकती  हैं।

5 आप पतली बड़ी रोटी के अंदर पनीर के क्यूब्स से बनी सब्जी और बारीक कटी सब्जियां मिला कर रोल बना सकती हैं।

7 रात  के आटे की  रोटी  भूलकर  भी  ना  लें  जाएं क्योंकि इस आटे में कई तरह के बैक्टीरिया और हानिकारक केमिकल्स पैदा हो जाते हैं जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं।

8 देर तक  कटे फल ना खाएं, क्योंकि ज्यादा देर तक कटे फलों में कीटाणु लग जाते है साथ ही रंग बदलने के साथ ही स्वाद में भी फ़र्क़ आ जाता है, इसीलिए जितना हो सकें आपको ताजे व् पोष्टिक फलो का ही सेवन करना चाहिए।

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9 खाने में नमक कम खाएं, तेल वाले पदार्थ से दूर रहें, डिब्बाबंद फूड  इत्यादि से तौबा करें।

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10 30 की उम्र के बाद महिलाओं की  हड्डियां कमजोर होनी शुरू हो जाती हैं, जो मेनोपॉज की अवस्था तक चलती है। इसलिए डाइट में कैल्शियम लेना बेहद जरूरी है।

11 अपने भोजन में दूध, दुग्ध उत्पाद, मेवे, दाल, स्प्राउट, सोयाबीन्स, टोफू, चिकन जैसे प्रोटीन और कैल्शियम से युक्त भोजन लें।

डीहाइड्रेशन से बचने और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी लें। दिन भर में 3-4 लीटर पानी अवश्य पिएं।

12 अपनी डाइट प्लान में हरी और सीजनल सब्जियों को शामिल करें । हरी सब्जियों में कैलोरी की मात्रा कम होती है और यह शरीर को पोटैशियम, विटामिन और फाइबर प्रदान करते हैं। पालक, पत्तागोभी, तोरी, करेला आदि खाने से शरीर को भरपूर मात्रा में पोषण मिलता है।

13 जो प्रभाव कटे हुए फलों पर पड़ता है वैसे ही फलों के जूस भी खुले छोड़ देने पर या स्टोर करने पर खराब हो जाते हैं। कोशिश करिये कि फलों के जूस को निकालने के 10 मिनट के अन्दर ही पी लें।

14 चाय-कॉफी का सेवन कम करें। कैफीन से शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ता है. इसके बजाय जूस, दही, लस्सी, मट्ठा, सत्तू, नींबू पानी,  नारियल पानी आदि को अपनी डाइट में शामिल करें।