सर्दियों का मौसम चल रहा है। इस मौसम में कफ, खांसी और बुखार की समस्‍या लगभग हर किसी को हो जाती है। इस दौरान सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत तब आती है, जब कफ जम जाता है और खांसी रुकने का नाम ही नहीं लेती है। कफ के कारण कई बार बुखार भी आ जाता है। हालांकि, कफ होना कोई बीमारी नहीं है बल्कि कफ होने से संकेत मिलता है कि आपके शरीर को किसी बीमारी ने जकड़ लिया है। 

कफ की समस्या को कम करने के लिए बाजार में बहुत सारी दवाएं आती हैं। हालांकि, आपको कोई भी दवा बिना चिकित्‍सक से परामर्श किए बिना नहीं लेनी चाहिए। मगर दवा लेने से पहले आप कफ को नेचुरोपैथी के द्वारा कम करने का प्रयास जरूर कर सकते हैं। इस बारे में हमने नेचुरोपैथी एक्सपर्ट डॉक्टर प्रगति से बात की। 

डॉक्‍टर प्रगति कहती हैं, 'कफ होने को लोग आमतौर पर बुरा मानते हैं, मगर कफ होना अच्छा होता है क्योंकि इससे जो डस्ट पार्टिकल्स हमारी लंग्‍स को प्रभावित कर सकते हैं, वह वहां तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। कफ के साथ ये डस्‍ट पार्टिकल्स शरीर के बाहर आ जाते हैं।'

ऐसे में बहुत जरूरी है कि आपको पता हो कि कफ को शरीर से नेचुरोपैथी के द्वारा बाहर कैसे निकाला जा सकता है। इस विषय पर हमें कुछ टिप्‍स डॉक्‍टर प्रगती दे रही हैं। 

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कुंजल क्रिया 

  • पानी में नमक डालें और उसे गुनगुना कर लें। 
  • अब पानी को खूब सारा पी लें। 
  • पानी तब तक पीएं जब तक आपको उल्टी न आए। 
  • इसके बाद आपको हाथ की पहली उंगलियों को मुंह के अंदर गले तक डालना है। 
  • ऐसा करने से जो पानी आपने पीया है वो बाहर आ जाता है। 
  • पानी के साथ कफ भी बाहर आ जाता है। 

नोट- कुंजल क्रिया को हमेशा खाली पेट सुबह उठते ही करें। 

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नेति क्रिया 

नेति क्रिया एक योग विधि है। इसमें दो तरह की क्रियाएं होती है जल नेति और सूत्र नेति। दोनों ही क्रिया आपको सर्दी, खांसी, साइनस और जुकाम की समस्या में राहत पहुंचाती हैं। अगर आप जल नेति क्रिया कर रहे हैं तो इसके लिए आपको एक नेति पॉट लेना होगा, जो आपको बाजार में आसानी से मिल जाएगा। पहली बार आप यह क्रिया किसी एक्‍सपर्ट के संचालन में करें। इस प्रकार होती है जल नेति क्रिया- 

  • इसके लिए आपको नेति पॉट में गुनगुना पानी भरना होगा। 
  • अब आप इस पानी को नाक के एक छिद्र से अंदर की ओर डालें। 
  • ऐसा करने पर पानी नाक के दूसरे छिद्र से बाहर निकल आएगा। 
  • आप इस क्रिया को दिन में किसी भी समय में कर सकते हैं। 

नोट- इस अभ्‍यास के दौरान आपको नाक की जगह मुंह से सांस लेनी होगी।

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स्‍टीम बाथ 

स्टीम बाथ को भाप स्नान भी कहा जाता है और जिन लोगों को कफ की समस्या होती है, उनके लिए स्टीम बाथ बहुत ही अच्छी होती है। आयुर्वेद में इसे औषधीय वाष्प कहा जाता है। इस तरह के स्नान में पानी में बहुत तरह की औषधियां, तेल और पत्तियां मिलाई जाती हैं और पानी को गर्म किया जाता है, इससे जो भाप निकलती है उससे पूरे शरीर को कवर किया जाता है। यह स्नान केवल कफ ही दूर नहीं करता है बल्कि और भी कई शारीरिक परेशानियों को कम करता है और मानसिक सुकून पहुंचाता है।  

चार्ज वॉटर 

नेचुरोपैथी में चार्ज वॉटर के बारे में भी बताया गया है। यह बहुत ही आसान क्रिया है। अगर किसी को मामूली कफ है तो पीले रंग की बॉटल में पानी भर कर 24 से 48 घंटे के लिए आप सन लाइट में रख दें। फिर आप उस पानी को 50-50 ग्राम के अनुपात में 4-5 बार दिनभर में पी लें। वहीं अगर किसी को गंभीर कफ की समस्‍या है तो उसे ऑरेंज और ब्‍लू कलर की बॉटल में पानी भर कर वैसे ही सन लाइट में रखना है, जैसे येलो बॉटल में पानी को चार्ज किया जाता है। जब पानी चार्ज हो जाए तो ब्‍लू और ऑरेंज दोनों बॉटल से 50-50 ग्राम के अनुपात में पानी मिक्‍स करके दिन में 4-5 बार पी लें। ऐसा तब तक करें जब तक कफ खत्म न हो जाए।  

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