मेनोपॉज के दौरान, कई महिलाएं इलेक्ट्रिक शॉक के समान शरीर में अचानक तेज, लेकिन कम आघात का अनुभव करती हैं। यह अत्यधिक असहज महसूस कराने वाला और दर्दनाक हो सकता है, लेकिन यह इलेक्ट्रिक शॉक की तीव्रता पर निर्भर करता है। मेनोपॉज के दौरान अनुभव किए जा रहे कई अन्य लक्षणों की तरह, यह भी एक ऐसा लक्षण है जो शरीर के हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। यह हॉट फ्लैशेस से पहले हो सकता है।

इलेक्ट्रिक शॉक कैसे होते हैं?

शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण, मस्तिष्क से कुछ न्यूरॉन्स मिसफायर हो जाते हैं, जिससे शरीर में दर्द और झटका महसूस होता है। ये किसी भी तरह से शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। चूंकि एस्ट्रोजन मस्तिष्क के कामकाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, हार्मोन का असंतुलित लेवल नर्वस सिस्‍टम को मस्तिष्क की कुछ दिशाओं को गलत समझने का कारण बनता है, जिससे न्यूरॉन्स अपनी इच्छा से काम करने से चूक जाते हैं।

electric shock INSIDE

महिलाओं को इलेक्ट्रिक शॉक कैसे लगते हैं?

इसमें शरीर के विभिन्न हिस्सों में एक तेज झटके या आवेग जैसा महसूस किया जाता है। इलेक्ट्रिक सेंसेशन सिर के विभिन्न हिस्‍सों से अचानक से गुजरता हैं। साथ ही यह एक 'जैप' या त्वचा के नीचे आवेग की तरह लगता है। महिला को ऐसा महसूस हो सकता है कि बिजली की तरंगे त्वचा के पार चल रही हैं या एक रबर-बैंड मसल्‍स और त्वचा के बीच में फंस गया है।

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मेनोपॉज के दौरान इलेक्ट्रिक शॉक से कैसे निपटें?

डाइट में कैल्शियम और ओमेगा -3 को शामिल करें - ये पोषक तत्व नर्वस सिस्‍टम को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं। चूंकि इलेक्ट्रिक शॉक एक अक्षम रूप से काम करने वाले नर्वस सिस्‍टम के कारण होते हैं, इसलिए आपको डाइट में इन पोषक तत्वों को शामिल करने से इसके कामकाज को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। 

सैचुरेटेड फैट से बचें- सैचुरेटेड फैट शरीर में फैट के जमाव का कारण बनता है, जिससे ब्‍लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है। ऐसे में अपने महत्वपूर्ण अंगों जैसे हाथ और पैर को झनझनाहट संवेदनाओं से मुक्त रखना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, सामान्य ब्‍लड सर्कुलेशन को बनाए रखने के लिए, सैचुरेटेड फैट से बचा जाना चाहिए। इसकी जगह अपनी डाइट में फलों और सब्जियों को शामिल करें। 

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कैफीन और अल्कोहल के सेवन से बचें - अल्कोहल नर्वस सिस्‍टम को नुकसान पहुंचाता है, और कैफीन इलेक्ट्रिक शॉक की भावना को और भी खराब कर सकता है क्योंकि यह मसल्‍स में ऐठन का कारण बनता है और न्यूरॉन्स को एक्टिव करता है। नर्वस सिस्‍टम से जुड़े इलेक्ट्रिक शॉक से बचने के लिए अपने न्‍यूरॉन्‍स को सर्वोत्तम रूप में रखना जरूरी होता है। इसके लिए शराब और कैफीन से बचने की कोशिश करें। 

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थोड़ी धूप लें- प्राकृतिक धूप को नर्वस सिस्‍टम के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है। पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन डी देने के अलावा, सूरज की रोशनी नर्वस सिस्‍टम को भी शांत करती है, जिससे आपको इलेक्ट्रिक शॉक को कम करने में मदद मिलती है।

वॉटर थेरेपी - पानी के टेम्‍परेचर का विभिन्न लेवल मसल्‍स को शांत करने में मदद करता हैं जो इलेक्ट्रिक शॉक के कारण प्रभावित होते हैं। अपने हाथों और कंधों की मसाज एक ठंडे, गीले तौलिये से करें, धीरे-धीरे पानी का टेम्‍परेचर बढ़ाएं। आप इस अभ्यास को लंबे हॉट शॉवर के साथ समाप्त कर सकते हैं। वैकल्पिक रूप से हॉट एंड कोल्ड थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक हाथ को 30 सेकंड के लिए गर्म पानी में डुबोया जाता है और फिर स्विच करके दूसरे हाथ से ठीक वैसा ही किया जाता है। इस तरह हॉट एंड कोल्ड थेरेपी नसों को उत्तेजित करती है।

नंगे पैर चलें- आप समुद्र तट या घास जैसे प्राकृतिक परिवेश के बीच नंगे पैर चल सकते हैं। रेत या घास जैसे प्राकृतिक फर्श पर नंगे पांव चलने से नर्वस सिस्‍टम को स्थिर करने में मदद मिलती है। 

जीवनशैली में बदलाव और वैकल्पिक चिकित्सा का कॉम्बिनेशन मेनोपॉज के दौरान इलेक्ट्रिक शॉक के लक्षण को कम करने में मदद करता है। हालांकि, सभी महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान इस लक्षण का अनुभव नहीं होता है।

डॉक्‍टर प्रीति देशपांडे एम.एस. ((OBGY), FICOG, Endoscopy Training IRCAD (France) को उनकी एक्सपर्ट सलाह के लिए धन्यवाद।

Source, Reference and Recommended Reading:

https://megsmenopause.com/2018/06/21/electric-shocks/

http://www.menopausenow.com/electric-shocks