डिप्रेशन एक ऐसा मानसिक विकार है जो उदासी, भावनाओं की कमी, दूसरे शब्दों में कहें तो यह महिलाओं की सोच, व्यवहार और डेली रूटीन को प्रभावित करता है। लेकिन अगर महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान डिप्रेशन की समस्‍या होती है, तो यह और भी खराब हो सकती है। जी हां डिप्रेशन आजकल एक आम समस्‍या बन गई है, जो महिलाओं को बहुत ज्‍यादा परेशान करती है, खासतौर पर मेनोपॉज के दौरान।  

पेरिमेनोपॉज वह समय है, जिसमें महिला मेनोपॉज के लक्षणों का अनुभव करती हैं और 40 वर्ष की उम्र के आसपास शुरू होता है। इस चरण के दौरान शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से एक महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव दिखाई देने लगते है, और सबसे खराब स्थितियों में यह डिप्रेशन की ओर ले जाती है।

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मेनोपॉज में डिप्रेशन के सामान्य लक्षण क्‍या हैं? 

  • दुख, चिंता और लगातार निराशावाद की भावना
  • चिड़चिड़ापन
  • कुछ एक्टिविटी जो आमतौर पर महिलाएं करती हैं, उनका आनंद लेने में असमर्थ होना। 
  • नींद में समस्‍या, या कभी-कभी बहुत अधिक सोना।
  • बाहरी दुनिया से कटना। 
  • थकान का अहसास।
depression during menopause INSIDE

मेनोपॉज में डिप्रेशन के क्‍या कारण हैंं? 

मेनोपॉज या पेरीमेनोपॉज के कई कारक हैं, जो महिलाओं में डिप्रेशन का कारण बनते हैं। हार्मोन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि मेनोपॉज में हार्मोनल का जबरदस्‍त बदलाव होता है, जो डिप्रेशन का कारण बन सकता है। एस्ट्रोजन के लेवल में कमी जो पेरिमेनोपॉज़ की ओर ले जाता है, वह भी भावनात्‍मक बदलाव जैसे, उदासी, थकान और मूड स्विंग्स योगदान देता है।

हालांकि, अगर आप किसी भी गंभीर लक्षण का सामना कर रहे हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

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मेनोपॉज में डिप्रेशन का इलाज कैसे करें?

अनुभव किए जा रहे लक्षणों के अनुसार हमेशा इलाज कराने की सलाह दी जाती है - चाहे वह हल्के हो या बहुत ज्‍यादा।

जीवनशैली में निम्नलिखित बदलाव सहायक हो सकते है।

  • बड़े कामों को छोटे लोगों में बांटे, कुछ प्राथमिकताएं निर्धारित करें, और वही करें जो आप कर सकते हैं।
  • ऐसी एक्टिविटी में हिस्‍सा बनें, जो आपको बेहतर महसूस कराती हैं जैसे कि हल्की एक्सरसाइज, मूवी जाना, बॉलगेम, धार्मिक, सोशल या अन्य मनोरंजक एक्टिविटी में भाग लेना।
  • इसे समय दें। अपने मूड को धीरे-धीरे सुधारने की कोशिश करें, तुरंत नहीं। बेहतर महसूस करने में समय लगता है।

अगर लक्षण देखे जाते हैं, तो एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं के साथ ट्रीटमेंट और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एस्ट्रोजन प्लस प्रोजेस्टेरोन और कभी-कभी केवल एस्ट्रोजन) के कॉम्बिनेशन की सिफारिश की जाती है। लेकिन यह कॉम्बिनेशन केवल संकेत देता है, अगर अतीत में डिप्रेशन के कोई लक्षण नहीं थे।

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हालांकि, हल्के लक्षणों और महिलाओं में जो पहले डिप्रेशन के लक्षणों का अनुभव कर चुकी हैं, उन्हें एंटीडिप्रेसेंट और हार्मोन थेरेपी आज़माने की सलाह दी जाती है। हार्मोन थेरेपी आपको हॉट फ्लैशेस जैसे शारीरिक लक्षणों को खत्म करने और आपके मूड को एक अच्छे में बदलने में मदद करेगी।

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हालांकि, अगर लक्षण बहुत ज्‍यादा हैं, तो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आप दवा के साथ-साथ मनोचिकित्सा उपचार को फॉलो करें।

जीवनशैली में बदलाव - चाहे आप एंटीडिप्रेसेंट्स के साथ हार्मोन थेरेपी पर हों, या एंटीडिप्रेसेंट्स, गैर-औषधीय उपचारों के साथ, यह निश्चित रूप से डिप्रेशन पर काबू पाने में आपकी मदद कर सकता है। हालांकि, हेल्‍दी डाइट को फॉलो करके अपनी जीवन शैली को बदलना, कुछ फिजिकल एक्टिविटी के साथ-साथ अपने तनाव और क्रोध के लेवल को मैनेज करना भी लंबे समय तक मदद करेगा।

डॉक्‍टर उमा सिंह (एमबीबीएस, एमएस) को एक्‍सपर्ट सलाह के लिए विशेष धन्यवाद।

Reference link

https://womensmentalhealth.org/wp-content/uploads/2008/04/menopause_guide.pdf

https://www.verywellmind.com/the-connection-between-menopause-and-depression-4767577

https://www.health.harvard.edu/womens-health/when-the-arrival-of-menopause-brings-symptoms-of-depression