लॉकडाउन का चौथा फेज चल रहा है और इस समय में भी लोग इन्फेक्शन से बचाव के लिए घरों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। ऐसे समय में ज्यादातर लोग कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। अपने मनपसंद शोज और फिल्में देखकर या फिर अपने फेवरेट गेम खेलकर वक्त तो अच्छा बीत जाता है, लेकिन इसकी वजह से आपकी आंखें भी प्रभावित हो सकती हैं। वहीं वर्किंग प्रोफेशनल्स की बात करें तो अपने काम पर फोकस करते हुए उन्हें कई घंटे लैपटॉप या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिताने पड़ जाते हैं। इसके कारण आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे आंखें थकी-थकी नजर आ सकती हैं या फिर आंखों में जलन या खुजली जैसी महसूस हो सकती है। इससे जुड़ी एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग कंप्यूटर स्क्रीन पर ज्यादा देर तक काम करते हैं, उनमें से 50 से 90 फीसदी तक लोगों में इस तरह के लक्षण पाए जाते हैं। सिर्फ बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। जो बच्चे ज्यादा देर तक टैबलेट्स पर वक्त बिताते हैं या स्कूल से जुड़े कामों के लिए कंप्यूटर का यूज करते हैं, उन्हें भी इस तरह की समस्या हो सकती है। 

कैसे प्रभावित करती है कंप्यूटर की स्क्रीन?

computer vision syndrome take care of eyes

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम में एक ही तरह का मोशन होता है, जिससे आंखों बार-बार गुजरती हैं। आप कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन के आगे जितना ज्यादा वक्त गुजारेंगे, उतनी ही ज्यादा समस्या होगी। यह भी हो सकता है कि आपको कुछ पेज देखने की जरूरत हो और आप उन्हें देखते हुए कुछ लिख रहे हों। आपकी आंखें लगातार फोकस बदलती हैं तो आपके दिमाग में अलग-अलग तरह की तस्वीरें बनती हैं। इसके लिए आपकी आंखों की मांसपेशियां काफी ज्यादा मेहनत करती हैं। कागज पर लिखी चीजों की तुलना में जब आप स्क्रीन पर कुछ पढ़ रहे होते हैं तो उसमें कंट्रास्ट, फ्लिकर और ग्लेयर, इन तीनों चीजों का आंखें सामना कर रही होती हैं। इससे आंखें ड्राई होने लगता है और लंबे समय तक ऐसी ही स्थिति बनी रहने से धुंधला नजर आने लगता है। 

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आई प्रॉब्लम पहले से है तो रहें और भी ज्यादा सावधान

अगर आपकी आंखों में पहले से समस्या है तो कंप्यूटर स्क्रीन आंखों को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। आपकी तरफ से होने वाली गलतियां भी आपकी समस्या को बढ़ाती हैं, जैसे कि आंखें कमजोर होने पर चश्मे का इस्तेमाल नहीं करना, चश्मा बनवाने के बावजूद चश्मा ना लगाना, गलत नंबर का चश्मा पहना आदि। उम्र बढ़ने के साथ कंप्यूटर पर काम करना मुश्किल होता जाता है। 40 के करीब पहुंचने पर पास और दूर की चीजों पर फोकस कर पाने की क्षमता घटनी शुरू हो सकती है। इसे presbyopia की संज्ञा दी जाती है।  

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कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के ये हैं लक्षण

eye care in computer vision syndrome

कंप्यूटर ज्यादा देर तक यूज करने से आंखों को लंबी अवधि में नुकसान पहुंचता है, इसके कोई प्रमाण फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन रोजाना 8-10 घंटे लगातार कंप्यूटर स्क्रीन से आंखों पर काफी दबाव पड़ता है, जिससे परेशानी महसूस हो सकती है। इस प्रॉब्लम में कुछ  ऐसे लक्षण नजर आ सकते हैं-

  • धुंधला नजर आना
  • चीजें डबल नजर आना
  • आंखें लाल होना या ड्राई फील होना
  • आंखों में खुजली
  • सिरदर्द
  • गर्दन या पीठ में दर्द

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कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से राहत पाने के लिए क्या करें

सीनियर आई स्पेशलिस्ट डॉ. संजय तेवतिया बताते हैं, 'कंप्यूटर विजन सिंड्रोम में आखों में भारीपन, आंखें लाल होना और कई बार आंखों मं पानी आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ड्राई आंखों की समस्या भी इसी से जुड़ी हुई है। इस समस्या से बचाव के लिए बेहतर रहेगा कि आप स्क्रीन पर काम करने के लिए टाइम फिक्स कर लें, 24 घंटे में से 4 घंटे से ज्यादा स्क्रीन ना देखें। अगर आपके काम के घंटे ज्यादा हैं, तो हर आधे घंटे बाद कंप्यूटर स्क्रीन से 1-2 मिनट के लिए कहीं और देखें। इसके अलावा हर एक घंटे पर बैठने वाली जगह से हट जाएं और थोड़ा इधर-उधर घूमें। इससे आंखों को रेस्ट मिल पाता है। आंखों की रोशनी बेहतर बनाए रखने के लिए विटामिन ए रिच डाइट लें जैसे कि फ्रूट्स, हरी सब्जी और लिक्विड डाइट ज्यादा लें। अगर स्क्रीन पर ज्यादा देर तक देखते रहने की वजह से आंखें थक गई हैं, तो इसके लिए आर्टिफिशियल क्लियर आई ड्रॉप्स आती हैं, जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है। हमारी आईलिड्स 15-20 बार झपकती हैं। ये टियर्स को कोर्निया के ऊपर फैलाती हैं, लेकिन स्क्रीन पर लगातार देखने की वजह से पलकें महज 8-10 बार ही झपक पाती हैं। इसकी वजह से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या शुरू होती है। आर्टिफिशियल टियर्स एक तरह से टियर्स का सब्स्टीट्यूट हैं। इसका आंखों पर सूदिंग इफेक्ट होता है और इससे आंखों की ड्राईनेस खत्म हो जाती है।'  

इस बातों का भी रखें ध्यान

  • स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें।
  • आंखों पर दबाव कम करने के लिए आप अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर एंटी ग्लेयर स्क्रीन लगवा सकती हैं या फिर एंटी ग्लेयर वाले चश्मे पहन सकती हैं।
  • इस बात पर ध्यान दें कि एसी की हवा सीधी आपकी आंखों में ना जाए।
  • आंखों पर किसी तरह की तेज रोशनी से बचना चाहिए। अगर स्क्रीन पर बल्ब या ट्यूबलाइट की सीधी रोशनी आ रही है तो उससे बचाव करने की  जरूरत है, क्योंकि यह भी आंखों की सेहत को प्रभावित करता है।
  • कुछ लोग ऐसा भी करते हैं कि कंप्यूटर/लैपटॉप आदि पर काम करते हुए लाइट बंद कर देते हैं। ऐसा ना करें। स्क्रीन पर काम करते हुए पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए, यह लाइट ना बहुत ज्यादा ब्राइट हो और ना ही ज्यादा कम हो।  

कंप्यूटर, मोबाइल या लैपटॉप पर काम करते हुए आपको सजग रहने की जरूरत है, क्योंकि इसकी वजह से आप कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के शिकार हो सकते हैं। इस समस्या के लक्षण नजर आने पर लापरवाही ना करें और डॉ. संजय तेवतिया के बताए सुझावों पर अमल करें तो आपकी आईसाइट लंबे समय तक अच्छी बनी रहेगी और लैपटॉप-कंप्यूटर आदि पर काम करते हुए आपको प्रॉब्लम का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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