अर्थराइटिस को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता है, लेकिन गलत खान-पान और बिगड़ती लाइफस्‍टाइल के चलते आजकल युवा लोग भी इससे परेशान है। इस बीमारी के मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ती ही जा रही है। इस बीमारी में दर्द और तकलीफ बहुत ज्‍यादा होती है और इससे बचने के लिए बहुत से मरीज नीम-हकीमों पर भरोसा कर लेते हैं। जी हां लोगों का मानना है कि बहुत समय तक एलोपैथी दवाईयां खाने के बहुत सारे साइड इफेक्‍ट है, जो हमारी हड्डियों के साथ-साथ किडनी और लिवर को भी खराब कर सकती हैं। इसलिए वह इससे बचने के लिए नीम-हकीमों द्वारा दिए गए चूर्ण और गोलियां खाते हैं लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि यह झोलाछाप चिकित्सकों के चूर्ण और गोलियां अर्थराइटिस के मरीजों की मुश्किले ज्‍यादा बढ़ा देती है। यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि आईएएनएस को एक एक्‍सपर्ट ने बताया है। आइए इस बारे में विस्‍तार से जानें। 

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एक्‍सपर्ट की राय

किंग जॉर्ज मेडिकल कालेज के अस्थिरोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्‍टर धर्मेद्र कुमार का कहना है कि ''अर्थराइटिस एक गंभीर बीमारी है। यह बीमारी तेजी से अपने पैर पसार रही है। एक रिसर्च में पाया गया है कि देश में अर्थराइटिस से जुड़े मरीजों की संख्या बहुत बढ़ रही है। इस समय देश के करीब 15 प्रतिशत लोग अर्थराइटिस की चपेट में हैं।''

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उन्होंने यह भी कहा, ''बदलते परिवेश में यह बीमारी युवाओं को भी अपनी चपेट में ज्यादा ले रही है। हमारे यहां ओपीडी में 25-30 साल के मरीज भी आते हैं। उन्हें देखकर लगता है कि रुमेटॉइड अर्थराइटिस युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। यह रोग किसी एक कारण से नहीं होता। लेकिन विटामिन डी की कमी से मरीज की अंगुलियों, घुटने, गर्दन, कोहनी के जोड़ों में दर्द की शिकायत होने लगी है। इस बीमारी पर काबू पाने के लिए फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज रोजाना करना और जंक फूड से परहेज करना बेहद जरूरी है।

 

गोलियां और चूर्ण पर करते हैं भरोसा

डॉक्‍टर धर्मेद्र कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग झोलाछाप डॉक्टरों की गोलियों पर विश्वास करने लगते हैं। कुछ दिन राहत देने के बाद ऐसी गोलियां और चूर्ण सबसे नुकसानदेह साबित होती हैं। उनमें स्वाइड केमिकल मिला होता है, जिसे बहुत दिनों तक लेने से बॉडी को नुकसान हो सकता है। इससे आपका हिप्‍स गल, हड्डियां कमजोर और फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ सकता है। उनका यह भी कहना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अर्थराइटिस की चपेट में ज्यादा आती हैं। खानपान में परहेज न करना इसका मुख्य कारण है। 

बॉडी में अर्थराइटिस न हो इसके लिए रेगुलर एक्‍सरसाइज करना, बैलेंस डाइट लेना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि अगर आपको एक बार अर्थराइटिस की समस्‍या हो जाए तो इससे कई और तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं।

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बचाव के उपाय

  • अगर आपके जोड़ों में जरा सा भी दर्द, शरीर में हल्की अकड़न है तो तुरंत किसी डॉक्टर को दिखाएं।
  • अपने रुटीन को रेगुलर करने की कोशिश करें। 
  • डॉक्टर की सलाह से रेगुलर एक्‍सरसाइज करें। 
  • घुटने के दर्द में पालथी मारकर न बैठें।
  • ठंडी हवा, नमी वाले स्थान व ठंडे पानी के संपर्क में न रहें। 
  • रेगुलर अपने जोड़ों में तेल की मालिश करें। 

इसलिए इन झोलाछाप डॉक्टरों की गोलियों और चूर्ण को लेने से बचें और अपने रुटीन में एक्‍सरसाइज और हेल्‍दी डाइट को शामिल करें। 

Source: IANS