सर्वाइकल कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो सर्विक्स की कोशिकाओं में होता है। यह यूट्रस का निचला हिस्सा जो वेजाइना से जुड़ता है। यह एक प्रिवेंटेबल डिजीज है और अगर इसका जल्दी पता चल जाए तो बेहतर इलाज से भी इसे ठीक किया जा सकता है। फिर भी यह विश्व लेवल पर महिलाओं में चौथा सबसे आम कैंसर है।

ग्लोबोकैन 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 18.3 प्रतिशत महिलाएं हैं जिन्हें सर्वाइकल कैंसर है, जिनमें से उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों जैसे मिजोरम में आइज़वाल और अरुणाचल प्रदेश में पापुमपारे में सबसे अधिक मामले हैं। लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, भारत में सर्वाइकल कैंसर का बोझ बहुत बड़ा है क्योंकि देश ने 2018 में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों की सबसे अधिक अनुमानित संख्या दर्ज की है।

भारत में, सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में जागरूकता की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है क्योंकि भारत में 30-49 वर्ष की आयु की 30 प्रतिशत से कम महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की जांच की गई है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अतिरिक्त एक्‍शन किए बिना, सर्वाइकल कैंसर के नए मामलों की वार्षिक संख्या 2018 और 2030 के बीच 5,70,000 से बढ़कर 7,00,000 हो जाने की उम्मीद है। बेंगलुरु बीजीएस ग्लेनीगल्स ग्लोबल हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु के सलाहकार, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और हेमेटो-ऑन्कोलॉजी, राजीव विजयकुमार सर्वाइकल कैंसर के बारे में हमें विस्‍तार से बता रहे हैं।

अक्सर देखे जाने वाले सर्वाइकल कैंसर के कुछ लक्षण

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  • मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण, जो सेक्‍शुअल रिलेशनशीप के माध्यम से फैलता है।
  • वेजाइना से असमान ब्‍लीडिंग 
  • सेक्‍शुअल एक्टिविटी के बाद ब्‍लड निकलना
  • पोस्टमेनोपॉज़ल ब्‍लीडिंग 
  • दुर्गंधयुक्त वेजाइनल डिस्‍चार्ज  
  • पीठ के निचले हिस्से और पेट में बेचैनी।

उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी दिखाई देने पर ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श करना उचित है।

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जोखिम कारक

सर्वाइकल कैंसर का कारण बनने वाले कुछ प्रमुख जोखिम कारक हैं-

  • मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण-मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के विभिन्न उपभेद, यौन संचारित संक्रमण, अधिकांश सर्वाइकल कैंसर पैदा करने में भूमिका निभाते हैं।
  • स्‍मोकिंग- स्‍मोकिंग न करने वाली महिलाओं की तुलना में स्‍मोकिंग करना महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की संभावना को बढ़ा सकता है। यह शरीर के अंदर सर्वाइकल म्यूकस बनाता है जिससे जानलेवा बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • कमजोर इम्‍यून सिस्‍टम- वह वायरस जो एड्स का कारण बनता है, इम्‍यून सिस्‍टम को खराब करता है और लोगों को एचपीवी संक्रमण के जोखिम में डालता है। इम्‍यून सिस्‍टम कैंसर कोशिकाओं को खत्‍म करने के साथ-साथ उनके विकास और प्रसार को रोकने में हेल्‍प करती है।
  • बर्थ कंट्रोल पिल्स का लंबे समय तक इस्तेमाल- शोध के अनुसार, एक महिला जितनी अधिक देर तक बर्थ कंट्रोल पिल्स का इस्तेमाल करती है, सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन अगर बर्थ कंट्रोल पिल्स को बंद कर दिया जाए और कई साल बाद सामान्य हो जाए तो जोखिम कम हो जाता है।

रोग का शीघ्र पता लगाना है बेहतर रोग प्रबंधन की कुंजी

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को खत्म करना है, 90 प्रतिशत लड़कियों को 15 साल की उम्र तक एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह से लगवाना था, 70 प्रतिशत महिलाओं की 35 वर्ष की आयु तक जांच की गई, और फिर 45 वर्ष की आयु तक, कई अन्य उपायों को अपनाया जाना था।

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भारत में विश्व स्तर पर होने वाले कुल सर्वाइकल कैंसर के 16 प्रतिशत मामलों के होने के बावजूद बहुत कम महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की जांच की जाती है। स्क्रीनिंग एक निवारक सेवा है और रोग की घटनाओं को कम करने में विभिन्न तकनीकों को प्रभावी पाया गया है। निदान को जल्दी खोजने में सक्षम होने से एक सफल चिकित्सा की संभावना में सुधार हो सकता है और डायग्‍नोसिस में देरी को रोका जा सकता है। ग्रामीण भारत में, प्रारंभिक जांच में कुछ बाधाएं जैसे अज्ञानता, कैंसर का पता लगाने का डर, दवाएं, बुनियादी ढांचा, गरीबी और निरक्षरता आदि शामिल है।

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भारत में, कैंसर जांच के अलावा अन्य टेस्‍ट्स भी हैं जैसे पीएपी स्मीयर स्क्रीनिंग, एचआईवी-डीएनए टेस्‍ट और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए कई कार्यक्रम जो स्वास्थ्य संवर्धन, स्क्रीनिंग, प्रारंभिक पहचान, जागरूकता पैदा करने और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। स्‍मोकिंग छोड़ने और आहार में स्वस्थ पोषक तत्वों को शामिल करने के लिए 2 हेल्‍दी आदतों को फॉलो करना चाहिए। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

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