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फाइब्रॉएड्स से हैं परेशान तो इन तरीकों से झटपट करें वेट लॉस

क्या वजन घटाने से फाइब्रॉएड में मदद मिल सकती है? अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो इस आर्टिकल को एक बार जरूर पढ़ लें।  
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Published -23 Jul 2022, 16:56 ISTUpdated -23 Jul 2022, 17:37 IST
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पांच में से एक महिला को गर्भाशय फाइब्रॉएड (uterine fibroids) होता है। फाइब्रॉएड असामान्य वृद्धि है जो एक महिला के गर्भाशय में या उस पर विकसित होती है। वृद्धि आमतौर पर सौम्य या नॉन-कैंसरर्स होती है। कुछ महिलाओं में, वे काफी बड़ी हो जाती हैं और पेट में तेज दर्द और हैवी पीरियड्स का कारण बनती हैं।

हालांकि, ज्यादातर महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होते हैं और वे कभी नहीं जान सकती हैं कि उन्हें फाइब्रॉएड है। फाइब्रॉएड को अलग-अलग नामों जैसे लेयोमायोमा, मायोमा, गर्भाशय मायोमा और फाइब्रोमा के रूप में भी जाना जाता है। बेरिएट्रिक फिजिशियन और ओबेसिटी कंसल्‍टेंट, सेलिब्रिटी न्यूट्रीशनिस्ट और डाइट क्वीन ऐप के फाउंडर के डॉ किरण रुकादिकर ने इस बारे में हमें विस्‍तार से बताया है।   

फाइब्रॉएड के प्रकार (types of uterine fibroids)

फाइब्रॉएड के गर्भाशय में या उसके स्थान के आधार पर विभिन्न प्रकार के फाइब्रॉएड होते हैं - इंट्राम्यूरल फाइब्रॉएड, सबसेरोसल फाइब्रॉएड, पेडुनकुलेटेड फाइब्रॉएड, सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड।

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फाइब्रॉएड के कारण (uterine fibroids causes)

यह स्पष्ट नहीं है कि फाइब्रॉएड क्यों विकसित होते हैं, लेकिन कई कारक उनके गठन को प्रभावित कर सकते हैं। एस्ट्रोजेन के संपर्क में वृद्धि करने वाले कारक गर्भाशय फाइब्रॉएड की घटनाओं को बढ़ा सकते हैं। हालांकि फाइब्रॉएड प्‍यूबर्टी से पहले नहीं देखे जाते हैं, आमतौर पर रिप्रोडक्टिव उम्र की महिलाओं में होते हैं और आमतौर पर मेनोपॉज के बाद दोबारा से हो सकते हैं। 

इसे जरूर पढ़ें:क्‍या होते हैं गर्भाशय के फाइब्रॉएड्स, हर महिला को है जानना जरूरी

मेनोपॉज के बाद महिलाओं में फाइब्रॉएड के आकार में कमी को मेनोपॉज के बाद एंड्रोजेनिक ओवेरियन हार्मोन के निम्न औसत स्तर के कारण माना जाता है। हालांकि, पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं में बढ़ते वजन और शरीर में फैट के साथ औसत एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता पाया गया है।

माना जाता है कि ओवेरियन हार्मोन फाइब्रॉएड के एटियलजि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोटापा फाइब्रॉएड की घटनाओं को बढ़ा सकता है, जबकि हाई पैरिटी सुरक्षात्मक दिखाई देती है। माना जाता है कि पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं में एडीपोसिटी फाइब्रॉएड के जोखिम को प्रभावित करती है क्योंकि पेरीफेरल टिशू, मुख्य रूप से शरीर में फैट, एस्ट्रोजेन के प्रसार का प्रमुख स्रोत बन जाते हैं, खासकर जब महिलाएं हार्मोनल रिप्लेसमेंट थेरेपी नहीं ले रही हों।

fibroids and weight loss

2 प्रमुख कारक भी देखे गए हैं- 

  • बहुत अधिक रेड मीट खाना और पर्याप्त हरी सब्जियां, फल, या डेयरी नहीं खाना
  • बहुत अधिक अल्‍कोहल

परिवर्तन जो फाइब्रॉएड के जोखिम को रोकने और नियंत्रित करने में कर सकते हैं मदद 

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  • फैट और वजन कम करने सेफाइब्रॉएड की रोकथाम और नियंत्रण में मदद मिल सकती है। तले हुए फूड्स, मिठाई, दुग्ध उत्पाद और सूखे मेवों का अधिक सेवन जो कैलोरी में बहुत अधिक होते हैं, फैट और वजन बढ़ाने का कारण बनते हैं। इन्हें रोकना वजन और चर्बी घटाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
  • आहार विशेषज्ञ के पास जाएं और वजन घटाने के लिए उचित आहार को समझें। संतुलित भोजन करने और वॉकिंग करने से चर्बी और वजन घटाने में मदद मिलेगी।
  • कम कैलोरी वाले फूड्स, फ्लेवोनोइड्स से भरपूर फूड्स, पकी हुई हरी सब्जियां और सलाद, ताजे फल, फलियां, अनाज और ग्रीन टी पाएं।
  • अंडे की सफेदी, चिकन, कोल्‍ड-वाटर फिश जैसे टूना या सालमन, ये सभी आपको अच्छे प्रोटीन और कम फैट देंगे।
  • अल्‍कोहल का सेवन कम करें।
  • रोजाना 90-120 मिनट टहलें। मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को किसी भी तरह के व्यायाम से बचना चाहिए।

हेल्‍दी वजन, अच्छी डाइट, रेगुलर एक्‍सरसाइज रूटीन और तनाव मुक्त जीवन कई बीमारियों को रोकने और नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, फाइब्रॉएड उनमें से एक है।

इसे जरूर पढ़ें:महिलाओं को यूट्रस में फाइब्रॉएड को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज, जानें कारण

आप भी इन टिप्‍स की मदद से मोटापे को कम करके फाइब्रॉएड की समस्‍या राहत पा सकती हैं। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

Image Credit: Freepik

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