निमोनिया पूरी तरह से इलाज योग्य स्थिति है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है और इसके 4 चरण होते हैं। फेफड़े कई, लोचदार वायु थैली से बने होते हैं और निमोनिया एक संक्रामक फेफड़ों की बीमारी है जहां इन वायु कोशिकाओं में सूजन हो जाती है जिससे इनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। 

निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस या कवक के कारण हो सकता है। संक्रमण के कारण फेफड़ों की वायु थैली (एल्वियोली) में सूजन आ जाती है और द्रव या मवाद भर जाता है। इससे ब्‍लड फ्लो में आने वाली ऑक्सीजन ठीक से संचालित नहीं हो पाती है।

योग का अभ्यास करना फेफड़ों और शरीर को स्वस्थ रखने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। योग का दैनिक अभ्यास चेस्‍ट की मसल्‍स को मजबूत करने, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। योग फेफड़ों को स्वस्थ और मजबूत रखने में मदद करता है। जिससे सांस लेने और ऑक्सीजन की मात्रा में सुधार होता है। 

प्रत्येक आसन के साथ अपना समय लें और 15-20 सेकेंड के लिए रुकने का प्रयास करें और इस 2-3 सेट को दोहराएं या जितना आप करने के लिए पर्याप्त सहज महसूस करें। इन योगासन और प्राणायाम के बारे में हमें योगा मास्टर, फिलांथ्रोपिस्ट, धार्मिक गुरू और लाइफस्टाइल कोच ग्रैंड मास्टर अक्षर जी बता रहे हैं।

योगासन

सावित्री आसन

Savithri asana for fitness

  • घुटनों को धीरे से जमीन पर टिकाएं और ऊपरी शरीर को सीधा रखें। 
  • शरीर को गर्म करने के लिए सूक्ष्म व्यायाम से शुरुआत करें। 
  • हथेलियों को कंधे की दूरी पर रखते हुए भुजाओं को आकाश की ओर फैलाएं। 
  • आगे देखें और पकड़े।

उष्ट्रासन

Ustrasana for lungs

  • योगा मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं और हाथों को कूल्हों पर रखें। 
  • इसके साथ ही, पीठ को झुकाएं और हथेलियों को पैरों पर तब तक खिसकाएं जब तक कि बाहें सीधी न हो जाएं। 
  • गर्दन को तनाव या फ्लेक्स न करें बल्कि इसे तटस्थ स्थिति में रखें। 
  • इस आसन में एक दो सांस तक रहें। 
  • सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं। 
  • हाथों को वापस ले लें और जैसे ही सीधा करें, उन्हें वापस कूल्हों पर ले आएं। 
  • इस आसन को ज्यादा देर तक न करें।

हस्त उत्थानासन

Hastha Utanasana

  • समस्थिति में सीधे खड़े होकर शुरुआत करें। 
  • बांहों को सिर के ऊपर उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि हथेलियां एक दूसरे के सामने हों। 
  • सिर को बांहों के बीच में रखें और धीरे से पीछे की ओर झुकें। 
  • घुटनों को सीधा रखें, आंखें खुली रहनी चाहिए।

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प्राणायाम

Brahmari Pranayama

अनुलोम विलोम और ब्रह्मरी प्राणायाम की सांस लेने की इन तकनीकों को धीरे-धीरे शुरू कर सकते हैं। शांत गति (धीमी गति) में अभ्यास करने की आवश्यकता है। ये दो प्राणायाम तकनीक हमें होने वाली किसी भी परेशानी को कम करने में उपयोगी हो सकती हैं।

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हम ढेर सारे गर्म तरल पदार्थ पीकर अपने निमोनिया को नियंत्रित कर सकते हैं। यह स्राव को ढीला करने और कफ को ऊपर लाने में मदद करता है। भीड़भाड़ वाले वायुमार्ग को खोलने और सांस लेने को आसान बनाने के लिए, आप भाप से स्नान कर सकते हैं और एक ह्यूमिडिफायर का उपयोग कर सकते हैं। 

इसके अलावा, जितना हो सके घर के अंदर रहें और फेफड़ों को ठीक करने के लिए धुएं से दूर रहें। जब तक आप मजबूत महसूस न करें तब तक भरपूर आराम करें। योग और आयुर्वेद की मदद से हम अपने फेफड़ों को मजबूत कर सकते हैं और शीघ्र ठीक हो सकते हैं।

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