20 में से 1 व्यक्ति जो डेंगू बुखार से संक्रमित है, उन्हें गंभीर डेंगू की संभावना हो सकती है। जिसके परिणामस्वरूप झटका लग सकता है, आंतरिक ब्‍लीडिंग हो सकतह है और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को गंभीर डेंगू होने का खतरा अधिक होता है। लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि डेंगू से बचाव के लिए आप कुछ घरेलू नुस्‍खों, योग और प्राणायाम को अपना सकती हैं। इस बारे में हमें योगा मास्टर, फिलांथ्रोपिस्ट, धार्मिक गुरू और लाइफस्टाइल कोच ग्रैंड मास्टर अक्षर जी बता रहे हैं।

योग से मजबूत बनती है इम्‍यूनिटी 

एक मजबूत इम्‍यून सिस्‍टम हमें डेंगू को रोकने में मदद करता है जिसे योग जैसे समग्र अभ्यासों के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। अगर आपको डेंगू है तो योग डेंगू बुखार से जल्दी ठीक होने में मदद करता है। मजबूत इम्यूनिटी डेंगू के शुरुआती लक्षणों का भी इलाज कर सकती है।

डाइट पर ध्यान रखें

ऑयली या मसालेदार कुछ भी न खाएं। ताजा पका हुआ भोजन करें जिसमें काली मिर्च और इलायची जैसी सामग्री हो। अन्य इम्‍यूनिटी-बढ़ाने वाले फूड्स हम अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं, उनमें खट्टे फूड्स, लहसुन, बादाम, हल्दी और कई अन्य शामिल हैं। निम्नलिखित आसनों का अभ्यास धीरे-धीरे करें। लंबे समय तक धारण न करें। अनुलोम विलोम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे प्राणायाम को भी अपने रूटीन में शामिल कर सकती हैं।

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पश्चिमोत्तानासन

Paschimottanasana for dengue

  • दंडासन से शुरू करें जहां पैर आगे की ओर फैले हुए हों।
  • यदि आवश्यक हो तो घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखें। 
  • बाजुओं को ऊपर उठाएं और अपनी रीढ़ को सीधा रखें।
  • सांस छोड़ें और आगे की ओर झुकें।
  • पैर की उंगलियों को अपनी उंगलियों से पकड़ने की कोशिश करें।
  • 10 सेकेंड के लिए इस आसन में रहें।

वज्रासन

Vajrasana for dengue

  • इसे करने के लिए घुटनों को अपनी चटाई पर नीचे लाएं।
  • पेल्विक को अपनी एड़ी पर टिकाएं।
  • एड़ियों को एक दूसरे से थोड़ा अलग रखें।
  • हथेलियों को अपनी थाइज पर रखें।
  • पीठ को सीधा करें और आगे की ओर देखें।

वृक्षासन

Vrikshasana for dengue

  • लंबे समय तक खड़ी रहें और एक पैर को घुटने के ऊपर या नीचे विपरीत आंतरिक थाई पर रखें। 
  • पैर को बगल की तरफ खोलें। 
  • हाथों को प्रार्थना के लिए लाएं और पांच से आठ सांसों तक रुकें।
  • यह पैर और पेट की ताकत बढ़ाता है।
  • हिप्‍स की गतिशीलता पर काम करता है।

सावित्री आसन

Savithri asana for dengue

  • घुटनों को धीरे से जमीन पर टिकाएं और अपने ऊपरी शरीर को सीधा रखें।
  • शरीर को गर्म करने के लिए सूक्ष्म व्यायाम से शुरुआत करें।
  • हथेलियां कंधे से कंधा मिलाकर और एक-दूसरे की ओर मुख करके अपनी बाजुओं को आकाश की ओर फैलाएं।
  • आगे देखें और रुकें।

धनुरासन

Dhanurasana yoga for dengue

  • पेट से शुरू करें।
  • हथेलियों से टखनों को पकड़ने के लिए अपने घुटनों को मोड़ें।
  • सांस भरते हुए अपने पैरों और बाजुओं को जितना हो सके ऊपर उठाएं।
  • पेट पर संतुलन करें।
  • ऊपर देखें और आसन को बनाए रखें।

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ब्रह्मरी प्राणायाम

Brahmari Pranayama yoga for dengue

  • किसी भी आरामदायक आसन (जैसे सुखासन, अर्धपद्मासन या पद्मासन) में बैठें।
  • पीठ को सीधा करें और अपनी आंखें बंद करें।
  • हथेलियों को अपने घुटनों (प्राप्ति मुद्रा में) पर ऊपर की ओर रखें। 
  • अंगूठे को 'ट्रैगस' पर रखें, बाहरी फ्लैप आपके कान पर।
  • तर्जनी को अपने (मध्यमा अंगुली मेडियल कैन्थस पर और अनामिका नथुने के कोने पर) माथे पर रखें। 
  • श्वास लें और अपने फेफड़ों को हवा से भरें।
  • जैसे ही आप सांस छोड़ते हैं, मधुमक्खी की तरह धीरे-धीरे एक भिनभिनाहट की आवाज़ करें, यानी, 'mmmmmmmm...।'
  • मुंह पूरे समय बंद रखें और महसूस करें कि ध्वनि का कंपन आपके पूरे शरीर में फैल रहा है। 

सिद्धोहम क्रिया का यह विशेष अभ्यास मूड के उतार-चढ़ाव के उपाय के रूप में किया जा सकता है। यह हमें हमारी ऊर्जाओं को संतुलित करने और एक सुखद स्वभाव में रहने में मदद करता है। इस अभ्यास के सबसे महत्वपूर्ण और अद्भुत लाभों में से एक यह है कि यह मूड को बनाए रखने और वहां से अपग्रेड करने में मदद करता है। यह हमारे शरीर मन और आत्मा को संरेखित करने में मदद करता है।

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