पूरी दुनिया में हम लोगों को चिंता और डिप्रेशन के विभिन्न लेवल का अनुभव करते हुए देख सकते हैं। लेकिन जब हम खुश होते हैं, तो आनंदमय चित्त की स्थिति को प्राप्त करने में अधिक सक्षम हो जाते हैं। इसलिए हमें भी अपनी खुशी की दिशा में काम करना चाहिए, तभी हम सफलताओं का आनंद ले सकते हैं। 

जब हम कृतज्ञता की भावना का अभ्यास करते हैं, तो भीतर से एक चमक का अनुभव करते हैं। जीवन में कृतज्ञता व्यक्त करने की आदत डालने से हम खुश रह सकते हैं और स्वयं से बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं। यह हमारे संतोष की भावना को बढ़ाता है और प्रत्येक क्षण को पूर्ण महसूस कराता है। तृप्ति की इस भावना को अपने जीवन में लाते हैं, तो यह हमारी भलाई को बढ़ाता है। 

महिलाएं खुद से संबंधों को कैसे मजबूत कर सकती हैं? इस बारे में हमें योगा मास्टर, फिलांथ्रोपिस्ट, धार्मिक गुरू और लाइफस्टाइल कोच ग्रैंड मास्टर अक्षर जी बता रहे हैं।

1. आसन - शारीरिक कल्याण

Sukhasana fitness

सूक्ष्म एक्‍सरसाइज से शुरुआत करें। इनमें जोड़ों को धीरे-धीरे गर्म करने के लिए गर्दन, हाथ, कलाई, कूल्हों, टखनों का कोमल घुमाव शामिल है। तेज गति से

घूमें और अपनी मसल्‍स को स्‍ट्रेच और गतिमान करें। यह शरीर को अभ्यास के लिए तैयार करेगा और अभ्यास से संबंधित चोटों से सुरक्षित रखेगा। वज्रासन, सुखासन, भुजंगासन आदि जैसे आसनों का अभ्यास कर सकते हैं और हर सुबह सूर्य नमस्कार भी कर सकती हैं।

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2. मेडिटेशन

Swaas Dhyan

शुरू में उनका विरोध न करके और उन्हें प्रवाहित करके अपने विचारों के प्रवाह के पर्यवेक्षक बनें। धीरे-धीरे, जागरूकता को श्वास पर तब तक स्थानांतरित करते रहें जब तक कि उस बिंदु तक नहीं पहुंच जाते हैं जहां पूरा ध्यान सांस लेने और छोड़ने पर होता है, दिमाग में लगभग पूरी तरह से विचार नहीं होते हैं।

स्वास ध्यान

  • आरामदायक आसन (जैसे सुखासन, अर्ध पद्मासन या पद्मासन) में बैठें। 
  • हथेलियों को घुटनों पर ऊपर (प्राप्ति मुद्रा) की ओर रखें। 
  • पीठ को सीधा करें और आंखें बंद करें।
  • श्वास लेने और छोड़ने का समय 6:6 के अनुपात में होना चाहिए, अर्थात यदि 6 बार श्वास लेते हैं, तो 6 बार श्वास छोड़ना होगा।
  • श्वास लेते और छोड़ते समय श्वास पर ध्यान दें और फिर अपने नासिका छिद्र को छोड़ दें।

3. माइंडफुलनेस

माइंडफुलनेस जागरूक अवस्था है जहां हम विचारों, भावनाओं और शारीरिक संवेदनाओं के प्रवाह का निरीक्षण करते हैं। आत्म निरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान किसी भी क्रिया, विचार या भाषण को अच्छा या बुरा कहे बिना तटस्थता का प्रयोग करें। सांस के साथ तालमेल बनाकर वर्तमान क्षण के विवरण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। माइंडफुलनेस बस हमारी भलाई में सुधार करती है और एक संतुष्ट जीवन में योगदान करती है।

4. चलना और आत्म-चर्चा करना

Vajrasana for fitness

चलना एक ऐसी गतिविधि है जिसे चिकित्सीय माना जाता है। अपने ऑफिस या पड़ोस के ब्लॉक में घूमने के लिए किसी भी सुविधाजनक समय पर हर दिन कुछ मिनट बिताएं। खुद के निरीक्षण में व्यस्त रहें और स्वयं से बातचीत करें। यह प्रक्रिया दिमाग को साफ करने और सामने आने वाली कठिन परिस्थितियों से अच्‍छे तरीके से बाहर निकलने में मदद करेगी।

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5. आंतरिक शांति के लिए आभार

 

जीवन का अंतिम उद्देश्य स्वयं लिए आंतरिक शांति प्राप्त करना है। जब हम इस सबसे महंगे खजाने की तलाश करते हैं जिसे आंतरिक शांति के रूप में जाना जाता है, तो सुनिश्चित करें कि इस समय पृथ्वी पर इस समय का उपयोग करने के तरीके से अवगत हैं। योग, मेडिटेशन, माइंडफुलनेस और इसी तरह के अन्य अभ्यास इसे प्राप्त करने के विभिन्न तरीके हैं।

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इन आसान स्‍टेप्‍स का इस्‍तेमाल जीवन की गुणवत्ता को निर्धारित करेगा। ये जटिल अभ्यास नहीं हैं और सुविधानुसार दिन के किसी भी हिस्से के दौरान योजना बनाई जा सकती है। स्वयं की भलाई की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ इन तकनीकों को लागू करें।

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