हमारी लाइफस्टाइल कुछ ऐसी हो चुकी है कि अगर हम वर्कआउट करें तो आधी से ज्यादा समस्याएं कम हो जाएंगी, लेकिन हम व्यस्त जीवन के चलते ये कर नहीं पा रहे हैं। यकीनन सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि हम समय की कमी और तकनीक को इसका दोषी ठहरा देते हैं, लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए। अगर आप चाहें तो अभी भी एक्टिव बन सकते हैं। पर हम ये काम करते नहीं हैं। ऐसे में अगर हम कोई दवा खाएं या अपने वजन को केमिकल और फॉर्मा ट्रीटमेंट्स से कम करने की कोशिश करें तो ये ना तो नेचुरल होते हैं और ना ही ये सेहत और बजट के लिए अच्छे। 

पर क्या कोई नेचुरल फैट बर्नर भी होते हैं? ये जानने के लिए हमने हेल्थ एक्सपर्ट और नेचुरल ब्रांड जीरोपेथी के फाउंडर कामायनी नरेश से बात की। उनका कहना है कि मोटापे की समस्या किसी संक्रमण की तरह फैल रही है और ये टाइप 2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, न्यूरोलॉजी से संबंधित समस्याएं, कोलेस्ट्रॉल की परेशानी आदि भी हो सकती है। 

आप भले ही स्लिमिंग एड्स को देखकर कितना भी प्रभावित होते हों, लेकिन असल में आपकी सेहत बेहतर नेचुरल चीज़ों से होती हैं और एक्सरसाइज भी बहुत जरूरी होते हैं। ऐसे कई फैट बर्नर किचन में भी मौजूद होते हैं जो आपके शरीर में ईंधन का काम कर सकते हैं। 

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नोट: आपको ये ध्यान रखना होगा कि ये सिर्फ आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करेंगे। अगर कोई कहता है कि इससे बिल्कुल ही फैट बिना एक्सरसाइज के कम होगा तो वो गलत है। 

मालाबार इमली (हाइड्रोक्सी सिट्रिक एसिड)

इसे गार्सिनिया कंबोगिया कहा जाता है और इसे बहुत ही ज्यादा अच्छा फैट बर्नर माना जाता है। ये एक आम फल है जिसे आप आसानी से बाज़ार से खरीद सकते हैं। इसमें हाइड्रोक्सी सिट्रिक एसिड(एचसीए) की बहुत मात्रा होती है जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करती है। कई रिसर्च भी ये कहती हैं कि ये चर्बी को पिघलाने में मदद कर सकती है।  

ग्रीन कॉफी बीन (क्लोरोजेनिक एसिड) 

जिस तरह ग्रीन टी सेहत को सही करने में मदद कर सकती है उसी तरह से ग्रीन कॉफी भी कर सकती है। इसे ऐसे समझिए कि जिस तरह ग्रीन टी डायबिटीज और ब्लड कोलेस्ट्रॉल से लेकर मेटाबॉलिज्म तक में मदद कर सकती है वैसे ही ग्रीन कॉफी भी करती है। इसमें कैफीन बहुत ज्यादा नहीं होता है और ये इंसुलिन स्पाइक्स को भी रोक सकती है। इसमें क्लोरोजेनिक एसिड होता है जो आपको फैट कम करने में मदद करता है। हालांकि, ये इतनी प्रचलित नहीं है, लेकिन ये भारत में उपलब्ध होती है और इसे आप सुपरमार्केट से या ऑनलाइन खरीद सकते हैं।  

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प्राकृतिक कैक्टस (कारलुमा फ़िम्ब्रिएटा) 

कुछ ऐसे कैक्टस भी होते हैं जिन्हें आहार के रूप में लिया जाता है। हालांकि, इसे अधिकतर एक्सपर्ट की सलाह पर ही लिया जाता है और कई कंपनियां इनका इस्तेमाल दवाओं में करती हैं, लेकिन इनमें मौजूद कंपाउंड्स फैट के जमने को रोक सकते हैं। पर ध्यान रहे कि हर कैक्टस के साथ ऐसा नहीं होता और बिना एक्सपर्ट की सलाह के आपको ये नहीं लेना चाहिए।  

काली मिर्च (पाइपरिन) 

काली मिर्च आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ा सकती है इसे लेकर कई रिसर्च भी हो चुकी हैं। इसमें मौजूद प्रमुख कंपाउंड पाइपरिन लिपिड लेवल को कम करने में मदद कर सकता है। ये कैलोरी को भी बर्न कर सकती हैं और अगर डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं तो उसमें भी काली मिर्च लाभकारी है। खाने को जल्दी पचाकर ये मेटाबॉलिज्म को बेहतर कर सकती है।  

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प्रोटीन सोर्स (सोया, होल ग्रेन फूड्स, मटर) 

अगर आप अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा सही रखेंगे तो आपको भूख कम लगेगी और साथ ही साथ आपकी परेशानी भी कम होगी। अगर आपका पेट फुल रहेगा तो बार-बार भूख नहीं लगेगी। दूध, होल ग्रेन, फूड्स, मटर आदि इस काम में आपकी मदद कर सकते हैं। अगर अमीनो एसिड कम हो रहा है तो भी प्रोटीन के सोर्स से आपकी ये समस्या पूरी हो जाएगी। प्रोटीन के नेचुरल सोर्स कम कैलोरी के साथ आपकी परेशानी को दूर करता है।  

पर अभी भी ये ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग लोगों की हेल्थ कंडीशन के हिसाब से उनकी डाइट की जरूरत भी बदलती है। ऐसे में अगर आपको फैट बर्न होने को लेकर चिंता हो रही है तो एक बार डॉक्टर से जरूर बात करें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।