अगर आप योग की शुरुआत कर रहे हैं और योग की पहली क्लास अटेंड करने जा रहे हैं तो आपको लोगों को योग करने में ब्रिक का अवलंब लेते हुए देखकर हैरत हो सकती है। आप यह भी आश्चर्य जता सकते हैं कि योग करने में एक ईंट कैसे मददगार बन सकती है। अब समझ में आया मलाइका अरोड़ा कैसे इतना फिट रहती हैं क्योंकि वह ब्रिक योग करती हैं और अपने फैंस के लिए ब्रिक योग करते हुए फोटोज और वीडियो अपने इंस्‍टाग्राम पर  पोस्ट करती रहती हैं। वह सर्व योग स्टूडियो (योग, माइंडफुलनेस और बियॉन्ड) में फिटनेस की प्रैक्टिस करती हैं, जिसके फाउंडर और सीईओ, सर्वेश शशि ने हर जिंदगी को बताया, ब्रिक योग क्या है और यह हमारे लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है।

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खैर, यह समझने का यह सही समय हो सकता है कि योगसाधक योग करने के लिए ईंटों का इस्तेमाल क्यों करते हैं। ईंटें/ब्लॉक्स जैसे अवलम्ब आपके दैनिक योगाभ्यास में मददगार बन सकती है, भले ही आपके योग की स्टाइल कुछ भी क्यों न हो। ये अवलम्ब केवल योगाभ्यास की शुरुआत करने के ही काम नहीं आते, बल्कि इनसे पुराने योगसाधकों को भी शारीरिक मुद्राओं के अलग-अलग आयाम अपनाने और स्थिरता प्राप्त करने में मदद मिलती है। आमतौर पर योग करने में ईंटों जैसे अवलंब की मदद लेने से आप मुश्किल योगासन भी काफी आसान और संतोषजनक तरीके से कर लेते हैं। इससे किसी भी व्यक्ति को अपने शारीरिक ढांचे, मांसपेशियों की बनावट को सही ढंग से समझने में मदद तो मिलती ही है, सहनशक्ति, ताकत, संतुलन और लचीलापन भी बढ़ता है। यहां तक कि योग की कई वर्षों से साधना कर रहे योग गुरुओं ने बेहतर तरीके से योगासन करने और शानदार तरीके से शरीर और मन को शांत करने के लिए ईंटों के उपयोग को योगाभ्यास में आवश्यक माना है। ईंटों की साधारण सी बनावट योग साधकों को विभिन्न आसन लगाने के  कई तरीके विकसित करने में मदद देगी।

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ईंटों का सहारा लेकर योगाभ्यास करना आपके लिए आश्चर्यजनक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन इससे आपको मुश्किल योगासनों में शरीर का संतुलन स्थिर करने में मदद मिलेगी। अगर आपको जमीन पर बहुत ज्यादा देर तक बैठने में दिक्कत महसूस होती रही है या अपनी बाजुओं की ताकत से शरीर को संतुलित नहीं कर पाते है, सामने की ओर सर झुकाने में कठिनाई होती है, तो आपको ब्रिक योगा अपनाना चाहिए। यहां ईंटों के सहारे योगाभ्यास में सुधार के लिए कुछ मनपसंद मुद्राएं दी जा रही है। 

1. अधोमुख श्वानासन

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अधोमुख श्वानासन से आपके शरीर में एक साथ ऊपरी और निचले हिस्से में नई एनर्जी का संचार करने वाला खिंचाव या लचीलापन उत्पन्न होता है। आसान आपको शरीर को पलटने, पीछे और आगे की ओर झुकने में मदद करता है।  इस आसन को करने के लिए दोनों हाथों को आगे की ओर रखते हुए जमीन की ओर झुक जाएं और अपने शरीर में ज्यादा से ज्यादा स्‍ट्रेच पैदा करें, जिससे आपकी रीढ़ की हड्डी को लंबी और लचीली होने में मदद मिलेगी। अगर आप इस अपने हाथों के नीचे ईंटों का सहारा लेते हैं तो यह आपको आगे की ओर फिसलने से रोकने में मदद करेगी। एक बार पूर्ण रूप से आसन की मुद्रा में आने पर अपनी भुजाओं के आगे के हिस्से को जमीन से दूर ले जाने की कोशिश करें। इससे आपको कंधों को स्थिर रहने में मदद मिलेगी।

2. उत्थित त्रिकोणासन

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यह आसन आपके घुटनों के पीछे की नसों, थाई, पिंडलियों, चेस्‍ट, कंधों और रीढ़ को मजबूत बनाता है। इस आसन को करने में शुरुआत में कुछ लोगों को जमीन तक अपना हाथ पहुंचाने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है, इसलिए आसन में स्थिरता लाने के लिए अपने हाथ के नीचे एक ईंट रखी जा सकती है।

3. पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन से रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में मदद मिलती है। इससे कंधों और घुटनों के पीछे की नसों में भी खिंचाव आता है। लगातार बैठे रहने से आपके कूल्हों में जड़ता आ जाती है और इससे आप अपने पैरों की उंगलियों को नहीं छू पाते। इसके लिए अपनी दोनों टांगों के बीच ईंट का अतिरिक्त सहारा लीजिए। इससे आप आराम से रीढ़ की हड्डी में स्‍ट्रेच ला सकेंगे। 

4. बालासन

बाल मुद्रा में शांतिपूर्वक आराम के लिए ईंट एक माकूल तकिये का काम करेगी। सहज स्थिति में बैठ जाएँ, ईंट/ब्लाक को मैट के बीच में रखें। अब दोनों पैर के अंगूठों को एक साथ छूएं, एड़ियों के सहारे बैठ जाएं और अपना सिर ब्लाक पर रखें। इस आसन से आपके कन्धों और रीढ़ से तनाव समाप्त होगा।

5. वीरासन

यह मुद्रा ध्यान की सबसे प्रचलित स्थिति है, जिससे थाई में स्‍ट्रेच उत्पन्न होता है। इस आसन को ज्यादा सुविधाजनक ढंग से करने के लिए अपनी सिट बोन्स के नीचे रखकर उस पर इस प्रकार बैठें जिससे कि आपके हिप्‍स थोड़ा आगे की ओर झुके रहे। इस मुद्रा से आपकी रीढ़ में स्‍ट्रेच कम होगा।

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6. मालासन या गार्लेंड पोज

मालासन सबसे आसान, फिर भी कठिन योगासनों में से एक है। शरीर के निचले भाग में जड़ता हो तो यह आसन करना लगभग असंभव हो जाता है। अपनी बैठने में सहायक हड्डियों या हिप के नीचे ईंट रख लें। इससे अतिरिक्त सहारा मिलेगा जिससे थाई एवं पीठ का निचला हिस्सा अधिक फैलते हैं। 

ब्रिक योग एक बहुमुखी विधा है, जिसका आनंद इसके वास्तविक फायदों को समझ कह ही उठाया जा सकता है। यह नए ट्रेंड्स को जानने और अपनाने करा युग है इसलिए योगासन के लिए भी नई-नई योगा स्टाइल अपनाएं।