साड़ी सबसे पुराने कपड़ों में से एक है और अब 5000 से अधिक वर्षों से अस्तित्व में है। खासतौर से भारत में तो महिलाएं इसे पहनना काफी पसंद करती हैं। केजुअल्स से लेकर पार्टी तक में एक एलीगेंट और ग्रेसफुल लुक पाने के लिए महिलाएं साड़ी को प्राथमिकता देती हैं। हालांकि, समय के साथ इस कपड़ों की ड्रेपिंग स्टाइल कई मायनों में बदल गई है। आधुनिक समय में साड़ी सभी फैशन लवर्स के लिए एक्सपेरिमेंट करने के लिए एक बेहतरीन पीस है। हो सकता है कि आपने भी इसे कई बार अलग-अलग तरीकों से ड्रेप किया हो। लेकिन लंबे समय से साड़ी पहनने या फिर अपने घर में महिलाओं को साड़ी पहनते हुए देखने के बाद भी आप इससे जुड़े कई पहलुओं से अनजान हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको साड़ी से जुड़े कुछ मजेदार फैक्ट्स के बारे में बता रहे हैं, जो यकीनन आपको भी काफी पसंद आएंगे-

ब्लाउज और पेटीकोट के बिना ही पहनी जाती थी साड़ी

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आज के समय में साड़ी शानदार दिखने वाले ब्लाउज के बिना अधूरी है। ब्लाउज साड़ी के लुक को और भी खूबसूरत बना देता है। साड़ी लवर्स का मानना है कि आप अपनी साड़ी के साथ जो ब्लाउज पहनते हैं, वह साड़ी के लुक में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। खूबसूरत दिखने के लिए रंगों और डिजाइनों का सही तालमेल होना जरूरी है। लेकिन क्या आपको पता है कि प्रारंभ में, साड़ियों को एक बिना सिले कपड़े से बनाया जाता था जिसमें हैवी डेंसिटी बॉर्डर व पल्लू होते थे। यह भी कहा जाता है कि साड़ी मूल रूप से बिना ब्लाउज और पेटीकोट के पहनी जाती थी। हालाँकि, इसे विक्टोरियन युग के दौरान अनुचित के रूप में देखा गया था जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश राज के दौरान ब्लाउज और पेटीकोट की शुरुआत हुई थी।

ऐसे मिला साड़ी नाम

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यह शब्द प्राकृत शब्द सादी से निकला है, जो स्वयं संस्कृत शब्द सती से बना है, जिसका अर्थ है कपड़े की एक पट्टी। जिसके बाद इसे साड़ी कहा जाने लगा। आज यह इस परिधान को पुकारने या कॉल करने का सबसे आम तरीका है।

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बहुत पुराना है साड़ी का इतिहास

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कई स्रोत बताते हैं कि साड़ियाँ 5,000 साल पुरानी हैं। कुछ साड़ी जैसे कास्टयूम को 100 ईसा पूर्व की मूर्तियों पर देखा गया है। यहां तक कि पुरानी पेंटिंग और म्यूरल्स में भी महिलाएं इस पारंपरिक टुकड़े को पहने हुए दिखाई दीं। इस तरह यह कहा जा सकता है कि साड़ी का इतिहास बहुत पुराना है। (रेखा की तरह कांजीवरम सिल्‍क साड़ी को दें 'पैंट साड़ी लुक')

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साड़ी की लंबाई स्टाइल पर निर्भर करती है

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मार्केट में मिलने वाली सभी साड़ियों की लंबाई एकसमान नहीं होती है। एक साड़ी की लंबाई 3.5 से 9 गज तक हो सकती है। कुछ ड्रेपिंग स्टाइल के लिए लंबी साड़ियों की आवश्यकता होती है जबकि अन्य को छोटी की आवश्यकता होती है। ऐसे में साड़ी की लंबाई को चेक करते समय पहले आप ड्रेपिंग स्टाइल पर फोकस करें।

साड़ी 11 मिलियन भारतीय हैंडलूम बुनकरों को करती है सपोर्ट

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साड़ी की बुनाई भारत में हथकरघा और कढ़ाई उद्योग में सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है और इसके परिणामस्वरूप लाखों बुनकरों को इसके माध्यम से काम मिलता है। अब जरा सोचिए कि अगर भारत में साड़ी प्रचलित नहीं होती तो क्या होता।

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सेफ्टी पिन की जरूरत नहीं

आमतौर पर जब भी हम साड़ी पहनती हैं तो उसके साथ सेफ्टी पिन जरूर लगाती हैं। हमें ऐसा लगता है कि यह निकल जाएगी। हालांकि, उन्हें पिन की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती है। हम अपने मेंटल सेटिसफेक्शन और कंफर्ट के लिए ही सेफ्टी पिन लगाते हैं। (डिजाइनर ब्‍लाउज को फ्लॉन्‍ट करने के लिए इस तरह ड्रेप करें साड़ी)

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