रुजुता दिवेकर एक सेलिब्रिटी डाइटिशियन हैं जो आलिया भट्‌ट, वरुण धवन, अनिल अंबानी और करीना कपूर जैसे सेलेब्स को फिट रहने के लिए गाइड करती हैं। लेकिन वह सेलेब्‍स के साथ-साथ अपने फैन्‍स को भी फिट रहने के लिए इंस्‍पायर करती हैं और इंस्‍टाग्राम के माध्‍यम से फिट रहने के टिप्‍स फोटोज और वीडियोज के माध्‍यम से शेयर करती रहती हैं। हाल ही में उन्‍होंने अपने इंस्‍टाग्राम पर एक हरी पत्तेदार सब्‍जी की फोटो शेयर की है और साथ ही कैप्‍शन में इसके फायदों के बारे में भी बताया है। इस सब्‍जी की सबसे अच्‍छी बात यह है कि इसे आप मानसून में भी खा सकती हैं। शायद इस सब्‍जी के बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। इसलिए हम आपको इसके बारे में बता रहे हैं।   

रुजुता दिवेकर ने फोटो शेयर करते हुए कैप्‍शन में लिखा है, ''अगर आप भारत में रहते हैं या भारतीय जड़ों से जुड़े हैं तो मानसून के दौरान आपकी दादी मां ने आपको हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से सावधान किया होगा। आयुर्वेद हमें यह भी सिखाता है कि मौसम के अनुसार भोजन करना चाहिए। ऐसी चीजों को खाने से बचना चाहिए जो किसी के व्यक्तिगत संविधान या यहां तक कि ब्रह्मांड को परेशान करे। यह इस विश्वास पर आधारित है कि पिंडा (व्यक्ति) के लिए जो हानिकारक है वह ब्रह्माण्ड (संपूर्ण सृष्टि) को भी हानि पहुंचाता है।'' 

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Ambadi – the stomach soother. If you have lived in India or have Indian roots you may have heard your grandmother caution against eating green, leafy vegetables during the monsoon. Ayurveda, also teaches us that eating should be tweaked according to the season. And that one should not eat what will disturb one’s personal constitution or even the universe at large. It is based on the belief that what is harmful to the pinda (person) also harms the brahmanda (the entire creation). During the rains, green, leafy veggies are a breeding ground for micro-organisms, making not just them but even the meat of the livestock that feeds on them unsafe for human consumption. The exception to this rule are a few local greens, the queen of which is Ambadi. The green-leaved, red-stemmed ambadi belongs to the hibiscus family of plants, taller than the other greens and more acidic (which is why it is not affected by the micro-organisms during monsoons). It’s a wild and uncultivated vegetable, eaten all over the country and known by many different names. Ambadi is its Marathi name; in Telugu it is called gongura and famously turned into a delicious pickle; in English it is known as the roselle plant. Whatever its name, it is one of our most extraordinary plants. Ambadi is the tribal woman’s source of folic acid and iron. Easy to cook and digest, it is also without the side effects of constipation that come with an iron pill. Most important, it is high in slowly digestible starch, making it an excellent vegetable to sustain and nurture the gut ecosystem. The rains come with their share of stomach infections and this invariably leads to loss of good bacteria from the system. Now how wonderful is the traditional food system which encourages diversity even in the greens you eat? P. S. Always eaten with roti/bhakri made of makai, jowar, ragi, etc, and these food combos make for low glycemic index meals. Check out the recipe of Ambadi sabzi on my mother's instagram page here - @rekhadiwekar Extract from my book #IndianSuperfoods

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आगे लिखा है, ''बारिश के दौरान हरे पत्तेदार सब्जियां सूक्ष्म जीवों के लिए एक प्रजनन भूमि होती हैं जो न केवल उन्हें बनाती हैं, बल्कि पशुओं का मीट भी मानव उपभोग के लिए असुरक्षित होता है। इस नियम के अपवाद कुछ स्थानीय साग हैं जिनमें से एक अम्‍बाडी है।''

क्‍या है अम्‍बाडी

''हरे पत्ते और लाल तने वाली अम्बाडी हिबिस्कस परिवार के पौधों से संबंधित है, अन्य सागों की तुलना में यह लंबा और अधिक एसिडिक होता है। यही कारण है कि यह मानसून के दौरान सूक्ष्म जीवों से प्रभावित नहीं होता है। यह एक जंगली और अनसुनी सब्जी है, जिसे पूरे देश में खाया जाता है और कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है। अम्‍बाडी इसका मराठी नाम है; तेलुगु में इसे गोंगुरा कहा जाता है और इसका टेस्‍टी अचार बनता है, अंग्रेजी में इसे रोसेल प्लांट के रूप में जाना जाता है। इसका नाम जो भी हो, यह हमारे सबसे असाधारण पौधों में से एक है।''

अम्‍बाडी के फायदे

रुजुता ने आगे लिखा, ''अम्‍बाडी आदिवासी महिलाओं के फोलिक एसिड और आयरन का स्रोत है। इसे बनाना और पचाना आसान है, यह कब्ज के साइड इफेक्‍ट के बिना ही आयरन की गोली से भी ज्‍यादा असरदार होता है। यह धीरे-धीरे पचने वाले स्टार्च से भरपूर होता है, जिससे यह पेट के इकोसिस्‍टम को बनाए रखने और पोषण देने वाली एक उत्कृष्ट सब्जी है। बारिश में पेट में संक्रमण की समस्‍या बहुत ज्‍यादा होती है और इस प्रणाली से अच्छे बैक्टीरिया का नुकसान होता है लेकिन यह पेट के लिए बहुत अच्‍छा होता है। हमेशा इसे मकाई, ज्वार, रागी, आदि से बनी रोटी / भाकरी के साथ खाया जाता है और ये फूड कॉम्ब्स कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स भोजन के लिए बनाते हैं।''

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महिला की हेल्‍थ के लिए होता है अच्‍छा

अम्बाडी फोलिक एसिड और आयरन का बहुत अच्छा स्रोत है। जैसा कि रुजुता हमें बता ही चुकी हैं कि यह दवाओं के कब्ज वाले साइड इफेक्‍ट के बिना महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करता है। इसके अलावा यह विटामिन सी का अच्छा स्रोत है। यह पीरियड्स के दौरान दर्द को कम करता है और हैवी ब्‍लीडिंग को भी रोकता है। रेगुलर पीरियड्स के दौरान चाय के रूप में इसका सेवन करें।

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हड्डी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

अध्ययनों के अनुसार, अम्‍बाडी के पत्ते आपकी हड्डियों को मजबूत रखने का एक शानदार तरीका है। इस मिनरल युक्त पौधे में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं जो मजबूत और हेल्‍दी हड्डियों को बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। इन मिनरल्‍स से समृद्ध आहार हड्डियों की हानि और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों को रोकने में मदद करता है।

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इम्‍यून सिस्‍टम को बूस्‍ट करें

इसमें मौजूद भरपूर मात्रा में विटामिन सी को एस्कॉर्बिक एसिड के रूप में जाना जाता है। इम्‍यून सिस्‍टम को बढ़ाने और शरीर में वाइट ब्‍लड सेल्‍स की संख्या बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। यह भी एक कारण है कि मानसून के दौरान भी अम्बाडी / गोंगुरा का व्यापक रूप से सेवन किया जाता है।

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पेट के लिए फायदेमंद

अपने आहार में थोड़ी विविधता लाने के लिए इस स्वदेशी अम्बाडी को शामिल करें। आदिवासी इम्‍यूनिटी में सुधार करने, आंत के स्वास्थ्य को मजबूत करने और दस्त को रोकने के लिए अम्बाडी का उपयोग करते हैं। इसका खट्टा स्वाद, स्वाद को बढ़ा देता है और भूख भी बढ़ा देता है।

पूरे साल मेघालय से तमिलनाडु तक यह पत्तियां खाई जाती हैं। यह मानसून में खाई जाने वाली एकमात्र हरी पत्तेदार सब्जी है। इसे आपके दैनिक करी, दाल और अचार में आसानी से शामिल किया जा सकता है। इसका विशिष्ट खट्टा स्वाद है। मिनरल और विटामिन के अच्छे स्रोत के रूप में यह न केवल एक स्वादिष्ट भोजन विकल्प है बल्कि हेल्‍दी भी है।

आप इसे अपनी डाइट में शामिल करके खुद को फिट रख सकती हैं। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।