किसी भी लड़की का शरीर उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर बदलता है। जब लड़की यौवनावस्था की दहलीज पर कदम रखती है तो उसके पीरियड्स आने शुरू हो जाते हैं। यह इस बात का भी संकेत है कि अब लड़की में गर्भधारण करने की क्षमता विकसित हो गई है। हालांकि, हर लड़की के पीरियड्स शुरू होने का समय अलग हो सकता है। मसलन, किसी लड़की के पीरियड्स महज दस साल की उम्र में ही शुरू हो सकते हैं तो किसी के 15 साल की उम्र में। लेकिन पहला पीरियड यकीनन काफी परेशानी भरा हो सकता है। 

जब लड़कियों के पीरियड्स शुरू होते हैं तो उन्हें हैवी ब्लीडिंग से लेकर उल्टी व चक्कर आना, तेज दर्द होना व अन्य कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। हो सकता है कि आपकी लाडली के भी पीरियड्स शुरू हो गए हों और उन दिनों में वह बेहद ही असहज महसूस कर रही हो। ऐसे में आप उसके खानपान पर ध्यान देकर उसकी समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं। तो चलिए आज वुमन हेल्थ रिसर्च फाउंडेशन की प्रेसिडेंट डॉ नेहा वशिष्ट आपको बता रही हैं कि लाडली के पीरियड्स शुरू होने पर उसे खाने में क्या देना चाहिए और क्या नहीं-

दें सात्विक आहार 

आहार को आमतौर पर तीन तरह से बांटा जाता है- राजसिक, सात्विक व तामसिक आहार। पहली बार लड़की के पीरियड्स होने पर उसे सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए। यह ना केवल लाडली को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है, बल्कि इससे उसे मानसिक, भावनात्मक व आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। जिससे पीरियड्स में होने वाली कई तरह की समस्याएं तो खुद ब खुद ही कम हो जाती हैं।

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हरी पत्तेदार सब्जियां

पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका है कि बेटी के डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों की मात्रा को बढ़ा दिया जाए। इसमें कई तरह के विटामिन व मिनरल्स तो होते ही हैं, साथ ही इसमें फोलिक एसिड भी होता है, जो इस दौरान लड़की के लिए बेहद आवश्यक है। इससे उसे आने वाले साइकल में पीरियड्स से संबंधित समस्याएं नहीं होगी। साथ ही ब्लड फ्लो भी सही होगा और पीरियड्स में होने वाली दुर्गंध की समस्या से भी निजात मिलेगी।

अगर खाए दाल

अगर आप अपनी लाडली को दाल दे रही हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि आप उसे उड़द की दाल ना दें। इससे उससे बादी व गैस की समस्या हो सकती है। ऐसे में उसे पीरियड्स में दर्द व बैचेनी की समस्या बढ़ सकती है। बेहतर होगा कि इस दौरान आप उसे मूंग की दाल ही खाने के लिए दें। दरअसल, इस दौरान बच्चियों का पाचन तंत्र काफी धीमा हो जाता है और उन्हें कभी-कभी उन्हें अपच की समस्या भी हो जाती है। ऐसे में मूंग की दाल जो बेहद ही हल्की व सुपाच्य होती है, इसका सेवन करने से उनका स्वास्थ्य ठीक रहता है।

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दें यह फल-सब्जियां

चूंकि इस दौरान शरीर से ब्लड काफी अधिक निकलता है, इसलिए लड़की के अनीमिक होने या खून की कमी होने की संभावना काफी अधिक होती है। इसलिए, आप उन्हें अनार का जूस पीने दें। इसके अलावा, आप उन्हें गाजर, चुकंदर, टमाटर आदि भी खाने के लिए दें। आप चाहें तो अनार, चुकंदर और गाजर को ग्राइंड करके बच्ची को पीने के लिए दें। ध्यान दें कि आप इसके Roughage को फेंके नहीं, बल्कि उसे चम्मच से धीरे-धीरे खिलाएं।

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इन चीजों से करें परहेज 

अगर आप चाहती हैं कि पीरियड्स के दौरान लाडली को किसी तरह की समस्या ना हो तो ऐसे में आपको कुछ खाद्य पदार्थों से दूर ही रखें।

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सबसे पहले तो आप लाडली को तला हुआ, बहुत अधिक हैवी व मिर्च मसाले का आहार ना दे। चूंकि इस दौरान पाचन तंत्र उतना बेहतर तरीके से काम नहीं करता तो ऐसे में इन चीजों का सेवन उसके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

इसके अलावा, उन्हें छोले, राजमा, उड़द की दाल, मोटे अनाज आदि भी ना दें। मोटे अनाज को डाइजेस्ट होने में अधिक समय लगता है। इतना ही नहीं, ऐसा भी हो सकता है कि इन चीजों के सेवन से बिटिया को पेट में दर्द की शिकायत भी शुरू हो जाए। 

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