आसमान में जहां देखो, दूर-दूर तक रंग-बिरंगी भांति-भांति की पतंगे ही नजर आ रही हैं। ना कोई बंधन, ना रोक-टोक, ये पतंगे हर सीमा को लांघते हुए आकाश में उड़ रही हैं और इन्हें उड़ाने वालों के चेहरों पर भी मुस्कान बिखरी हुई है। ये नजारा है जयपुर में हर साल मकर संक्रांति पर शुरू होने वाले इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल का। आज के दिन यहां सुबह से ही बच्चों से लेकर घर के बड़े सदस्यों तक हर कोई छत पर इकट्ठा हैं और सबमें आज पतंग सबसे ऊंची उड़ाने की होड़ लगी है। इस मौके पर अलग-अलग डिजाइन वाली पतंगों से आसमान भरा हुआ नजर आ रहा है। 

international kite festival jaipur people excited for kite flying on makar sankranti inside

14-16 जनवरी तक चलता है इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल

जयपुर में मकर संक्रांति पर पतंगोत्सव यानी इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 14 से 16 जनवरी तक मनाया जाता है, जिसकी कल से शुरुआत हो गई। राजस्थान के पर्यटन विभाग की तरफ से आयोजित होने वाले इस उत्सव का हिस्सा बनने दूर-दूर से यहां सैलानी आते हैं। इस दौरान आयोजित पतंगबाजी प्रतियोगिता में जाने-माने पतंगबाज भी हिस्सा लेते हैं। पतंगोत्सव पोलो ग्राउंड में सेलिब्रेट किया जाता है।

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इस मौके पर 14 जनवरी की रात में अलग ही तरह का नजारा दिखाई दिया था। रोशनी से जगमगाते दिए आसमान की तरफ छोड़े गए। इनसे ऐसा आभास हो रहा था कि पूरा आसमान दियों की रोशनी से सराबोर हो गया हो। साफ है कि जयपुर में मकर संक्रांति के साथ सूर्य नारायण के उत्तरायण होने की खुशी हर्षो-उल्लास के साथ मनाई जा रही है।

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ऐसा लूटा गया पतंगबाजी का मजा 

शहर में सुबह से ही पतंगबाजी का उल्लास दिखाई देने लगा था। पतंगबाजी के लिए छतों पर यंगस्टर्स की टोलियां दिखाई देने लगीं। इस मौके पर पुरुषों के साथ बच्चों और महिलाओं ने भी पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। शहर के प्रमुख बाजारों सहित परकोटे और गलियों में देर रात तक पतंग-मांझा खरीदने वालों की रौनक देखते ही बन रही थी। शहर के मशहूर बाजार हांडीपुरा, हल्दियों का रास्ता, अजमेरी गेट, चांदपोल बाजार, पुरानी बस्ती और संजय बाजार में पतंगों की खरीदारी अपने चरम पर रही। 

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शाम 7.50 तक रहेगा पुण्यकाल

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इस मौके पर जयपुर के साथ पुष्कर में भी विदेश मेहमानों ने पतंगबाजी की। जयपुर पतंगबाजी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेमस है है। ज्योतिष गणना के मुताबिक सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को शाम 7:50 बजे होने की वजह से पुण्यकाल मंगलवार को सुबह से शाम तक बना रहेगा। मकर संक्रांति का दिन इतना शुभ माना जाता है कि इस दिन से सभी शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं। यही वजह है कि आज के दिन कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।  

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संक्रांति पर पतंगबाजी का चलन क्यों

पंडित भानु प्रताप नारायण मिश्र ने मकर संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने के महत्व के बारे में बताया, 'मकर संक्रांति के दिन सूर्य नारायण उत्तरायण हो जाते हैं। भीषण सर्दी से लोगों को जो सर्दी-जुकाम और कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, वे सूर्य नारायण के दिखने से खत्म होने लगती हैं। जब पतंग उड़ाते हुए शरीर पर धूप लगती है तो उससे शरीर में ऊष्मा आ जाती है और हर तरह के संक्रमण से शरीर को छुटकारा मिल जाता है। इसीलिए आज के दिन पतंगबाजी का विशेष महत्व है। साथ ही आज दान-पुण्य करने का महाफल मिलता है। इस दिन सूत यानी धागे के दान को भी शुभ माना जाता है।'

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