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पुरी गलियों से देश के चप्पे-चप्पे तक जा पहुंचा खाजा, जानें इसके बनने की कहानी

पुरी की गलियों से निकला खाजा आज दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे कैसे बनाया गया था क्या आप जानना चाहते हैं?
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Published -21 Aug 2022, 13:00 ISTUpdated -18 Aug 2022, 14:18 IST
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history and origin of khaja

खाजा एक ऐसी मिठाई है जिसे यूपी, बिहार में बहुत पसंद किया जाता है। यह एक पारंपरिक मिठाई है जिसे खासतौर से त्योहार पर बनाया जाता है। लेकिन अगर आप कभी पुरी गए हों तो आपने देखा होगा कि वहां कई इलाकों में साइकिल पर सवार कुछ लोग खाजा बेचते हैं। पुरी में दो चीजें बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं एक भगवान जगन्नाथ और दूसरा लोकप्रिय मिठाई खाजा। इस मिठाई की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए इसे प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। यह महाप्रसाद के रूप में तीनों भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुवाद्र को भोग लगता है। इस शहर में भगवान और उनकी पसंदीदा मिठाई दोनों पूजनीय हैं।

लेकिन पुरी में यह खाजा आखिर कैसे लोकप्रिय हुआ? किसने पहली बार इसे बनाने के बारे में सोचा और किस तरह यह पुरी ही नहीं बल्कि नॉर्थ इंडिया में भी इतना लोकप्रिय हो गया?

क्या आपने कभी सोचा है कि इस मिठाई का नाम खाजा कैसे पड़ा? अगर आप भी खाजा के दिलचस्प इतिहास के बारे में जानना चाहें तो आपको यह आर्टिकल पूरा जरूर पढ़ना चाहिए। आज हम आपको इसके इतिहास की चर्चित कहानी के बारे में बताते हैं। 

क्या पुरी में बनाया गया था खाजा?

history of traditional sweet khaja

ओडिशा के अन्य शहरों को छोड़ दें तो अकेले पुरी में इन परतों वाली, परतदार मिठाइयों की बिक्री करने वाली हजारों नहीं तो सैकड़ों हैं। यह भगवान जगन्नाथ मंदिर के सामने ग्रैंड रोड या बड़ा डंडा से लेकर प्रसिद्ध स्वर्गद्वार के पास की भीड़-भाड़ वाली दुकानों या समुद्र तट के किनारे की छोटी दुकानों या रेलवे स्टेशन के बाहर भी हर जगह पाया जा सकता है। बेशक, गुणवत्ता स्वाद, बनावट और कीमत में भिन्न होती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि खाजा उड़िया इतिहास और संस्कृति का अभिन्न अंग है। हालांकि, यह बात नहीं कही जा सकती है कि पुरी ही वो शहर है जहां खाजा जैसी मिठाई की उत्पत्ति हुई। फिर सवाल है कि आखिर यह आया कहां से?

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कैसे हुई खाजा की उत्पत्ति?

who invented khaja sweet

खाजा जैसी पारंपरिक मिठाई के पीछे दो अलग कहानियां या कहिए दो अलग-अलग सिद्धांत हैं। एक सिद्धांत कहता है कि यह काकीनाडा, आंध्र प्रदेश से दो वैरायटी मदतखाजा और गोट्टमखाजा के रूप में पुरी पहुंचा।

दूसरा और जिसे ज्यादा माना जाता है वो सिद्धांत कहता है कि खाजा की जड़ें मौर्य वंश से जुड़े हैं और इसका मूल स्थान गंगा नदी के दक्षिण में है। वास्तव में, नालंदा के ऐतिहासिक शहर के पास सिलाओ नामक एक छोटा सा शहर खाजा के लिए बेहद प्रसिद्ध रहा।

ऐसा माना जाता है कि यह 2000 बीसी पुरानी मिठाई है और शायद यही कारण है कि  यहां बनाए गए खाजों के इस शहर को जीआई टैग भी मिला है। मिठाइयों का राजा कहे जाने वाला यह खाजा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि देश से बाहर भी प्रसिद्धी पा चुका है। पुरी की तरह यहां पाए जाने वाले खाज बाहर से सूखे और अंदर से चाशनी वाले होते हैं और इन्हें कई दिनों तक रखा जा सकता है (गुड़ का खाजा)। 

आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो ऋग्वेद और चाणक्य के अर्थशास्त्र में 'गेहूं की परतदार मिठाई' का भी उल्लेख मिलता है! ऐसा माना जाता है कि भगवान गौतम बुद्ध को भी खाजा बहुत पसंद था और वह उन्हें दूध में क्रश करके अपने साथ-साथ अपने पास अध्ययन करने वाले भिक्षुओं को भी देते थे। इसी तरह लंबी यात्रा के बाद शायद खाजा ने पुरी में अपने पैर जमा लिए और यहां की प्रसिद्ध मिठाई के रूप में चर्चित हुआ। 

आज कई वैरायटी में मिलता है खाजा

types of khaja sweet

समय के साथ, इस मिठाई को बनाने में कई प्रयोग किए गए और शायद उस दौर में बनाया गया खाजा कहीं खो गया। इतना कि मूल नुस्खा शायद खो गया है! आज नए जमाने में इसे मैदे के साथ बनाया जाता है। मैदा मिलाने से नमी बैठने में मदद मिलती है, अलग-अलग परतें बनती हैं और मीठी चाशनी समान रूप से फैलती है और यह मॉर्डन डे खाजा भी लोगों को उतना ही पसंद आता है। मूल खाजा नालंदा के सिलाओ से भले ही यहां आया हो, लेकिन कई वर्षों में स्थानीय रसोइयों द्वारा इन छोटे प्रयोगों ने खाजा को भगवान जगन्नाथ के छप्पन भोग या महाप्रसाद का अभिन्न अंग बना दिया।

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तो बताइए कैसी लगी आपको खाजा की यह दिलचस्प कहानी? आपको किस तरह खाजा ज्यादा पसंद है, हमें कमेंट कर जरूर बताइएगा। 

अगर आपके पास भी किसी पारंपरिक व्यंजन को लेकर ऐसी कोई कहानी हो तो हमारे साथ शेयर कीजिए। खाजा की आपकी फेवरेट कोई याद हो तो उसे भी कमेंट कर बताएं। अगर आपको यह कहानी पसंद आई तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें। ऐसे ही पकवानों के किस्से जानने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

Image Credit: google searches

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