आध्यात्मिकता किसी धर्म का पर्याय नहीं है। यह तो आत्मिक शांति प्राप्त करने का रास्ता है। व्यक्ति चाहे किसी भी रास्ते से जाए, लेकिन मंजिल सभी की एक ही होती है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हर कोई इस कदर उलझकर रह गया है कि उसके पास समय ही नहीं है कि वह खुद से परिचित हो सके या फिर अपने भीतर मौजूद क्षमताओं को पहचान सके और शायद यही कारण है कि सबकुछ पाने के बाद भी व्यक्ति के मन में एक अजीब सी निराशा रहती हैं। अगर आप भी जीवन की भागदौड़ से थक चुकी हैं और कुछ वक्त के लिए आत्मिक शांति चाहती हैं तो भारत में मौजूद इन आश्रम में जा सकती हैं।

भारत हमेशा आध्यात्मिक साधकों के साथ एक लोकप्रिय गंतव्य रहा है जो देश के कई आश्रमों में घूमते हैं। यहां पर मौजूद हर आश्रम की अपनी विशेषता है और यही कारण है कि सिर्फ साधक ही नहीं, आम लोग भी मानसिक शांति पाने के लिए यहां पर आते हैं। तो चलिए आज हम आपको भारत के कुछ लोकप्रिय आश्रमों के बारे में बता रहे हैं-

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आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम

ashrams if  you want  Peace inside

श्री श्री रविशंकर द्वारा 1982 में स्थापित, आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम पूरे विश्व में तनाव दूर करने और सेल्फ डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए जाना जाता है। यहां पर मुख्य रूप से ब्रीदिंग टेक्निक, मेडिटेशन व योगा पर अधिक जोर दिया जाता है। वैसे तो आर्ट ऑफ़ लिविंग के कई छोटे आश्रम पूरे देश में मौजूद है, लेकिन मुख्य रूप इसे यह आश्रम बैंगलोर के 36 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में उडिपल्या गांव के पास पंचगिरी पहाड़ियों में स्थित है।

ईशा फाउंडेशन

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तमिलनाडु के वेलियांगिरी पर्वत के बेस में मौजूद ईशा योग केन्द्र एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1992 में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने की थी। इसका उद्देश्य योग और बाहरी कार्यक्रमों जैसे पर्यावरणीय कायाकल्प के माध्यम से लोगों की आध्यात्मिक और फिजिकल वेलबींग को बढ़ावा देना है। यहां पर इनर इंजीनियरिंग के रूप में जाना जाने वाला 3-7 दिन का कार्यक्रम संचालित किया जाता है, जिसमें व्यक्ति मेडिटेशन से लेकर अपने भीतर मौजूद शक्तिशाली आंतरिक ऊर्जा को महसूस करता है।

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माता अमृतानंदमयी आश्रम

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केरल के कोल्लम में माता अमृतानंदमयी आश्रम है। यह त्रिवेंद्रम से 110 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। माता अमृतानंदमयी को सभी लोग अम्मा के नाम से भी जानते हैं। वह दुनिया में प्यार और करुणा की कमी को दूर करने के लिए अपना ध्यान केंद्रित करती हैं। अगर आपके मन में किसी तरह की उलझन है तो आप आश्रम में बुधवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को सुबह लगभग 10 बजे अम्मा से मिल सकती हैं और अपनी उलझन को दूर कर सकती हैं। वैसे यहां पर योग, मेडिटेशन व प्रणायाम आदि की प्रैक्टिस भी होती है।

श्री अरबिंदो आश्रम

श्री अरबिंदो आश्रम की स्थापना 1926 में श्री अरबिंदो व द मदर के नाम से जानी जाने वाली एक फ्रांसीसी महिला द्वारा की गई थी। श्री अरबिंदो आश्रम हजारों सदस्यों के साथ एक विविध समुदाय में विकसित हुआ है। यह आश्रम चेन्नई से 160 किलोमीटर दक्षिण में पांडिचेरी में स्थित है। यहां पर ग्रुप में मेडिटेशन का आयोजन किया जाता है। वैसे तो यहां पर कोई निर्धारित प्रैक्टिस व रिजुअल्स को फॉलो नहीं किया जाता, लेकिन मेडिटेशन करना यहां पर अनिवार्य है।