नवरात्रि का त्योहार देशभर में बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा है। कोरोना के बाद से अब चीजें नॉर्मल हुई हैं, तो सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए माता के पंडाल भी सजे हैं।हर शहर में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना में लोग व्यस्त हैं। वहीं, हर जगह अपनी तरह से अलग-अलग कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है।

आपको बता दें कि नवरात्रि में गुजरात में गरबा का खास महत्व है। गुजरात के साथ-साथ अब देश के बाकी शहरों में भी गरबा खेला जाता है। यह गरबा वैसे तो महिलाओं के लिए माना जाता है, लेकिन यह गुजरात के वडोदरा शहर में पुरुषों के बीच काफी लोकप्रिय है। जी हां, अभी कल ही एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वडोदरा के एक मंदिर में पुरुषों को गरबा खेलते देखा जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह सदियों पुरानी परंपरा है, जिसे एक बार फिर वडोदरा के पुरुषों ने जीवंत कर दिया है।

इस वीडियो के वायरल होते ही लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी हैं और इस वीडियो को पसंद किया जा रहा है। आइए हम भी जानें कि आखिर यह सदियों पुरानी परंपरा क्या है? 

अंबा माता मंदिर में पुरुषों ने खेला गरबा

 

एएनआई द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें गुजरात के वडोदरा में स्थित अंबा माता मंदिर में नवरात्रि काफी धूमधाम से मनाई जा रही है। देखा जा सकता है कि बड़ी संख्या में भक्त यहां मां का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। मां दुर्गा के भजन और आरती चल रही है। इस बीच पुरुषों को मंदिर प्रांगण में लाइन में लगकर गरबा खेलते देखा जा सकता है। एक तरफ जहां सभी पुरुष गरबा खेल रहे हैं, वहीं कुछ महिलाएं झरोखे में बैठे हुए गाने गा रही हैं। यह यहां की एक सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें पुरुष गरबा खेला करते हैं। (अगर डांडिया खेल रही हैं तो कुछ चीजों की तैयारी पहले से करें)

एएनआई से बातचीत में मंदिर के पुजारी दुर्गेश ने बताया कि पुराने समय में देर रात गरबा में महिलाओं के शामिल होने को सुरक्षित नहीं माना जाता था, इसलिए पुरुष इसे करने लगे। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि यहां महिलाओं के आने पर पाबंदी है। महिलाएं भी इसमें आ सकती हैं। उन्होंने आगे कहा, '400 साल पहले तक इस मंदिर में देर रात तक महिलाओं का गरबा खेलना सुरक्षित नहीं माना जाता था। तब पुरुष साड़ी और दुपट्टा लपेटकर महिलाओं की जगह गरबा खेलते थे और महिलाएं झरोखे से गाना गाती थीं।

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महिलाएं भी इसमें भाग ले सकती हैं, लेकिन इस सदियों पुरानी परंपरा को कायम रखने के लिए वे सीधे इसमें नहीं जुड़ती हैं, इसकी बजाय वे जश्न में शामिल होकर गाना-बजाना करती हैं।' पुजारी जी ने यह भी बताया कि पिछले साल पैनडेमिक की वजह से यह कार्यक्रम नहीं हो पाया था। तब बस गाने की ही अनुमति थी। हालांकि इस बार लोग आ रहे हैं और हम बेहद खुश हैं। हम लोगों को सरकार के नियम और मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कोविड प्रोटोकॉल्स को मानने के लिए कह रहे हैं।

श्री अंबा माता मंदिर के बारे में

shri amba mata mandir

घड़ियाली पोल के पास स्थित मांडवी गेट पर अंबा माता मंदिर है, जो मान्यताओं के अनुसार 2000 साल पुराना है। अंबा माता के अलावा, मंदिर में भगवान नारायण और देवी लक्ष्मी को भी पूजा जाता है। यह इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में खड़े होकर ही पूजा-अर्चना करते हैं। हर दिन देवी का वाहन बदला जाता है। मां की सवारी आमतौर पर शेर, बाघ, हाथी, नंदी, गरूड़ और हंस जैसे जानवरों की होती है। गुजरात के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां आते हैं और माना जाता है कि मंदिर में प्रार्थना करने से जीवन में खुशियां आती हैं।

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पुरुषों का हरसिद्धि गरबा  

harsiddhi garba by all men vadodara

यहां होने वाली यह प्रथा काफी लोकप्रिय है और इस गरबा को हरसिद्धि गरबा कहा जाता है, ये पूरी तरह से पुरुष श्रद्धालुओं को समर्पित है। इसे 400 सालों से सिर्फ पुरुष ही निभाते आ रहे हैं। मंदिर में लोगों की बड़ी आस्था है और पुरुषों के इस गरबे में बच्चे से लेकर बूढ़े तक सब हिस्सा लेते हैं।

अगर आप नवरात्रि में वडोदरा जाने का प्लान कर रहे हैं, तो इस अद्वितीय मंदिर के दर्शन जरूर करें और पुरुष इस गरबा में शामिल हो सकते हैं और महिलाओं झरोखे से गाने गा सकती हैं। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करें। ऐसे अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

Image Credit: gujrattourism, twitter@ani & historyofvadodara