वैष्णों देवी जहां ना जाने कितने भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं, हर साल यहां हजारों लोग मां वैष्णों देवी के दर्शन करने के लिए आते हैं लेकिन क्या आप जानती हैं वैष्णों देवी के मंदिर के पीछे एक कहानी है जिसे जानने के बाद ही समझ में आता है कि आखिरकार क्यों यहां हजारों भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। 

नवरात्र के समय तो वैष्णों देवी के दर्शन के लिए भीड़ लगती है। आलम ये होता है कि लोग घंटों लाइन में लगकर भी उनकी एक झलक पाने को बेताब रहते हैं। कई लोगों की मन्नत यहां आकर पूरी हो जाती है।

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चलिए जानते हैं क्या है वैष्णों देवी के मंदिर के पीछे की कहानी

जम्मू के त्रिकूट पर्वत पर एक भव्य गुफा है और वैष्णो देवी की गुफा में प्राकृतिक रूप से तीन पिण्डी बनी हुई है। यह पिण्डी देवी सरस्वती, लक्ष्मी और काली की हैं। भक्तों को इन्हीं तीन पिण्डियों के दर्शन होते हैं लेकिन मां वैष्णो की यहां कोई पिण्डी नहीं है। माता वैष्णो यहां अदृश रूप में मौजूद हैं फिर भी यह स्थान वैष्णों  देवी तीर्थ कहलाता है। 

ऐसा कहा जाता है कि वैष्णों देवी मंदिर का निर्माण लगभग 700 साल पहले एक ब्राह्मण पुजारी पंडित श्रीधर द्वारा कराया गया था। वह बहुत ज्यादा गरीब थे, उनके मन में मां वैष्णों देवी के लिए बहुत ज्यादा भक्ति थी। ऐसा कहा जाता है कि उन्हें एक दिन मां सपने में दिखी और कहां कि वो उनके लिए एक भंडारा कराए। मां वैष्णो देवी को समर्पित भंडारे के लिए एक शुभ दिन तय किया गया और श्रीधर ने आसपास के सभी गांव वालो को प्रसाद ग्रहण करने का न्योता भी दे दिया। 

vaishno devi temple history inside

मां वैष्णों देवी के इस भंडारे के लिए कुछ लोगों ने उनकी मदद की लेकिन वो मदद उस भंडारे के लिए काफी नहीं थी। जैसे-जैसे भंडारे का का दिन नजदीक आता जा रहा था ब्राह्मण की परेशानी बढ़ती जा रही थी। वह बस यही सोच रहे थे कि इतने कम सामान के साथ भंडारा कैसे हो पाएगा। 

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भंडारे से एक दिन पहले ब्राह्मण एक पल के लिए भी नहीं सो पा रहे थे यह सोचकर की वह मेहमानों के खाने का इंतजाम कैसे पाएंगे। वह सुबह तक समस्याओं से घिरे हुए थे और ऐसे में उन्हें बस देवी मां के किसी चमत्कार की उम्मीद थी। 

ब्राह्मण अपनी कुटिया के बाहर पूजा के लिए बैठ गए और दोपहर तक भंडारे के लिए मेहमान आना शुरू हो गए। सभी लोग ब्राह्मण की छोटी सी कुटिया में आसानी से बैठ गए और इसके बाद भी कुटिया में जगह थी। 

इसके बाद ब्राह्मण ने अपनी आंखें खोली और सोचा की वो इन सभी को भोजन कैसे करा पाएंगे। तब उन्होंने अचानक से एक छोटी सी लड़की को कुटिया से बाहर आते हुए देखा जिसका नाम वैष्णवी था। वह सभी को भंडारा किला रही थी और उस कन्या का नाम वैष्णवी था। 

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भंडारे के बाद ब्राह्मण कन्या वैष्णवी के बारे में जानने के लिए उत्सुक थे लेकिन अचानक से वैष्णवी गायब हो गई और उसके बाद किसी को नहीं दिखी। कुछ दिनों के बाद ब्राह्मण को वैष्णवी कन्या का सपना आया उसमें स्पष्ट हुआ कि वह मां वैष्णो देवी थी। 

कन्या के रूप में आई माता रानी ने ब्राह्मण को सनसनी गुफा के बारे में बताया। इसके बाद ब्राह्मण श्रीधर मां की गुफा की तलाश में निकल पड़े। जब उन्हें वह गुफा मिली तो उन्होंने तय किया की वह अपना सारा जीवन मां  की सेवा करेंगे। बस यही थी मां वैष्णों देवी की कहानी। भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जहां ऐसी ही कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन उन सभी में मां वैष्णों देवी की बात कुछ अलग है। 

आज इंडिया हो या फिर विदेश इस दुनिया के कोने-कोने से लोग अपनी मन्नतें लेकर वैष्णों देवी के धाम आते हैं।