कोलकाता भारत के सबसे ऐतिहासिक और महानगरीय शहरों में से एक है, जो अतीत में विभिन्न सभ्यताओं की गतिविधि के केंद्र में रहा है। चीनी, यहूदी और अन्य अप्रवासी समुदायों की बड़ी आबादी ने कोलकाता को घर कहा है, और शहर की आश्चर्यजनक वास्तुकला यहां पर स्थित विभिन्न संरचनाओं में नजर आती है। कोलकाता शुरू में ब्रिटिश राज की राजधानी थी, जिसका अर्थ है कि स्वतंत्रता पूर्व युग के दौरान उनके द्वारा निर्मित कई संरचनाएं अभी भी शहर में मौजूद हैं। राजबारी और संग्रहालयों से लेकर चर्चों और महलों तक, हमारे सिटी ऑफ जॉय में कई खूबसूरत विरासत स्थल हैं, जिन्हें आपको अवश्य देखना चाहिए। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कोलकाता में स्थित कुछ प्रसिद्ध पुरानी बिल्डिंग्स के बारे में बता रहे हैं, जो यकीनन आपको रोमांचित करेंगी-

राइटर्स बिल्डिंग

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1770 के दशक के अंत में बनी यह प्रतिष्ठित इमारत पहली बार 1780 में जनता के लिए खोली गई थी और यह बी.बी.डी. बाग में स्थित है। यह वर्तमान में राज्य सरकार का सचिवालय भवन है, लेकिन पहले यह ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर क्लर्क या ’लेखकों’ का घर था। ग्रीको-रोमन एक्सटीरियर के साथ, इमारत में स्तंभ, लोहे की सीढ़ियां, ग्रीक देवताओं की मूर्तियाँ, रोमन देवी मिनर्वा की मूर्ति और संरचना के ऊपर अन्य मूर्तियों के समूह के साथ एक 128-फीट लंबा बरामदा है।

मार्बल पैलेस

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एक ब्यूटीफुल और एलीगेंट बिल्डिंग जिसमें संगमरमर की दीवारें और फर्श हैं, इसे एक बंगाली व्यापारी राजा राजेंद्र मलिक ने बनवाया था। न्यूक्लॉसिकल स्टाइल में निर्मित, इमारत में ओपन कोर्टयार्ड हैं जो पारंपरिक बंगाली वास्तुकला में आम है। आज इसमें कई विक्टोरियन पेंटिंग और बहुत कुछ है। भवन में प्रवेश करने से पहले आपको पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है क्योंकि यह एक निजी आवास है।

बेलूर मठ

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हुगली नदी के पश्चिमी तट पर स्थित बेलूर मठ रामकृष्ण मठ और मिशन के मुख्यालय के रूप में कार्य करता है। यह स्थान स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित किया गया था और इसकी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है जो सभी धर्मों की एकता का प्रतीक हिंदू, इस्लामी, बौद्ध और ईसाई रूपांकनों को एकीकृत करता है। 40 एकड़ में फैले बेलूर मठ में रामकृष्ण आदेश का मुख्य मठ है। इसके अलावा इसमें रामकृष्ण, शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद के मंदिर और इसके परिसर में एक संग्रहालय भी है।

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जोरासांको ठाकुर बारी

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कोलकाता में एक अन्य प्रमुख ऐतिहासिक स्थल जोरासांको ठाकुर बारी नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का पैतृक घर है। यह 18वीं शताब्दी का आवास बुराबाजार के प्रसिद्ध सेत परिवार द्वारा कवि के दादा द्वारकानाथ टैगोर को दान की गई भूमि के एक टुकड़े पर बनाया गया था। इसे टैगोर हाउस के रूप में भी जाना जाता है। यह वही घर है जहां प्रसिद्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ था और उन्होंने अपने बचपन का एक बड़ा हिस्सा बिताया और अंतिम सांस ली। वर्तमान में, घर को एक म्यूजियम के रूप में बदल दिया गया है, टैगोर जी के जीवन से संबंधित पुस्तकों, पांडुलिपियों और अन्य प्राचीन वस्तुओं का एक कलेक्शन प्रदर्शित किया जाता है।

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सोवाबाजार राजबारी

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सोवाबाजार राजबाड़ी एक और प्रतिष्ठित विरासत इमारत है जिसे विशेष रूप से दुर्गा पूजा के दौरान अवश्य देखना चाहिए। यह बंगाल के सबसे पुराने शाही घरों में से एक है। राजा नबकृष्ण द्वारा निर्मित, यह इमारत अपने भव्य दुर्गा पूजा समारोहों के लिए और बंगाली संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने के लिए भी प्रसिद्ध है, जब यूरोपीय संस्कृति देश और शहर पर हावी थी।

नेशनल लाइब्रेरी

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वाल्यूम के मामले में भारत में सबसे बड़ा पुस्तकालय, डिजीटल पुस्तकों, मानचित्रों, पत्रिकाओं, पांडुलिपियों आदि सहित 21,00,000 से अधिक पुस्तकें हैं। इस लाइब्रेरी की सदस्यता निःशुल्क है। अगर आप पाठक नहीं भी हैं, तो भी 30 एकड़ में फैले हरे-भरे बगीचों में टहलने जाएं। 

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Image Credit- Travel Websites