भारत में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक कृष्ण जन्माष्टमी है, जिसे पूरे देश में बहुत उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाता है। इसे भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में माना जाता है, जन्माष्टमी मध्यरात्रि समारोह, नृत्य प्रदर्शन, पूजा-पाठ और भी कई उत्साह के लिए जाना जाता है। अगर आप इस बार जन्माष्टमी को खास बनाना चाहते हैं, तो आप अपने पूरे परिवार के साथ बाहर घूमने का प्लान बना सकते हैं। क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो जन्माष्टमी के दिन घूमने के लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकते हैं। 

मथुरा, उत्तर प्रदेश

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जन्माष्टमी के दिन आपके लिए मथुरा से अच्छा कोई और प्लेस हो ही नहीं सकता है। उत्तर प्रदेश की यमुना नदी के तट पर स्थित मथुरा एक जेल प्रकोष्ठ का घर है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह कृष्ण का जन्मस्थान है। इसलिए यहां के लोग जन्माष्टमी के अवसर पर, श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में प्रमुख समारोह का आयोजन करते हैं। मथुरा में इस दिव्य उत्सव का अनुभव करने के लिए हर साल लगभग 8 लाख भक्त आते हैं। आप भी मथुरा के इस भव्य समारोह में जाएं और अपनी जन्माष्टमी को और खास बना सकते हैं। 

मणिपुर

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भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित, मणिपुर उतना ही सुंदर है जितना आप सपनों में देखते या समझते हैं। प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति से भरपूर, मणिपुर उन पर्यटकों के लिए एक बेस्ट जिन्हें आस्था से प्रेम है। साथ ही, जो रोमांचक रास्ते से गुजरना या यात्रा करना पसंद करते हैं। इसके अलावा, मणिपुर के लोग त्योहारों को बहुत-ही उत्साह के साथ मनाते हैं और जन्माष्टमी जिसे कृष्ण जन्म के नाम से जाना जाता है। आपको आश्चर्य हो सकता है कि मणिपुर राज्य ने जन्माष्टमी को भी बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। आप मणिपुर जाने का भी प्लान बना सकते हैं और जन्माष्टमी को नए तरीके से मना सकते हैं।

जगन्नाथ मंदिर, पुरी

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जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे पवित्र चार धाम मंदिरों में से एक है, जो पुरी में स्थित है। भारत में भगवान कृष्ण के महत्वपूर्ण रूपों में से एक के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी समारोह के दौरान शहर के हर पहलू को अद्भुत और जीवंत सजावट से सजाया जाता है। भक्तों के लिए हर शाम पंडालों में कृष्ण और उनके सबसे अच्छे दोस्त बलराम का इतिहास रचा जाता है और दिखाया जाता है। इस दौरान बच्चों द्वारा कृष्ण लीला भी की जाती है, जो निश्चित रूप से एक मजेदार अनुभव है। ये उत्सव 17 दिनों तक चलता है और कृष्ण द्वारा कंस का वध के साथ समाप्त होता है। यहां कुछ जगहों पर मुंबई जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं।

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द्वारका

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द्वारका एक ऐसा शहर है जिसका बड़ा धार्मिक महत्व है। द्वारका नाम द्वार से लिया गया है जिसका अर्थ है द्वार और का ब्रह्मा का जिक्र है। और द्वारका का पूरा अर्थ है 'मोक्ष के द्वार' शायद भारत में भव्य जन्माष्टमी समारोह देखने के लिए सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है। इस शहर को कृष्ण के शासन में स्वर्ण नगरी के रूप में जाना था, यह उस वक्त हीरे, सोने और क्रिस्टल से बने विस्तृत भवनों आदि से समृद्ध था। 

इस स्थान ने लगभग 100 वर्षों तक कृष्ण के घर के रूप में कार्य किया और उनकी मृत्यु के बाद द्वारका का एक हिस्सा पूरी तरह से पानी में डूब गया। ऐसा कहा जाता है कि मथुरा छोड़ने के बाद लगभग पांच हजार वर्षों तक कृष्ण का निवास स्थान रहा। एक जीवंत भव्यता में उनके योगदान का सम्मान करने के लिए द्वारका शायद इस समय के दौरान सबसे अच्छी जगहों में से एक है। हर साल जन्माष्टमी के दिन हर साल लोग द्वारका आते हैं। 

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वृंदावन

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मथुरा से लगभग 15 किमी दूर वृंदावन है, जो कृष्ण से जुड़ा एक और स्थान है। ऐसा माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां कृष्ण बड़े हुए थे। वृंदावन राधा और गोपियों के साथ कृष्ण की प्रसिद्ध रास लीला का स्थल होने के लिए सबसे प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि कृष्ण ने वृंदावन के जंगलों में रास लीला की थी।

वृंदावन में जन्माष्टमी का त्योहार कृष्ण के जन्मदिन से 10 दिन पहले शुरू होता है। मथुरा की तरह, पूरे वृंदावन में भी रास लीलाएं की जाती हैं। जन्माष्टमी के दौरान मंदिरों को सजाया जाता है और पूरा शहर जगमगाता है। आप भी अपने पूरे परिवार के साथ यहां जा सकते हैं और जन्माष्टमी मना सकते हैं। 

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इसके अलावा, आप मुंबई, गोकुली आदि जगहों पर भी जा सकते हैं। आप इन जगहों पर घूमने का लुत्फ उठाने के साथ-साथ जन्माष्टमी का त्योहार भी मना सकते हैं। लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर और लाइक ज़रूर करें, साथ ही ऐसी अन्य जानकारी पाने के लिए जुड़े रहें हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit- (@Jagran and Google)