उम्र बढ़ने के साथ त्वचा के नीचे स्थित ऊतकों से वसा की मात्रा कम होने लगती है। इसके साथ ही सूर्य की रोशनी और प्रदूषण की वजह से होने वाले नुकसान के कारण रेखाओं और झुर्रियों के साथ त्वचा की चमक खो जाती है। जिसके कारण वृद्ध और थके हुए नजर आते हैं। पीआरपी थेरेपी के जरिये त्वचा की खोई हुई टेक्सचर, टोन और प्राकृतिक चमक वापस पाने में मदद मिलती है।

सुप्रसिद्ध कॉस्मेटोलॉज़िस्ट, ऐस्थिटीशियन व एल्पस कॉस्मेटिक क्लीनिक की एक्ज़ीक्यूटिव डॉयरेक्टर भारती तनेजा जी के अनुसार 'लोग ऐसे उत्पादों की तलाश में हैं जो सुरक्षित हों।' पीआरपी थेरेपी ऐसी ही तकनीक है जिसे अपनाने से एजिंग से जुड़ी सारी परेशानियां दूर हो सकती हैं, साथ ही यह झड़ते बालों को रोकने का यह एक नॉनसर्जिकल समाधान है और यह एक ऐसी बायोमैट्रिक्स तकनीक है, जो डैैमेज टिश्यू को ठीक करती है और उनकी पुनर्रचना करती है। यह थेरैपी पतले बालों के हेयर फौलिकल को शक्तिशाली बनाकर उन्हें घना करने में हेल्‍प करती है।

पीआरपी उपचार से लाभ

पीआरपी उपचार के शुरूआती लाभ यह है कि यह रोगी के खून का उपयोग करके तेजी से परिणाम प्रदान करता है। इसके अलावा, यह सस्ती और लागत प्रभावी है। इस प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद किसी तरह का निशान नहीं होता है और कोई भी दवा लेने की आवश्यकता नहीं होती है।

क्या है पीआरपी ट्रीटमेंट

PRP T inside

पीआरपी ट्रीटमेंट को प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा ट्रीटमेंट के नाम से भी जाना जाता है। इसमें जिस व्यक्ति का ट्रीटमेंट किया जाता है, उसका ही ब्लड ट्रीटमेंट के उपयोग में लाया जाता है। इसके लिए उसका एक बार में 30 एमएल ब्लड लिया जाता है। फिर ब्लड के सैंपल को सेंट्रीफ्यूगल एपरेटस में डालकर घुमाया जाता है, इससे प्लेटलेट्स और प्लाज्मा ब्लड से अलग हो जाते हैं। इस तरह अलग हुए प्लाज्मा में नॉर्मल ब्लड की तुलना में 5 गुना अधिक प्लाज्मा होता है जबकि प्लेटलेट्स मे कम से कम 8 ऐसे 'ग्रोथ फैक्टर्स', हार्मोंस या विटामिन होते हैं जो सेल्स के बढ़ने में मदद करते है जो आमतौर पर क्षतिग्रस्त टिश्यूज को जोड़ते हैं।

इसे भी पढ़ें: वर्ल्ड थेलेसीमिया डे : सुरक्षित रहना है तो ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए रखें पर्याप्त इंतजाम 

इसलिए उसे टिश्यू के बनने, पुराने खराब टिश्यू को ठीक करने में उपयोग किया जाता है। प्लेटलेट्स को अलग करने के बाद उसमें एक्टिवेटर मिलाया जाता है, जो प्लेटलेट्स को एक्टिवेट करने का काम करते हैं। जिससे जहां हेयर लॉस हो रहा है या स्किन पर झुर्रियां पड़ रही हों, वहां ये बेहतर तरीके से काम कर सके।

पीआरपी ट्रीटमेंट की प्रकिया

PRP T inside

ट्रीटमेंट की शुरुआत मेंलोकल एनेस्थेटिक क्रीम को चेहरे या जिस भी हिस्से का इलाज किया जाना है, वहां लगाया जाता है और उसे करीब 1 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। इसी बीच विशेष माइक्रो सुई की हेल्प से पीआरपी को सिर, भौंहे या चेहरे के उन क्षेत्रों में इंजेेक्ट किया जाता है, जहां उपचार किया जाना है। यह वृद्धिकारक तत्व चेहरे की त्वचा में मौजूद कोलेजन नामक प्रोटीन को भी बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे झाइयां, हल्की झुर्रियां और उम्र के साथ होने वाली फाइन लाइन्स की समस्या कम हो जाती हैं। इसके अलावा प्लेटलेट रिच प्लाज्मा की तकनीक से ढीली त्वचा में कसाव भी लाया जा सकता है। पीआरपी को प्रभावित क्षेत्र पर डर्मारोलर के द्वारा भी इन्फ्यूज किया जाता है। डर्मारोलर का प्रयोग करने से पहले त्वचा पर सुन्न करने वाली सामान्य क्रीम लगा दी जाती है। इस प्रक्रिया को पूरा होने के लिए कई सिटिंग्स की जरूरत होती है।

इसे भी पढ़ें: बीमारी की वजह से चेहरे की रंगत उड़ गई है तो अपनाएं ये 5 टिप्‍स और दिखे खूबसूरत

कैसे होता है सुधार

इससे प्लेटलेट्स के वृद्धि कारक और साइटोकींस में तेजी आती है, जिससे सुधार प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है और कोलेेेेजन बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। कोलेेजन स्किन को नया बनाने की प्रक्रिया में मदद करता है और चेहरे की फाइन लाइन्स और झुर्रियों में सुधार आता है। सुधार की प्रक्रिया की वजह से बेहतर हुआ खून का प्रवाह त्वचा की टोन और टेक्स्चर को बेहतर बनाता है और स्किन सेहतमंद और युवा चमक वाली नजर आने लगती है।

साइड इफेक्ट्स कोई नहीं

PRP T inside

इस ट्रीटमेंट में किसी भी बाहरी पदार्थ को शामिल नहीं किया जाता है, जिसके कारण किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट का कोई खतरा नहीं होता। न ही किसी प्रकार की कोई एलर्जी होती है। पीआरपी में व्हाइट ब्लड कॉर्पसल्स(कणिकाओं) की भी काफी मात्रा होती है जो इन्फेक्शन से बचाती है। 99 प्रतिशत लोगों को बिल्कुल भी दर्द नहीं होता, लेकिन 1 प्रतिशत लोगों में इंजेक्शन लगाने के कारण थोड़ी जलन जरूर हो सकती है। इसे करवाने पर आपके फेस पर हल्की सी सूजन आ सकती है, जो कुछ ही दिनों में चली भी जाती है। अच्छी तरह सुधार के लिए त्वचा को कुछ दिनों तक सूर्य की रोशनी से बचाना महत्वपूर्ण है। फैक्टर 50 सनब्लॉक क्रीम का इस्तेमाल लाभदायक साबित हो सकता है। इसके साथ ध्यान रखना होता है कि शरीर में विटामिन की कमी न हो, संतुलित आहार व कुछ सप्लीमेंट्स भी लेने पड़ सकते हैं। लेकिन चेहरे की आभा पाने के लिए यह बेहद प्रभावी प्रक्रिया है। लेकिन उन लोगों को पीआरपी ट्रीटमेंट नहीं लेना चाहिए, जिनका खून पहले से पतला है। साथ ही वह पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो।

कितने समय तक असरकारक

पीआरपी थेरेपी 18 महीने से 2 साल तक बेहतरीन असर दिखाती है। ऐसे में आपको हर 15 दिन में पार्लर में फेशियल करवाने की जरूरत भी नहीं है। बालों के लिए प्रति सेशन 10 से 15 दिन का अंतराल होता हैं।

पीआरपी ट्रीटमेंट की कॉस्ट

पीआरपी ट्रीटमेंट की कॉस्ट प्रति सेशन पर निर्भर करती है।