कई बार चेहरे पर ब्रेकआउट्स या एक्ने हो जाते हैं और इनसे निजात पाने के लिए महिलाएं तरह-तरह के उपचार करती हैं। कई बार एक्ने तो ठीक हो जाता है, लेकिन उसका स्पॉट चेहरे पर रह जाता है। इस तरह की समस्या के लिए स्पॉट ट्रीटमेंट काफी अच्छा माना जाता है। इसकी मदद से आपको महज रात भर में ही पिंपल्स और ब्रेकआउट से एक क्विक फिक्स में मदद मिलती है। स्पॉट ट्रीटमेंट एक्ने फाइटिंग टोनर या क्रीम की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। दरसअल, स्पॉट ट्रीटमेंट की खासियत ही यही है कि यह चेहरे पर मौजूद स्पॉट्स आदि को तेजी से हील करने के लिए ही डिजाइन किए जाते हैं। हालांकि आपको इसे लाभ तभी मिलता है, जब आप इसे सही तरह से इस्तेमाल करती हैं। दरसअल, कई बार महिलाएं स्पॉट ट्रीटमेंट के दौरान कुछ छोटी-छोटी मिसटेक्स को बार-बार दोहराती हैं, जिससे उन्हें पूरा लाभ नहीं मिल पाता। तो चलिए जानते हैं स्पॉट ट्रीटमेंट के दौरान किन बातों का रखें ख्याल-

लगाएं सही क्रम में

keep in mind when using spot treatment inside

स्पॉट ट्रीटमेंट का उपयोग करते समय एक गलती अक्सर लड़कियां कर बैठती हैं और वह है कि इसे सही क्रम में ना लगाना। अगर आप स्पॉट ट्रीटमेंट को सबसे आखिरी में अप्लाई करेंगी तो स्किन पर मौजूद पहले से ही स्किन केयर प्रॉडक्ट्स के कारण उसकी प्रभावशीलता कम हो जाएगी। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप इसे सही ऑर्डर में लगाएं। स्पॉट-ट्रीटमेंट को आप लाइट और वाटर बेस्ड सीरम को अप्लाई करने के बाद और मॉइस्चराइज़र से पहले अप्लाई कर सकती हैं।

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लगाएं सही समय पर

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यह एक छोटी सी ट्रिक है, लेकिन इसकी मदद से आप स्पॉट ट्रीटमेंट का मैक्सिमम बेनिफिट प्राप्त कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, स्किन रात के समय रिपेयर मोड में होती है और इसलिए इस समय इसका इस्तेमाल करना आपकी स्किन के लिए काफी अच्छा रहेगा। हालांकि, समय चुनने का सही तरीका आपके पूरे स्किन केयर रूटीन पर आधारित है। उदाहरण के लिए, यदि आप रात में रेटिनॉल-आधारित सीरम का उपयोग कर रहे हैं, तो सुबह में अपने स्पॉट-ट्रीटमेंट का उपयोग करें और इसके विपरीत दोनों सामग्रियों को एक साथ अप्लाई करने से त्वचा में जलन हो सकती है।

चुनें सही इंग्रीडिएंट्स

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किसी भी प्रॉडक्ट का लाभ आपको तभी मिलता है, जब उसके इंग्रीडिएंट्स को सही तरह से चुना गया हो। यह नियम स्पॉट ट्रीटमेंट में भी लागू होता है। स्पॉट ट्रीटमेंट को चुनते समय आप कुछ पॉपुलर इंग्रीडिएंट्स जैसे बेंज़ोइल पेरोक्साइड और सैलिसिलिक एसिड को चेक कर सकती हैं। साथ ही आपको यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वह आपकी स्किन टाइप के अनुरूप हो। उदाहरण के लिए, हाइड्रोक्विनोन जो कि एक स्किन ब्लीचिंग इंग्रीडिएंट है, संवेदनशील त्वचा को बहुत परेशान कर सकता है। आप इसके बजाय नियासिनमाइड को चुन सकती हैं, यह आपकी स्किन पर अधिक कोमल रहेगा। 

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सही हो तकनीक

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स्पॉट-ट्रीटमेंट को अप्लाई करने के लिए आप सही तकनीक को यूज करें। इससे आपको काफी लाभ होगा। इसके लिए आप एक क्लीन फिंगर लेकर प्रॉडक्ट को डैब करें। अब करीबन 60 सेकंड के लिए इंतजार करें ताकि प्रॉडक्ट अच्छी तरह ड्राई हो जाए। अब उस एरिया के चारों ओर मॉइश्चराइजर अप्लाई करें। अंत में, नमी को लॉक करने के लिए क्षेत्र पर थोड़ा सा मॉइस्चराइज़र लगाना न भूलें।

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ना करें ओवर एप्लीकेशन

कुछ महिलाओं की आदत होती है कि स्पॉट ट्रीटमेंट को बार-बार अप्लाई करती हैं ताकि हीलिंग प्रोसेस काफी तेज हो। लेकिन लेकिन अति-स्पॉटिंग-ट्रीटमेंट वास्तव में उस एरिया को ड्राई बना सकता है, जिससे स्किन परतदार और पैची बना नजर आती है।  इसलिए स्पॉट ट्रीटमेंट को केवल एक या दो बार ही अप्लाई करें या फिर आप इसे त्वचा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही अप्लाई करें।

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