अनन्या जब भी परेशान होती है, तो खूब खाती है। स्ट्रेस में उसे समझ ही नहीं आता कि वह क्या-क्या खा रही है। इसी के चलते लगातार उसका वजन भी बढ़ता जा रहा है। यही हाल हममें से कई लड़कियों का है। घर में बैठे बोर होते हुए या फिर किसी स्ट्रेस की वजह से हम जंक फूड आदि खाने में लगी रहती हैं। कभी थोड़ा काम से फुर्सत मिले, तो कदम अपने-आप किचन की ओर दौड़ पड़ते हैं। उंगलियों यूं ही मोबाइल पर चलने लगती हैं, और खोज निकालती हैं खाने के तमाम ऐप। अगर ऐसा आपके साथ भी हो रहा है, तो कहीं आप स्ट्रेस ईटिंग की शिकार तो नहीं हैं? आइए इसके बारे में विस्तार से जानें-

क्या है Stress Eating Disorder

what is stress eating

दरअसल, जब हम तनाव में होते हैं और किसी इमोशनल फेज से गुजर रहे होते हैं, तो हम इन नकारात्मक भावनाओं से निपटने के लिए खाने को माध्यम बनाते हैं। ऐसा नहीं है कि इस दौरान खाना खाने के बाद किसी तरह की खुशी होती है, बल्कि ऐसी स्थिति में हम गिल्टी महसूस करने लगते हैं। आपके जीवन में घट रही परेशानियां आपकी नाकारात्मक भावनाओं को ट्रिगर कर सकती है। कई बार आपके इमोशन्स आप पर इतने हावी होते हैं कि आप थोड़े भी गुस्से या तनाव में आकर तुरंत कुछ खाने के लिए दौड़ती हैं। खाना चूंकि एक डिस्ट्रैक्शन के रूप में भी काम करता है। इसलिए हम यह सोचकर खाने लगते हैं कि हम उस विशेष स्थिति से डिस्टैक्ट हो सकते हैं, मगर धीरे-धीरे ऐसा करना आदत बन जाता है। हालांकि आप अगर चाहें, तो कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर इससे निपट सकती हैं।

एक फूड डायरी रखें

keep food journal

आप दिनभर में जो भी खा रही हैं, उसकी एक डायरी अपने पास रखिए। आप क्या खा रही हैं, कितना खा रही हैं, कैसे खा रही हैं, ये सब अपनी डायरी में नोट कीजिए। आप भूखी होती हैं, तो कैसा महसूस करती हैं, इसे भी लिखें। आपने खराब मूड में क्या और कितना खाया और अच्छे मूड में कितना खाया, इसका एक लेखा-जोखा बनाइए। वक्त के साथ-साथ, आप यह नोटिस करेंगी कि आपके खाने के पैटर्न में कितना अंतर है। समय के साथ खाने और मूड के कनेक्शन के बारे में भी आप समझ पाएंगी।

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तनाव पर रखें नजर

no stress

हममें से कई छोटी-छोटी बातों पर भी तुरंत तनाव में आ जाते हैं। यही वजह होती है कि आप थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाने लगती हैं। इसलिए सबसे पहले यह ध्यान दें कि किन बातों से आपको तनाव होता है। जब आप यह समझने लगें कि छोटी बातों पर भी आप स्ट्रेस लेने लगती हैं, तो उसे इग्नोर करने की कोशिश करें। खुद को समझाने की कोशिश करें कि वो बातें बिल्कुल भी बड़ी नहीं हैं और आसानी से उनसे निपट सकती हैं। आप इस तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन की मदद ले सकती हैं। 

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फलों और सलाद का लें सहारा

eat fruits and salad

अगर किसी वजह से बार-बार कुछ खाने का मन कर ही रहा है, तो घर पर बना खाना खाइए और लंबे समय तक भूखे पेट बिल्कुल न रहें। फलों और सलाद का सेवन कीजिए। फल शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ाते हैं। साथ ही कभी बे-टाइम कुछ खाने का मन करें, तो सलाद का सेवन कीजिए। फलों और सलाद के सेवन से न सिर्फ आपके शरीर को ऊर्जा मिलेगी, बल्कि आपका पेट भरा रहेगा।

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एक्सरसाइज करते रहिए

workout and exercise

अगर कभी किसी चीज को लेकर स्ट्रेस में हैं, तो घर पर बैठने की बजाय, टहलने जाएं। योग, मेडिटेशन जैसी गतिविधियों में अपना मन लगाएं। ऐसे कई अध्ययन भी सामने आए हैं, जिनमें देखा गया है कि रोजाना योग करने वाले लोगों में एंग्जायटी और स्ट्रेस में कमी आई है। वर्कआउट और योग करने से आपके शरीर में ऊर्जा और फुर्ती रहेगी। इससे आपकी फूड क्रेविंग भी निंयत्रित होगी।

जो भी खाएं, धीरे-धीरे खाएं

eat slowly

कई बार ऐसा होता है कि हम जल्दी-जल्दी खाने के चक्कर में बहुत ज्यादा ही खा लेते हैं। इसका अंदाजा हमें हो ही नहीं पाता। क्या आपने कभी नोटिस किया कि स्ट्रेस में एक चॉकलेट की जगह आप जल्दी-जल्दी पहले दो, फिर चार चॉकलेट्स खा जाती हैं। इसलिए जो भी खाएं, उसे धीरे-धीरे खाएं। धीरे खाने से, खाना पचने में समय लगेगा और यह आपके दिमाग तक संकेत पहुंचाता है कि आपका पेट भर चुका है।

अगर इन सब कोशिशों के बाद भी आप स्ट्रेस ईटिंग पर काबू नहीं कर पा रही हैं, तो फिर डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

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