प्रेग्नेंसी एक ऐसी अवस्था होती है, जब महिलाओं को खाने-पीने से लेकर उठने बैठने तक को लेकर खास ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। इस दौरान शरीर में होने वाले बदलावों की वजह से कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिसका सामना हर गर्भवती महिला को करना पड़ता है। इसलिए रेगुलर चेकअप, हेल्दी डाइट, और कुछ एक्सरसाइज अक्सर करने की सलाह दी जाती है, लेकिन कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के वक्त कुछ ऐसी समस्याएं होती है, जिसके लिए उन्हें हमेशा तैयार रहना चाहिए। 

वहीं महिलाओं को उन शारीरिक परेशानियों के लक्षण और कारणों के बारे में जानकारी होनी चाहिए, ताकी वह इससे आहत होने के बजाय एहतियात बरतें और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें। जरूरत पड़ने पर आप इस बारे में अपनी गाइनोक्लोजिस्ट से भी परामर्श लें। कई बार इन समस्याओं से महिलाएं अवगत नहीं होती हैं, जिसकी वजह से होने वाली परेशानियों को हैंडल नहीं कर पाती हैं। 

प्री-एक्लेमप्सिया

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प्रेग्नेंसी में महिलाओं के ब्लड प्रेशर में बदलाव होना आम है, लेकिन अधिक बदलाव होने की स्थिति में यह प्री-एक्लेमप्सिया के लक्षण हो सकते हैं। यह प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते के बाद गर्भवती महिला को हो सकता है। वहीं इस स्थिति में ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ने लगता है और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। यह गंभीर स्थिति हो सकती है और यह एक गर्भवती महिला के लीवर और किडनी को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर इस स्थिति में परेशानी और अधिक न बढ़े इसके लिए बच्चे की जल्द डिलीवरी करने की सलाह देते हैं।

प्रीटर्म लेबर

अक्सर आपने सुना होगा कि कुछ महिलाएं नौ महीने या फिर प्रेग्नेंसी के 37वें हफ्ते पहले ही शिशु को जन्म दे देती हैं। इस स्थिति को प्रीटर्म लेबर कहा जाता है। प्रीटर्म लेबर कई वजहों पर निर्भर करता है, जो कि डिलीवरी से पहले की गई देखभाल से जुड़ा होता है। अगर आपको प्रीटर्म के लक्षण दिख रहे हैं, जैसे वजाइनल डिस्‍चार्ज अधिक होना, पेट और पेल्विक हिस्‍से में दबाव महसूस होना आदि तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। वहीं इस स्थिति से बचने के लिए डॉक्टर कुछ दवाईयां और आराम करने की सलाह देते हैं। 

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हाई ब्लड प्रेशर

high blood pressure

हाई ब्लड प्रेशर तब होता है जब धमनियां जो हृदय से अंगों तक रक्त ले जाती हैं और नाल संकुचित होती हैं। यह समस्या आपको कई अन्य परेशानियां जैसे आपके बच्चे के छोटे होने या डिलीवरी की तारीख से पहले बच्चा होने का खतरा पैदा कर सकता है। आपका ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहे इसके लिए हमेशा डॉक्टर से चेकअप करवाती रहें। नियमित जांच और हेल्दी डाइट के जरिए आप इसे कंट्रोल कर सकती हैं।

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जेस्‍टेशनल डायबिटीज

यह समस्या तब होती है जब आपका शरीर सही तरीके से चीनी को संसाधित नहीं कर पाता है और शरीर में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। ऐसे मामले में गर्भवती महिलाओं को अपनी डाइट का खास ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। ज्यादातर मामलों में यह समस्या प्रेग्नेंसी के बाद खत्म हो जाती है, लेकिन इस परिस्थिति से बचने के लिए जरूरी हैं मीठा और नमक युक्त चीजों का सेवन सही तरीके से किया जाए।

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एनीमिया

anemia

एनीमिया होने की एक प्रमुख वजह आपके शरीर में रेड ब्लड सेल का लेवल बहुत कम होना है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दिनों में आयरन या फोलिक एसिड खाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा प्रेग्नेंसी में एनीमिया से पीड़ित होने पर इसका नकारात्मक प्रभाव बच्चे पर भी पड़ता है। इसलिए इस स्थिति में हरी सब्जियां और आयरन युक्त चीजों को खाने की सलाह दी जाती है।

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