Close
चाहिए कुछ ख़ास?
Search

    फैमिली प्लानिंग के लिए बेहतर हो सकता है ये विकल्प, Vasectomy के बारे में जानें सब कुछ

    वैसेक्टोमी से अपनाएं परमानेंट बर्थ कंट्रोल। जानें इस प्रोसेस का तरीका क्या होता है और क्या इसके कोई साइड इफेक्ट्स हैं?
    author-profile
    Published -03 May 2020, 10:25 ISTUpdated -17 May 2020, 16:43 IST
    Next
    Article
    best defination of vasectomy

    क्या आप उन लोगों में से एक हैं जो बर्थ कंट्रोल का परमानेंट तरीका खोज रहे हैं? अगर हां तो वैसेक्टोमी (नसबंदी) आपके लिए एक अच्छा उपाय साबित हो सकती है। ये वैसे तो बहुत छोटा सा ऑपरेशन होता है जो पुरुषों पर किया जाता है, पर लोग इससे घबराते हैं। ये किसी भी डेकेयर यूनिट में किया जाने वाला छोटा सा ऑपरेशन है। ये न सिर्फ प्रेग्नेंसी रोकने का बेस्ट तरीका हो सकता है बल्कि ये परमानेंट भी है। इस प्रोसेस को इसलिए किया जाता है ताकि स्पर्म किसी भी हालत में सीमेन (वीर्य) से न मिलें। इसलिए अगर आप प्रेग्नेंसी रोकने के लिए नसबंदी का तरीका अपनाने का सोच रहे हैं तो ध्यान रखिए कि आपने ठीक तरह से फैमिली प्लानिंग कर ली हो। एक बार ये हो गया तो इस प्रोसेस को उल्टा नहीं किया जा सकता।

    कैसे होती है वैसेक्टोमी?

    आपको ठीक तरह से समझनाने के लिए हम थोड़ी बात इस प्रोसेस की भी कर लेते हैं। वैसेक्टोमी एक ऐसा प्रोसेस होता है जिसमें स्पर्म को ले जाने वाली ट्यूब को काटकर अलग सील कर दिया जाता है। ऐसे में स्पर्म किसी भी हालत में वीर्य से नहीं मिलता है। जब वीर्य में कोई स्पर्म काउंट नहीं होता तो प्रेग्नेंसी के चांस खत्म हो जाते हैं। इसे पुरुष नसबंदी कहा जाता है। इस प्रोसेस के बाद भी सेक्शुअल एक्टिविटी में कोई अंतर नहीं आता। आसानी से सारी गतिविधियां की जा सकती हैं। साथ ही साथ ऑर्गेज्म भी होता है। अगर हार्मोन की चिंता है तो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन लेवल वैसा ही रहता है जैसा इस प्रोसेस के पहले था। ये किसी भी तरह का हार्मोनल इमबैलेंस नहीं रखता।

    effects of vasectomy

    ये बहुत ही असरदार प्रोसेस है और बहुत ही कम गुंजाइश इस बात की होती है कि अलग की गई नस वापस से जुड़ जाए। इसलिए ये कहा जाता है कि लोग रेग्युलर चेकअप लें और कुछ-कुछ अंतराल के बाद डॉक्टर से सलाह मश्वहार करते रहें जब तक डॉक्टर ये नहीं कह देता कि अब इस प्रोसेस के रिपीट होने की कोई गुंजाइश नहीं है। 

    मरीज आम तौर पर इस प्रोसेस के एक हफ्ते के अंदर पूरी तरह से रिकवर हो जाता है और हर तरह की गतिविधी को फिर से कर सकता है। जिंदगी में किसी भी तरह की रुकावट नहीं होती है।

    Recommended Video

    वैसेक्टोमी के साइड इफेक्ट्स-

    वैसे तो वैसेक्टोमी बहुत ही सुरक्षित प्रोसेस है, लेकिन इसके कुछ छोटे-छोटे साइडइफेक्ट्स हो सकते हैं जैसे सूजन, जलन, रैश पड़ना या किसी बहुत ही गंभीर केस में इन्फेक्शन। हालांकि, ये साइड इफेक्ट्स अपने आप होकर अपने आप ही ठीक भी हो जाते हैं और किसी भी व्यक्ति को इससे परमानेंटली कोई नुकसान नहीं होता। अगर ये लक्षण एक हफ्ते से ज्यादा दिखते हैं तभी ये जरूरी है कि डॉक्टर से बात की जाए और उचित सलाह लेकर ट्रीटमेंट शुरू किया जाए।

    क्या सावधानियां बरतने की जरूरत है?

    भले ही वैसेक्टोमी किसी ने करवा ली हो फिर भी ये जरूरी है कि कुछ समय तक वीर्य की जांच करवाई जाए कि कहीं इसमें स्पर्म काउंट तो नहीं। ये टेस्ट पहले 10-20 इजैक्युलेशन के बाद होता है और इसे डॉक्टर फॉलो अप ट्रीटमेंट के समय करता है जो अक्सर तीन महीने बाद होता है। डॉक्टर से कंफर्मेशन मिलने के बाद ही आप पूरी तरह से निश्चित हों। तब तक नॉर्मल गर्भनिरोधक चीज़ों का इस्तेमाल करें जैसे कंडोम आदि। कंडोम वैसे भी बहुत अच्छा तरीका है खुद को सेक्शुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों से बचाने का। उनसे सुरक्षा वैसेक्टोमी के जरिए नहीं मिलती है।

    वैसेक्टोमी एक बहुत ही अच्छा और परमानेंट फैमिली प्लानिंग का तरीका है, हालांकि, इसे करने से पहले अपनी फैमिली प्लानिंग कर लीजिए क्योंकि एक बार ये हो गया तो ये उल्टा नहीं किया जा सकता और उसके बाद कंसीव भी नहीं किया जा सकता है।

    बेहतर अनुभव करने के लिए HerZindagi मोबाइल ऐप डाउनलोड करें

    Her Zindagi
    Disclaimer

    आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।