चल रही गतिहीन जीवन शैली में, बिना एक्‍सरसाइज और अनुचित आहार के आलसी रवैये के आदी होने की संभावना बहुत अधिक होती है। अध्ययनों के अनुसार, 40 से कम उम्र के लोगों को हार्ट अटैक पड़ने का अनुपात पिछले 10 वर्षों से हर साल 2 प्रतिशत बढ़ रहा है। 

जब व्यक्ति के 18 वर्ष की आयु से हार्ट रोगों को रोकने की बात आती है, तो चिकित्सा की पारंपरिक प्रथा आयुर्वेद अत्यधिक प्रभावी है। आयुर्वेद के अनुसार, प्रकृति के आधार पर - कफ, पित्त, वात, विभिन्न प्रकार के अनुसार आपको हार्ट हेल्‍थ के लिए खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। दिल को अच्‍छा रखने के लिए कौन सी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हमारे लिए अच्‍छी हो सकती हैं? इस बारे में हमें वेदास क्योर के संस्थापक और निदेशक, श्री विकास चावला जी बता रहे हैं।

अर्जुन की छाल 

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मजबूत एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के साथ अर्जुन की छाल हाई कोलेस्ट्रॉल के लेवल को मैनेज करने में बेहद फायदेमंद हो सकती है। यह गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार कर सकती है। यह वात प्रकृति वाले लोगों के लिए अच्‍छी हो सकती है।

पपीता

दिल की सेहत के लिए एक आसान घरेलू उपाय 'पपीते' के फल का सेवन करना है। यह फल एंटीऑक्सीडेंट विटामिन-ए, विटामिन-सी और विटामिन-ई से भरपूर होता है। यदि कोई व्यक्ति एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर डाइट लेता है, तो यह हार्ट रोग के जोखिम को काफी कम कर सकता है। 

एंटीऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को रोकते हैं। जब कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीकृत हो जाता है, तब यह अवरोध पैदा करने की अधिक संभावना रखता है जिससे हार्ट रोग होता है।

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दालचीनी

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दालचीनी (कफ प्रकृति वाले लोगों के लिए दालचीनी) हर भारतीय किचन में पाया जाने वाला एक और बहुत ही सामान्य, लेकिन शक्तिशाली मसाला है। यह थक्कारोधी के रूप में काम करता है, ब्‍लड प्रेशर को भी कम कर सकता है और अर्थराइटिस और अन्य सूजन के कारण होने वाली समस्‍याओं से राहत देता है। 

दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए भी दालचीनी का सेवन सुबह गर्म पानी के साथ करना फायदेमंद हो सकता है।

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अश्वगंधा

वात प्रकृति के लोगों के लिए अनुशंसित अश्वगंधा या भारतीय जिनसेंग फायदेमंद हो सकता है। छोटे हल्के हरे फूल, साधारण पत्ते और लाल बेरीज के साथ यह एक काफी छोटी झाड़ी है। अश्वगंधा के ज्यादातर फायदे जड़ और पत्तियों से मिलते हैं। चाय में पत्तियों का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। 

एक अध्‍ययन के अनुसार, अश्वगंधा ने लंबे समय तक तनाव में रहने वाले वयस्कों में 60 दिनों में कोलेस्ट्रॉल लेवल को औसतन 17 प्रतिशत तक कम किया। यह शरीर में कोर्टिसोल के लेवल को भी कम करता है, जो तनाव हार्मोन है।

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आप भी इन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों लेकर अपने दिल को हेल्‍दी रख सकती हैं। लेकिन इन्‍हें लेने से पहले एक बार एक्‍सपर्ट से जरूर पूछ लें क्‍योंकि हर किसी का शरीर जड़ी-बूटियों के प्रति अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। जरूरी नहीं, जो जड़ी-बूटी किसी एक के लिए अच्‍छी है, वह दूसरे के लिए भी उसी तरह से काम करें। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।  

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