आज के समय में अधिकतर लोग गठिया की बीमारी से ग्रस्त हैं। इस दर्द का असर सबसे ज्यादा घुटनों और रीढ़ की हड्डी पर होता हैं। फिर धीरे-धीरे इसका असर शरीर के अन्‍य जोड़ों पर भी पड़ने लगता हैं। जब शरीर में यूरिक एसिड जमा हो जाता है। तब ये गठिया का रूप ले लेता है। इसके ज्यादा बढ़ने से जोड़ों में सूजन और दर्द काफी बढ़ जाता है। इसलिए इसे बीमारी से राहत पाने के लिए उपाय अपनान बेहद जरूरी है। अगर आप भी गठिया से परेशान हैं तो आप आयुर्वेदिक उपायों को अपना सकते हैं। 

 

जी हां गठिया, जिसे आयुर्वेद में सन्धिवात का नाम दिया गया है, आमतौर से ये वृद्ध लोगों में पाई जाने वाली बीमारी है। लेकिन आजकल ये यंग लोगों में भी देखने को मिल जाती है। यह एक ऐसा दर्द होता हैं वो असहनीय होता है। इसका समय पर इलाज न करने से प्रॉब्लम बढ़ सकती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार

गठिया वात दोष के बढ़ने से होता है और इसीलिए, इस जोड़ों के रोग को ठीक करने के लिए वात दोष को ठीक करना बेहद जरूरी है। ऐसे बहुत सारे आयुर्वेदिक उपचार उपलब्ध हैं, जिनसे यह जोड़ों के दर्द की बीमारी पूर्ण रूप से ठीक की जा सकती है और बढ़ने से रोकी जा सकती है। जीवा आयुर्वेदा के डाईरेक्टर, डॉक्टर प्रताप चौहान।

reducing joint pain inside  

आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद की मानें, तो जोड़ों के दर्द को ठीक करने के लिए पंचकर्म उपचार बहुत कारगर है, क्योंकि पंचकर्म में सुझाई गयी मालिश वात दोष को संतुलित करती है। मालिश करने से जो गर्मी उत्पन्न होती है, वह जोड़ों को भी ताकत देकर जोड़ों के दर्द में राहत देती है।

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मेथी के बीज

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मेथी के कड़वे दानों या बीजों का सेवन करने से जोड़ों का दर्द प्राकृतिक रूप से ठीक हो जाता है। जैसा कि आपको पता ही है वात दोष के बढ़ जाने से गठिया होता है। ऐसे में भोजन में पिसा हुआ मेथी दाना मिलाकर खाने से वात दोष नियंत्रित हो जाता है और स्थिति में सुधार आता है। यह शरीर में से सभी विषाक्त अपशिष्ट बाहर निकाल देता है। गरम सरसों के तेल के साथ मेथी के बीजों को मिलाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से भी आराम मिलता है।

आयुर्वेद में सुझाई गयी प्राकृतिक औषधियों का सेवन

आँवला, अदरक, अलसी, अखरोट, तुलसी आदि प्राकृतिक औषधियों में सूजन प्रतिरोधक व एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो कि प्रभावित क्षेत्र का उपचार करके जोड़ों के दर्द से राहत देते हैं। बीमारियों को ठीक करने के अलावा इन जड़ी बूटियों के कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं, जो लगातार इस्तेमाल करने पर फायदे देते हैं।

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योगासन और व्यायाम

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हालांकि गठिया के मामले में उपचार ही सबसे प्रभावी रहता है, लेकिन लगातार उचित योगासन और व्यायाम से भी इसे ठीक किया जा सकता है या रोका जा सकता है। ऐसा करने से शरीर में लचीलापन रहता है और रक्त का संचालन भी अच्छा बना रहता है। योग के अलावा आप तैराकी, साइकिल चलाना, टहलना जैसी आसान क्रियाएँ भी उपयोग में ला सकते हैं, जो कि काफी असरदार हैं।